NEWS: कृष्‍णा की माखन लीला मनोरंजन का साधन नहीं प्रेरणा का माध्यम- पं. पंकजकृष्‍णा उपाध्याय

Image not avalible

NEWS: कृष्‍णा की माखन लीला मनोरंजन का साधन नहीं प्रेरणा का माध्यम- पं. पंकजकृष्‍णा उपाध्याय

नीमच :-

नटखट पर नंदलाल की मनमोहन लीलाओं का सूनकर श्रद्धालुओं का मन श्री कृष्‍णा के चरणों  में रम रहा था यह दृष्य रहा अम्बेडकर कालोनी स्थित नारायणगिरी मंदिर प्रांगण में चल रही भागवत ज्ञान गंगा का जहां माखन मटकी फोड़ की बाल लीलाओं को सुनकर कृश्ण भक्त उत्साह के साथ भक्ति रस में खुब डूबे । गुरूवार पंचम दिवस को पं. पंकजकृश्ण उपाध्याय महाराज ने भगवान कृश्ण की माखन चोरी मटकी फोड की कथा सुनाने के साथ कृश्ण द्वारा गोपियों के आग्रह पर माखन चोरी का वृंतात सुनाया । उन्होंने कहां कि भागवत सदकर्म की प्रेरणा देती है धर्म की रक्षा बिना राश्ट्र का विकास नहीं यषोदा का अंहकार था तो कृश्ण नहीं बधे प्रेम से श्रीकृश्ण भक्तों के बधन में बंध जाते है जनप्रतिनिधि नदी में प्रदुशण होने से बचाने के लिए प्रयास करें । कर्मो का फल 100 जन्म बाद  भी मिलता है इसलिए मनुश्य को पुण कर्म करना चाहिए ऐसा कर्म करो जो सद्गुरू भगवान को अर्पण होता है भागवत का मूल्य नहीं करना चाहिए भागवत कथा अनमोल है 
महाराज श्री ने बताया कि भगवान श्रीकृश्ण ने जब यषोदा माॅं को माटी खाने के बहाने  मुख में ब्रमाण्ड का दर्षन कराया । उसके बाद यषोदा को अहसास हो गया कि उनका लल्ला कोई साधारण नहीं ये परम ब्रहम का अवतार है भगवान श्रीकृश्ण ने गोर्वधन को इन्द्र देवता के कोप से बचाया एवं इन्द्र के अंहकार को नश्ट किया । कथा में भगवान कृश्ण के रूप में बालक ने आर्कशक स्वांग का अभिनय प्रस्तुत किया । कथा के दौरान जैसे बालकृश्ण का प्रवेष हुआ तो मेरा दिल दिवाना हो गया वृन्दावन की गलियों में....जय जय राधे राधे ष्याम जय जय वृन्दावनधाम............ श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट बिराज रहियो....ऐसे कोई धार्मिक भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालुओं ने दर्षनकर उनका पूजन किया और पुरी श्रद्धा के साथ खुब नृत्य किया । भक्ति भागवत पांडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा नजर आया उन्होंने सुकदेवमुनि, मधुमंगल, ग्वालपाल, श्रीधामा, कंसवध, वृन्दावन, मथुरा, ग्वालपाल लीला, गाये, यमुना, सांप, पाप, ब्रहमा, कार्तिक, गोपश्टमी पर्व, गोकुल, दाऊ बलराम, यषोदा, चंदा मामा, अगस्त ऋशी, धेनुकासुर, अकासूर, बगासूर, इन्द्रदेव, गिरीराज पर्वत, मानसी गंगा, मटकी फोड़, माखन रास लीला, भलाई, घुंघट, लाज षर्म, आदि धार्मिक प्रंसगों का वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महत्व प्रतिपादित किया । भागवत कथा आरती पौथी पूजन में प्रभुलाल सोंलकी, अषोक पंवार, प्रमोद कौषल, षांतिबाई सोंलकी, राधाबाई पंवार, षोभाबाई कौषल, कमलाबाई, सुमित्राबाई, मिश्रीलाल बघाना, अवतार पंवार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे ।  

भागवत में आज कृश्ण-रूकमणी विवाह -
कथा में भगवताचार्य महाराज श्री द्वारा आज 08 दिसम्बर षुक्रवार को महारास एवं श्रीकृश्ण-रूकमणी विवाह प्रंसग का श्रद्धालुओं को वर्णन सुनाया जायेंगा । साथ ही मनमोहक झांकी के माध्यम से भी कृश्ण-रूकमणी प्रंसग की प्रस्तुती होगी कथा प्रतिदिन दोपहर 11 से सांय 3 बजे तक प्रवाहित हो रही है । 

कृश्ण जन्म पर झुमे श्रद्धालु - 
भागवत के मध्य जब पण्डित उपाध्याय ने श्रीराम एवं श्रीकृश्ण जन्म का प्रसंग बताया तो आलकी की पालकी जय कन्हैयालाल हाथी घोड़ा पालकी जय जय श्रीकृश्ण की स्वर लहरिया पांडाल में बिखरने लगी श्रीकृश्ण सवा माह का बालक

नंदबाबा, कृश्ण की बुआजी 
राधिका, कृश्ण ने प्रभावी अभिनय प्रस्तुत किया । मटकी कान्हा ने फोड़ी घर का सारा लड़वा लागीया.....भजन पर बाल ग्वाल ने मटकी फोड़ पर कृश्ण रासलीला की झांकी प्रस्तुत की । 


SHARE ON:-

image not found image not found

© Copyright VOICEOFMP 2017. Design and Developed By Pioneer Technoplayers Pvt Ltd.