NEWS: नारायण नाम स्मरण करने से मनुश्य जीवन से मुक्ति मिलती है - पं. पंकज कृश्णा उपाध्याय

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NEWS: नारायण नाम स्मरण करने से मनुश्य जीवन से मुक्ति मिलती है - पं. पंकज कृश्णा उपाध्याय

नीमच :-

नीमच। नारायण नाम स्मरण करने से मनुश्य जीवन से मुक्ति मिलती है संसार के त्याग बिना जीवन का कल्याण नही मोह का उत्पन्न होना आसक्ति है संसार का क्षय होना ही मोक्ष है आत्मा अमर है विनम्रता इंसान की पूजा करवा सकती है तो कड़वे बोल से मनुश्य की दुर्दषा हो सकती है जो व्यक्ति इस जीवन में जितना हो सकें, हमें दुखियों की सहायता करना चाहिए । मनुश्य जीवन बार-बार नहीं मिलेगा ।

ये विचार पं. पंकजकृश्ण उपाध्याय महाराज ने कही वे अम्बेड़कर कालोनी में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में बुधवार दोपहर को बोल रहे थे । उन्होंने कहा कि श्रीकृश्ण ने झुठी पत्तल उठाई और अपना भाग्य चमकाया लिया था अतिथि भाग्य से आते है उनकी सेवा ईष्वर सेवा समान है अतिथि भगवान होता है माता पिता की सेवा से बढ़कर कोई तीर्थ नहीं । पत्नी के लिए पती की सेवा ही परमेष्वर सेवा है पतिवृता स्त्री के आगे तो यमराज भी हारे है पति की सेवा से बढ़कर कोई तथा नहीं होता है नारी षक्ति झांसी की रानी, मीरा, सीता, अनुसूईया का चरित्र पढ़े और उसे जीवन में आत्मसात करें । ध्रुव ने तपस्या भक्ति कर भगवान की गोद को प्राप्त किया । संस्कार में मोह होता है यही दुख का कारण है केवल मानव जीवन से ही मोक्ष सम्भव है जड़ भरत मुर्ख बनकर रहे । पषु पक्षी षाकाहारी है जबकि मनुश्य मांसाहारी बन रहा है मदिरा से बुराई उत्पन होती है क्रोध पीना गम खाना चाहिए कन्या दान वस्तुदान महादान है तम्बाकू गुटखा कचरा है इसे कचरादान में ही डालना चाहिए । पाप का फल नरक, पुण्य का फल स्वर्ग में स्थान दिलाता है टीवी, मोबाईल पर अष्लील साम्रगी से युवा वर्ग पाष्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रहा है हिरणाकष्यप ने भक्त प्रहलाद को खूब प्रताड़ित किया लेकिन उसने भक्ति को नहीं छोड़ा ।

भागवत कथा के दौरान म्हारा नैना में राम समाई गयो रे......मीरा तो सांवलिया में समाई गई रे....ताहि अहीरकी छोरियां छछिया पर छाछ नाच नचाया हाथों में मेहन्दी रचा ले कन्हैया, अपनी ही दुल्हन बना ले कन्हैया.....नंद और यषोचा नाचे, थारो बहुत बड़ो उपकार....नटवर नागर नंदा भजोरे मन गोविन्दा आदि भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गये । भागवत कथा में महाराज श्री ने पृथ्वी, अजामिल, कयादु हिरणा कष्यप, चक्रवती सम्राट, भरत, पुनरंजन गौमाता, मनु महाराज राजा बलि आदि प्रसंगों का वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महत्व प्रतिपादित किया । कथा के मध्य भगवताचार्य कमलेष भया ने मीठे रस से भरीयोड़ी राधा रानी लागें......भजन प्रस्तुत किये । इस अवसर पर भगवताचार्य प्रमोद उपाध्याय मनासा वाले, प्रभुलाल सोंलकी, अषोक पंवार, प्रमोद कौषल, षांतिबाई सोंलकी, राधाबाई पंवार, षोभाबाई कौषल, कमलाबाई, सुमित्राबाई, मिश्रीलाल बघाना, अवतार पंवार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे ।  


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