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KHABAR : श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी महाराज ने कहा- जीवन में सुख पाना है तो राम नाम की संपत्ति साथ लेकर चलो, पढ़े खबर 

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KHABAR : श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी महाराज ने कहा- जीवन में सुख पाना है तो राम नाम की संपत्ति साथ लेकर चलो, पढ़े खबर 

नीमच :-

नीमच। जीवन में सच्चा सुख प्राप्त करना है तो राम नाम की संपत्ति को साथ लेकर चलो। राम नाम जपने से आत्मा का कल्याण हो सकता है। सबरी को प्रतीक्षा करने पर राम को भी आना पड़ा था। शबरी की इच्छा पूरी करने के लिए राम ने शबरी के जूठे बेर खाए थे जो आज भी आदर्श प्रसंग है। गुरु वचनों का पालन करने के लिए शबरी नवदा स्मरण भक्ति का उदाहरण है। शबरी 2 किलोमीटर रोज झाड़ू निकालती थी। उसी रास्ते से श्री राम शबरी के पास पहुंचे थे। शबरी ने नेत्रों के जल से राम के पद का अभिषेक किया था।

यह बात श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर ईश्वरानंद ब्रह्मचारी ध्यान योगी महर्षि उत्तम स्वामी महाराज ने कही। वे श्री गोपाल कृष्ण गौशाला कल्पवृक्ष धाम सुखानंद तीर्थ के समीप अनोपपुरा के प्रांगण में आयोजित श्री राम कथा के अष्टम दिवस बुधवार को बोल रहे थे ।उन्होंने  कहा कि रामायण के प्रत्येक चरित्र का अपना अलग महत्व है। सभी चरित्र हर प्रकार से आदर्श प्रेरणा देते है। रावण जब सहस्त्रार्जुन के दरबार में गया तब रावण के शरीर पर वहां की महिलाओं ने नृत्य किया जो आज भी प्रासंगिक है। सहस्त्रार्जुन की बाहों में 6 माह तक रावण कैद रहा था।

इन्द्र रावण से युद्ध में डर कर भाग गया। इतना शक्तिशाली होने के बावजूद भी व्याभिचारी होने के कारण रावण के कुल में कोई दीपक लगाने वाला नहीं बचा था। पूर्व जन्म में किए गए पाप कर्मों के कारण अगले जन्म में नाक कान आंख इंद्रिया भी नहीं होती है। प्रारब्ध में कई कारण ऐसे होते हैं जो तुरंत फल प्रदान करते हैं। सूर्पनखा व्याभीचारी स्त्री थीं इसलिए परमात्मा ने उसकी नाक काटी थी। रावण के पास 14000 राक्षसों का बल था उसके बावजूद भी हुए अपनी बहन की नाक काटने से रक्षा नहीं कर पाया था।

गलत काम करने के बाद कभी कभी पश्चाताप के लिए भी कुछ नहीं बचता है इसलिए हम पुण्य कर्म करें और सत्य के साथ रहे।रावण के अनेक राक्षस हर क्षेत्र में अधर्म करते रहते थे। खर दूषण भी उनमें से एक था। खर दूषण में एक हजार हाथियों का बल निहित था।संसार में जितनी भी लड़ाई होती है जर जोरू जमीन के पीछे होती है। कई परिवार नष्ट हो गए हैं ।महाभारत भी स्त्री द्रोपति के कारण हुई। रामायण भी सीता के कारण नहीं शूर्पणखा के कारण हुई। इसलिए महिलाओं को बीच में नहीं बोलना चाहिए।

राम ने खर दूषण के साथ आए हुए 14000 राक्षसों को एक ही तीर से वध कर दिया था जो आज भी आदर्श प्रेरणादायक है। यदि हम राम और सीता के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेकर  जीवन में उनके गुणों को आत्मसात करें तो हमारा भी कल्याण हो सकता है। सुरपणखा  ने रावण को कहा कि आपके पास 80000 पत्नियां हैं सीता उनसे भी अधिक सुंदर है उसे लेकर आओ। किसी की सुंदरता के पीछे भागना व्याभिचारी अवगुण हैं।
मनुष्य कर्मों से कम शब्दों के हिंसा ज्यादा करता है ।यह भी व्यभिचार है ।माता-पिता की इच्छा के बिना पुत्र पुत्रियां विवाह कर रहे हैं। यह अनुचित है 25 वर्ष तक बच्चे को माता पिता बड़े करते हैं वह अपने फैसले बिना किसी अनुभव के स्वयं ले लेता है। यह गलत है यह पाप का अंग है। इससे सदैव बचना होगा। जो कर्मेंद्रियों के पीछे भागते हैं वे रावण के अनुयाई कहलाते हैं। 

