NEWS: अब भगवान पशुपतिनाथ का भी आरओ से किया जाएगा जल अभिषेक, मंदिर समिति ने तैयार किया मसौदा

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NEWS: अब भगवान पशुपतिनाथ का भी आरओ से किया जाएगा जल अभिषेक, मंदिर समिति ने तैयार किया मसौदा

नीमच :-

मंदसौर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उज्जैन के बाबा महाकाल की मूर्ति के क्षरण को रोकने के लिए किए गई कवायद के बाद अब मंदसौर के भगवान पशुपतिनाथ की मूर्ति के क्षरण को रोकने की तैयारी हो गई है। इसकी पहल खुद पशुपतिनाथ प्रबंध समिति ने कर ली है।

समिति ने भगवान भोलेनाथ के अभिषेक में लगने वाली पूजन सामग्री की मात्रा कम करने की संभावना है। इसके अलावा आरओ के पानी से जल अभिषक करने का निर्णय लिया जा रहा है। इसके लिए मंदिर परिसर में आरओ सिस्टम लगाया जाएगा। अब अगले महीने 6 नवंबर को होने वाली प्रबंध समिति की बैठक में इस पर फाइनल निर्णय हो जाएगा।

प्राचीन काल की मूर्तियों में शुमार भगवान पशुपतिनाथ की मूर्ति के हो रहे क्षरण की चिंता मंदिर ​समिति ने खुद की थी। इसको लेकर पिछले दिनों ​मंदिर समिति की बैठक में कई प्रबुद्वजनों ने अपने सुझाव दिए थे।

बताया जा रहा हैं कि मंदिर समिति ने जनमानस की श्रद्वा को ध्यान में रखते हुए कई निर्णय लेने जा रही है, जिसमें श्रद्वालुओं को अभिषेक करने से नहीं रोका जाएगा, लेकिन अभिषेक के लगने वाले समय और जल की मात्रा को कम करने पर विचार किया जा रहा है।

इसके अलावा हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उज्जैन महाकाल मंदिर के लिए दिए निर्देशों का भी ध्यान रखा जाएगा। इसके तहत यहां भी अभिषेक के लिए आरओ के पानी की व्यवस्था की जाएगी। जल्द ही मंदिर समिति इसे लेकर एक रिपोर्ट एसडीएम को सौंपने जा रही है। हालांकि उज्जैन और मंदसौर के मंदिरों के हालात में अंतर है। बावजूद ऐहतियात के तौर पर यह निर्णय लिया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि भगवान पशुपतिनाथ के नीचे के चार मुख का वज्रलेप होगा, पर्व, त्योहार और विशेष दिनों में मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश पर राेक लगाई जाएगी। जलपात्र लगा कर अभिषेक करना होगा, इससे जल प्रतिमा के चरण वाले हिस्से में पहुंचेगा। आरओ के पानी से अभिषेक करना। प्रतिकृति के रूप में सहस्र शिवलिंग प्रतिमा पर अभिषेक का प्रबंध करना। जल की मात्रा और समय सीमित करने का निर्णय लिया जा सकता है।

कलेक्टर मंदसौर ओपी श्रीवास्तव के अनुसार मंदसौर का मामला उज्जैन से अलग है इसलिए हम उसकी बात नहीं कर सकते। रहा सवाल पानी की शुद्धता का तो उसके लिए हम मंदिर परिसर में आरओ सिस्टम लगवाएंगे। मूर्ति का क्षरण रोकने के लिए प्रतिमा को स्पर्श करना पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। 25 अक्टूबर को प्रबुद्धजन व मंदिर प्रबंध समिति की बैठक हुई थी। इसमें जलाभिषेक पूरी तरह बंद करने की बात का विरोध हुआ तथा व्रजलेप कर भगवान के जलाभिषेक में जल की मात्रा कम करने का प्रस्ताव रखा था। कुछ लोगों ने जलाभिषेक का समर्थन किया तो कुछ ने आरओ के पानी से अभिषेक करने की जाने की बात पर जोर दिया। सभी मुद्दों को देखते हुए मंदिर समिति ने मसौदा तैयार किया। हालांकि आरओ लगाने का निर्णय पानी की शुद्धता को लेकर किया है


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