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BIG NEWS: विश्व बैंक की रिपोर्ट में चेतावनी- आप भी हो सकते हैं गरीब, पढें खबर

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BIG NEWS: विश्व बैंक की रिपोर्ट में चेतावनी- आप भी हो सकते हैं गरीब, पढें खबर

डेस्‍क :-

आप कोरोना से पीड़ित भले ही न हुए हों, लेकिन कोविड-19 की वैश्विक महामारी ने आपको प्रभावित जरूर कर दिया है. विश्व बैंक की एक रिपोर्ट की मानें तो इस मर्ज के कारण दुनिया भर में 2021 तक करीब 1.5 अरब (150 मिलियन) लोग ‘अत्यंत गरीबी’ की श्रेणी में आ सकते हैं. कोरोना के कारण हुई मौतों ने अजीब सा भय ला दिया है. लोगों का कामकाज प्रभावित है तो वहीं, कुछ कारोबार बुरी तरह ठप हैं. लॉकडाउन और कोरोना के कारण बने हालातों ने रोजगार के बड़े अवसरों को खत्म सा कर दिया है, जो नौकरी कर पा रहे हैं, उन्हें भी मूल से कम वेतनमान पर काम करना पड़ रहा है. फिल्म, परिवहन या पर्यटन उद्योग में काम न के बराबर है. इन सब बिंदुओं पर गौर करते हुए विश्व बैंक ने एक रिपोर्ट तैयार की है. इसमें गरीबी और उन्नति में हिस्सेदारी को प्रमुखता दी गई है. इसे ‘पॉवर्टी एंड शेयर प्रॉस्पेरिटी’ नामक संज्ञा दी गई है. इस रिपोर्ट की मान लें, तो बीते 20 वर्षों में ऐसा पहली बार होगा जब वैश्विक तमाम प्रयासों के बावजूद गरीबी दर में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.

इस लॉकडाउन और अनलॉक के बीच यदि आपको कोई खास फर्क न पड़ा हो, आप कोरोना से संक्रमित हुए हों और अब स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, या कोरोना आपको 'टच' तक न कर सका हो, तो भी आपकी जेब में सेंधमारी हो चुकी है. आपका धन और आने वाला धन इस कोरोना की चपेट में आ चुका है. आप दुनिया भर के उन 1.5 अरब लोगों में से एक हो सकते हैं जो इसके कारण अत्यंत गरीबी का सामना करने जा रहे हैं. ग्रामीण और स्वरोजगार से जुड़े लोगों के अपेक्षा, शहरी मध्यम और गरीब वर्ग पर इसका अधिक असर होगा. अनौपचारिक और विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत लोगों पर सीधी चोट हो सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण 2020 के अंत तक करीब 88 करोड़ से 1 अरब 15 करोड़ लोगों के गरीब होने के संकेत हैं, वहीं यह आंकड़ा 2021 तक 1.5 अरब तक पहुंच जाएगा. दुनिया मंदी की चपेट में आएगी और अत्यंत गरीबी का जाल, अपने भंवर में 1.4 फीसद जनसंख्या को ले सकता है.