रावण इतना सुंदर था कि उस पर पूरे विश्व की 70000 स्त्रियां मोहित हो गई थी। सुंदरता में संयम का होना आवश्यक है। यही सत्य है। रावण सीता के सौंदर्य की चर्चा सुनकर सीता को लेने चल पड़ा था। रावण को श्री राम का बल पता था इसलिए संन्यासी का भेष बदलकर सीता का हरण किया था। मारीच स्वर्ण मृग हिरण बन कर राम के हाथों मरने नहीं जाना चाहता था, लेकिन रावण के हाथों मरने के बजाय उसने राम के हाथों से मरना उचित समझा। अपने आराध्य को छोड़कर यदि कोई अन्य वस्तु के पीछे भागता है तो उसकी हालत सीता जैसी हो जाती है। 

ईश्वर से मांगना सरल है लेकिन ईश्वर को मांगना कठिन है। जगत में वही परम ईश्वर पूर्ण है। मनुष्य अपने स्वार्थ में अंधा होकर गलत कदम उठाता है।ईश्वर को छोड़ कर संसार में कोई भी वस्तु मूल्यवान नहीं है।प्रतिदिन ईश्वर के लिए भी 1 घंटे का समय निकालना चाहिए तभी हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है। परिवार को भी समय देना चाहिए लेकिन जब ईश्वर के सामने बैठे तो सिर्फ ईश्वर की तरफ ही ध्यान एकाग्र होना चाहिए। 

गिद्ध राज ने धर्म के मार्ग पर चलने के लिए पुरुषार्थ किया तो उसका जीवन सार्थक हो गया है। राम ने निषाद राज को अपना मित्र बनाया था। विषमता में राम है राम ने समानता का संदेश दिया। राम भावना और  प्रेम से प्रसन्न होते थे।प्रेम के कारण राम शबरी के जूठे बेर भी खाने को तैयार हो गए थे ।यदि प्रेम नहीं है तो छप्पन भोग भी बेकार होता है। मीरा ने रेदास को गुरु बनाया था।गुरु के चरणों में समर्पण भक्ति का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। भक्ति कपट रहित होना चाहिए। भक्ति में दिखावा नहीं होना चाहिए।
 

श्री राम कथा में आसन दरिया नाथ पीठ सुखानंद के महंत लाल नाथ,पर्यटन विकास निगम मध्य प्रदेश शासन के पूर्व अध्यक्ष तपन भौमिक, नरेंद्र गांधी ,धर्माचार्य प्रमुख राकेश शास्त्री, श्री गोपाल कृष्ण गौशाला  कल्पवृक्ष धाम संरक्षक ठाकर भंवर सिंह अध्यक्ष पुष्कर कुमार शर्मा उपाध्यक्ष सतीश चंद्र राठी सह सचिव गीता लाल पचोरिया राजेश वीर कोषाध्यक्ष प्रेम प्रकाश सुथार से कोषाध्यक्ष कैलाश चंद शर्मा रामनारायण वीर सदस्य गोवर्धन लाल चंदोलिया भेरूलाल गाजी अभय कुमार मारू ,वैष्णव दास  विजयपुर योगानंद कानपुर ,बगदीराम धाकड़ पंचायत समिति प्रधान निंबाहेड़ा, अजय जाट शंभूपुरा मुकेश खंडेल प्रहलाद गुर्जर शैलेश चौबीसा बांसवाड़ा कमलेश पुरोहित भंवर सिंह श्याम लाल शर्मा सोहन लाल व्यास श्रीमती विद्या देवी शीला देवी उदयपुर गौरी शंकर तिवारी प्रभु लाल पालीवाल पुष्कर गायरी प्रतापगढ़ शांतिलाल व्यास बांसवाड़ा मुकेश देसाई कुबेर भंडार गुजरात वीरेंद्र सिंह गुजरात , गणपत सिंह गुजरात, भुवन मुकुंद पंड्या बांसवाड़ा करण ,राजेंद्र सिंह  सरपंच मीनाना, रमन गहलोत, सरपंच गुड्डी बाई भंवरलाल धनधोलिया,शांतिलाल चौहान, सुखानंद मंदिर प्रबंधक बंसीलाल नागदा आदि गणमान्य लोग उपस्थित थें। श्री राम कथा के अंत में उपस्थित अतिथियों द्वारा उत्तम स्वामी जी के सानिध्य में गौशाला में पौधारोपण किया गया उन पौधों की देखभाल का संकल्प लिया गया।


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