NEWS : तप आराधना से मानव की आत्मा कल्याण सम्भव - जिनवल्लभ विजय महाराज

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NEWS : तप आराधना से मानव की आत्मा कल्याण सम्भव - जिनवल्लभ विजय महाराज

नीमच :-

नीमच  । महावीर से लेकर जैन समाज के सभी तीर्थंकरों ने आत्म कल्याण के लिए तप किए है जिस तरह मृत्यु के लिए समय तय नहीं होता है उसी तरह तप आराधना के लिए भी मानव को किसी बुलावे का इंतजार नहीं करना चाहिए बार-बार जीवन मरण से मुक्ति पाता हे तो महावीर की तपस्या जिनवाणी का अनुसरण कर जीवन में आत्मसात करे यह बात मुनिराज जिनवल्लभ विजय महाराज ने कही वे आराधना भवन में गुरूवार सुबह आयोजित चार्तुमास धर्मसभा में बोल रहे थे उन्होंने कहाकि ज्ञानीजनों के बताए मार्ग पर चले तोे हम मोक्षगामी बन सकते है लोग अज्ञानी बनकर नाम के पिछे भाग रहे है जबकि बिना नाम का काम अधिक लम्बा चलता हे मनुश्य भौतिक संसाधनों का आदि हो चुका है वह नाम, दौलत, षौहरत के लिए वह किसी भी हद को पार कर जाता हे यही संसार में झगड़े का मूल कारण बन रहा है जीवन की नैया तपस्या साधना के सहारे ही पार होगी । महाराज श्री ने कहां कि रात्रि भोज त्याग का प्राचीनकाल में 90 प्रतिषत अनुपात था आज उल्टा हो गया है इसमें सुधार की आवष्यकता है ऋशि परम्परा में आज भी रात्रि भोज त्याग की तपस्या संस्कार आचार निरन्तर जारी है आज 4 वर्श की बच्चियां एवं 11 वर्श के बालक भी तप कर रहे है यह तपस्या आर्दष प्रेरणा है धर्म आराधना में सभी समाजबन्धु सामुहिक तप करे हम तप की निन्दा नहीं अनुमोदना करें । तपस्या में मानव कभी बीमार नहीं होता है सिद्धीतप वर्धमान तप का आराधना करनी चाहिए । तपस्या में कभी छुआछूत नहीं की गई । साधु साध्वी, श्रावक-श्राविका दोनों की दिनचर्या में प्रतिक्रमण प्रतिदिन आवष्यक है जो व्यकित स्वयं साधु-साध्वी जैसे अचार दिनचर्चा रखे ही साधु साध्वी की गलतिया बता सकते है । महाराज श्री ने रत्नाकर पच्चीसी के वर्तमान परिपेक्ष्य के महत्व को प्रतिपादित किया । परिग्रह के कारण जीवात्मा संसार में भटकता है 

साधु संत पहले स्वंय में सुधार करे फिर उपदेष देना चाहिए तभी वह सार्थक सिद्ध होगा । मंदिर में घडी देख नहीं जाना चाहिए मंदिर में जब भी भाव हो तभी जाना चाहिए । कर्म का फल अगले जन्म तक भी पीछा नहीं छोड़ता है जैसा कर्म होगा वैसा फल भी अवष्य मिलता है मानव संसार में सुख की खोज में भटकता है विवाह वह लकडी का लड्डु है जो खाए वह भी पछताएं जो नहीं खाएं पछताएं । विवाह संसार का चक्रव्यू है इसलिए समय रहते धर्म की राह में चलना चाहिए लोग विवाह कर भेड़ चाल चलते है हमें इस पर चिंतन करना चाहिए  श्रावक श्राविकाओं ने सामुहिक गुरूवंदना कर महाराज श्री से मंगल आर्षीवाद ग्रहण किया ट्रस्ट अध्यक्ष अनिल नागौरी, सचिव पारस लसोड़ ने धार्मिक कार्यक्रमों की कार्य योजना पर प्रकाष डाला । आत्म विजय महाराज साध्वी लावण्य रेखा श्रीजी की निश्रा भी मिली । धर्मसभा में श्रावक-श्राविकाओं ने एकासना आयमबिल की तपस्या के प्रत्याख्यान लिए जिनका संघ ने भावों से बहूमान किया । जिसकी सभी समाजजनों ने अनुमोदना की । 


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