दुनिया के इन देशों पर बढ़ सकता है गरीबी का असर
विकासशील देशों पर कोरोना महामारी के कारण आर्थिक मंदी और गरीबी का अधिक प्रभाव होगा और यहां मुसीबत लंबे समय तक बनी रहेगी. विश्व बैंक की रिपोर्ट में 140 रुपए प्रतिदिन या चार-पांच हजार रुपए प्रतिमाह से कम आय स्तर पर जीवन बिताने वालों की स्थिति को 'अत्यंत गरीब' माना गया है. इसमें कहा गया है कि उप सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया के देशों के सामने पहले ही बहुत चुनौतियां रही है. लोगों के सामने भुखमरी, बेरोजगारी और स्वास्थ्य की समस्याएं हैं, ऐसे में यहां सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है. ऐसा अनुमान है कि उप-सहारा अफ्रीका क्षेत्र में 26 से 40 करोड़ लोग अत्यंत गरीब हो जाएंगे. गौरतलब है कि दुनिया के सबसे अधिक 20 गरीब देशों में से तकरीबन 18 देश उप-सहारा अफ्रीका क्षेत्र से हैं. इन देशों के अलावा मध्यम आय श्रेणी वाले देशों में भी करीब 82 प्रतिशत लोग 'अत्यंत गरीबी' की जद में आ सकते हैं. दक्षिण एशिया में भी इसका बुरा असर देखने को मिलेगा, लोगों को इस कुचक्र से जल्द मुक्ति नहीं मिल सकेगी. दुनिया से गरीबी मिटाने वाले प्रयासों को भी बड़ा झटका लगा है. वैश्विक स्तर पर जो कार्यक्रम चलाए गए वे कमजोर पड़ गए हैं. आज की स्थिति को देखते हुए दुनिया से गरीबी समाप्त करने के लक्ष्य को 2030 तक हासिल करना बहुत कठिन हो गया है.
बढ़ती जनसंख्या है सबसे बड़ा कारण
भारत में भी हालात नाजुक हैं और वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2019 की माने तो भारत ने 2006 से 2016 तक दस साल के दौरान 27 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला. जबकि 2005-06 में भारत में 64 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी की स्थिति में जी रहे थे. आंकड़ों पर भरोसा करें तो 2016-17 में गरीब लोगों की संख्या घटकर 36 करोड़ तक आ गई थी. ऐसा भी अनुमान है कि 2016-17 में करीब 27.9 प्रतिशत जनता गरीब थी. भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों की संख्या, शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा अधिक है. भारत में गरीबी का सबसे बड़ा कारण है, जनसंख्या का बहुत तेजी से बढ़ना. यह दुनिया का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है. अगर यह रफ्तार नहीं रोकी गई तो बहुत जल्द भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश होगा. आबादी के बाद गरीबी का दूसरा बड़ा कारण है कृषि उत्पादकता में कमी होना. किसानों को उपज का सही मूल्य न मिल पाना भी ग्रामीण इलाके में गरीबी बढ़ाने का एक कारण है. इसके साथ ही मानव संसाधनों का सही ढंग से इस्तेमाल न होने से भी गरीबी बढ़ रही है. वहीं पूंजी का निवेश कम होने से रोजगार के अवसर कम हैं, लिहाजा बेरोजगारी या कम मानदेय पर मजदूरी करने की मजबूरी है. इनके अलावा कुछ और कारण हैं जैसे जातिप्रथा और परंपराएं.

भारत में पढ़े-लिखे भी फंस रहे हैं गरीबी के दलदल में विश्व बैंक की ‘पॉवर्टी एंड शेयर प्रॉस्पेरिटी’ रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब पढ़े-लिखे और शहरी लोग भी गरीबी के कुचक्र में फंस रहे हैं. यह महामारी के कारण दुनिया भर में देखा गया, नया ट्रेंड है. ग्रामीण और अशिक्षित, अकुशल लोगों के कारण भी गरीबी के चंगुल से बाहर निकल पाना कठिन होता है. भारत में लोगों को रोजगार देने, प्रशिक्षित करने और लंबे समय तक की आजीविका देने के लिए सरकार बड़े कार्यक्रम चला रही है. सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान भी शुरू किया है. अब गरीबी उन्मूलन संबंधी नीतिगत उपायों का प्रावधान करने का समय आ गया है. भारत त्वरित आर्थिक विकास और व्यापक सामाजिक सुरक्षा उपायों के माध्यम से गरीबी के सभी रूपों को समाप्त करने के लिए एक व्यापक विकास रणनीति लागू कर रहा है. ग्रामीण आबादी को 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम' के तहत एक वर्ष में 100 दिन का गारंटीकृत रोज़गार दिया जाता है. गरीब परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सरकार द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का भी लागू है. प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण/शहरी और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से बड़ा परिवर्तन हो रहा है. वंचित एवं कमज़ोर वर्गों के लिये विभिन्न वित्तीय सेवाएं जैसे- मूल बचत बैंक खाते की उपलब्धता, आवश्यकता आधारित ऋण और बीमा आदि के लिए प्रधानमंत्री जन धन योजना भी जारी है


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