POLITICS : सांसद सुधीर गुप्ता बोले मिलेगा रोजगार, बदलेगी पर्यावरण की तस्वीर, मनरेगा के तहत पौधरोपण पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार

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POLITICS : सांसद सुधीर गुप्ता बोले मिलेगा रोजगार, बदलेगी पर्यावरण की तस्वीर, मनरेगा के तहत पौधरोपण पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार

मंदसौर :-

फलदार वृक्षों के रोपण और इसके साथ पर्यावरण को सुधारने की पहल अब लोगों को रोजगार देने के साथ होगी। मनरेगा योजना से जोड़कर ना सिर्फ लोगों को रोजगार दिया जाएगा बल्कि पर्यावरण की सूरत भी बदली जाएगी। इस योजना का पूरा खाका विकास आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी कर दिया गया है। इस अभिनव पहल के लिए सांसद सुधीर गुप्ता ने प्रत्येक पंचायत स्तर तक अभियान के रूप में चलाए जाने की अपील करते हुए इसके तहत अधिकाधिक रोजगार उपलब्ध करवाते हुए वृहद पौधरोंपण किए जाने की अपील की है।

प्रत्येक जगह लग सकेंगे पौधे

इस योजना के तहत प्रत्येक स्थान जैसे सड़क किनारे सामुदायिक स्थल सार्वजनिक परिसर अथवा परिसर के चारों ओर जैसे विघालयों छात्रावास खेल मैदान आदि की बाउण्ड्रीवाल मोक्षधाम पर पौधे लगाए जा सकेंगे। ट्री गार्ड कंटीली झाड़ी या बांस से बनाए जा सकेंगे। इसके तहत सडक किनारे 100 पौधे प्रति किलोमीटर एक तरफ और 200 पौधे प्रति किलोमीटर के दोनां तरफ 625 पौधे सामुदायिक स्थल और 200 पौधे सार्वजनिक स्थल पर उपलब्धता के आधार पर लगाए जा सकेंगे।

लग सकेंगे इन प्रकार के पौधे

इस योजना के तहत आम ईमली जामुन महुआ नीम करंज सुरजना अर्जुन सप्तपर्णी कैसिया सामिया गुलमोहर पेल्टाफारम चिरोल अमलतास पीपल बरगद बांस आंवला सीताफल पीपल खमेर सिरस आदि पौधों का रोंपण किया जा सकेगा। परियोजना की मानक लागत सड़क किनारे 3 लाख 35 हजार सामुदायिक स्थल पर 5 लाख 35 हजार सार्वजनिक परिसर में 3 लाख 35 हजार एवं नहर किनारे 3 लाख रूपए निर्धारित की गई है। इसके तहत श्रम दिवस भी निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत जॉबकार्ड धारी को प्राथमिकता से पौध रक्षक बनाया जाएगा। मानक लागत की व्यय सीमा के भीतर कोई भी उपयुक्त सिंचाई व्यवस्था की जा सकेगी। प्रथम वर्ष में मानक लागत का भुगतान चार किश्तों में किया जाएगा।

लाभ के हिस्सेदार होंगे पौधरक्षक

इस योजना का अहम बिन्दु यह भी है कि पौधरक्षक परियोजना से प्राप्त होने वाले लाभ के हिस्सेदार होंगे। यानी पौधों से प्राप्त होने वाले फल जलाउ या ईमारती लकड़ी का 50 प्रतिशत रखने का अधिकार उन्हें होगा। शेष 50 प्रतिशत पर अधिकार ग्राम पंचायत का होगा। इसमें परियोजनाओं की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। पंचायतें अपने स्तर पर अधिकतम पौधरोंपण कर सकती है। इस संबंध में विकास आयुक्त राधेश्याम जुलानिया द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं।

अभियान बनाकर जुटें तो बदल सकते हैं सूरत

यह पर्यावरण में सुधार की अभिनव योजना है। इसे हम अभियान के रूप में प्रारंभ करें। प्रत्येक पंचायत इसमें जुटे लोगों को रोजगार भी दें और अधिक से अधिक फलदार पौधे भी रोंपें। यदि हमने इसमें सफलतापूर्वक कार्य कर लिया तो पांच वर्षों में पर्यावरण की सूरत बदल सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि प्रत्येक स्थान पर इसके तहत पौधरोपण किया जा सकता है। मेरा आग्रह है कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि और ग्राम पंचायत स्तर तक प्रत्येक ईच्छित व्यक्ति इस योजना से जुड़कर धरती को सुजला-सुफलां बनाने में सहयोग करे।


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