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GROUND ZERO : पढ़िए कश्मीर क्या बोला वॉइस ऑफ़ एमपी से, ग्राउंड ज़ीरो से ये ख़ास रिपोर्ट आपको बताएगी सच्ची तस्वीर कश्मीर की, कश्मीर से लौटकर अब्दुल हुसैन बुरहानी की कलम से

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GROUND ZERO : पढ़िए कश्मीर क्या बोला वॉइस ऑफ़ एमपी से, ग्राउंड ज़ीरो से ये ख़ास रिपोर्ट आपको बताएगी सच्ची तस्वीर कश्मीर की, कश्मीर से लौटकर अब्दुल हुसैन बुरहानी की कलम से

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कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हर भारतीय की ख्वाहिश होती है की एक बार ज़मीन की जन्नत कश्मीर को ज़रूर देखे बीते दिनों वॉइस ऑफ़ एमपी के जांबाज़ रिपोर्टर अब्दुल हुसैन बुरहानी आठ दिन की कश्मीर यात्रा पर गए थे वहा उन्होंने जम्मू कश्मीर में घूमते हुए वहा के हालातो का जायजा लिया ग्राउंड ज़ीरो से यह ख़ास रिपोर्ट आपके लिए कश्मीर क्या बोला PART 1 

कश्मीर के लोग काफी पढ़े लिखे समझदार एवं मदद के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले लोग हैं।इनमें दो किस्म के लोग हैं एक है पठान एवं दूसरे कश्मीरी।असल में यह लोग देशभक्त एवं भले लोग होते हैं जो वतन की सरजमी से बहुत प्यार करते हैं।इनमें केवल 10% लोग ही ऐसे हैं जो पड़ोसी देश पाक के बहकावे में आकर उनका एवं पाक समर्थित आतंकवादियों का समर्थन करते हैं। बाकी 90 परसेंट लोग बड़े ही कॉपरेटिव एवं देश भक्त लोग हैं ।

एक मछ्ली गंदा करती हैं तालाब
मगर कहते है ना एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है।उसी तर्ज पर उन 10% लोगों को की वजह से पूरे कश्मीरियों को शक की नजरों से देखा जाता है कि कहीं यह  भी तो जिहादी नहीं? लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है।

निर्दोष के मरने पर इन्हें भी उतना ही दर्द होता है
मेरी कश्मीर यात्रा के 8 दिन के दौरान कश्मीर के लगभग सभी प्रकार के लोगों से मुलाकात करने का उनसे बातचीत करने का एवं उन्हें करीब से जानने का मौका मिला तो पता चला कि जिस प्रकार मेरी एवं अन्य आम लोगों की मानसिकता एवं सोच ये बनी हुई है कि कश्मीरी जेहादी देशद्रोही अलगाववादी एवं आतंकवाद व पाकिस्तान समर्थक होते हैं। लेकिन जब आठ दिवसीय यात्रा के दौरान लोवर मध्यम व उच्च वर्गीय सभी प्रकार के जम्मू एवं कश्मीर लोगों से मुलाकात हुई।उनसे इस विषय में खुलकर बातचीत हुई एवं उनके विचार जाने पर लगा कि वह भी हमारी तरह देश भक्ति एवं आम इंसान हैं कोई आतंकी या पाक समर्थक नहीं है।जब दहशतगर्द आतंक फैलाते हैं एवं निर्दोष देशवासी मारे जाते हैं तो इसका दर्द उन्हें भी उतना ही होता है जितना कि हमे या एक आम हिंदुस्तानी को।

वह भी आम इंसान हैं
वहां भी अधिकांशतःहमारी तरह आम एवं सामान्य लोग हैं जो शांति की एवं पारिवारिक जिंदगी जीना चाहते हैं। लेकिन पाक दहशतगर्दअगर उनमें से कुछ युवाओं को बहला-फुसलाकर बरगलाकर उन्हें अपने साथ मिलाकर वहां हिंसा एवं पत्थरबाजी करने पर मजबूर कर देते हैं।इतने समय हमेशा वहां बाजार बंद रहने से वे भी काफी परेशान हैं।उनके भी हमारी तरह परिवार हैं व्यापार है व्यवसाई हैं रोजी-रोटी हैं।

एक कश्मीरी का दर्द उसी की जुबानी
एक कश्मीरी अकबर अली नामक व्यक्ति ने रुंधे गले से बताया कि पिछले वर्ष यहां बुरहान वानी नामक आतंकी को सेना द्वारा मार गिराया जाने के पश्चात पाक द्वारा यहाँ जो हिंसा फैलाई गई उसकी वजह से लगभग 8 माह तक पूरा कश्मीर का कारोबार बंद रहा यहां घाटी में विरानी एवं सुनसानी छाई रही।टूरिस्ट भी नहीं आए। 8 महीने तक हमने अपनी दुकानें एवं व्यवसाय नहीं खोला।उसने रोते हुए बताया कि साहब हमारा भी परिवार है फैमिली है हम दुकान नहीं खोलेगा बिजनेस नहीं करेगा तो अपने बच्चों एवं फैमिली को खिलाएगा कहां से ?

रोज़-रोज़ के आतंक से वह भी तंग आ चुके हैं
वह भी अब रोज रोज के आतंक से तंग आ चुके हैं वह भी वहां देश में अन्य प्रदेश के लोगों की तरह आम जीवन जीना चाहते हैं किंतु पड़ोसी नापाक देश एवं वहां के चंद दहशतगर्द उनके साथ ही हमारे ही अपने कुछ  राजनेता अपने फायदे के लिए ऐसा होने नहीं देते।


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