PRESS RELEASE: तपस्या भक्ति में सुख की प्राप्ति- साध्वी देवेन्द्र श्रीजी म.सा.

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PRESS RELEASE: तपस्या भक्ति में सुख की प्राप्ति- साध्वी देवेन्द्र श्रीजी म.सा.

नीमच :-

नीमच। आज के तनावपूर्ण जीवन में सुख की एक किरण प्राप्त करने का साधन केवल तपस्या भक्ति ईष्वरीय प्रार्थना में ही है प्रार्थना के पहले ईष्वरीय तप स्वरूप की यर्थाय जानकारी होना अति आवष्यक है तपस्या मुक्ति का एक केन्द्र बिन्दु है यह सर्व गुणों में सिंधु है तपस्या सुख का सागर है षांति का सागर है इसलिए जब हम अपने को एक षरीर न समझ कर आत्मा समझ उस सर्वषक्तिमान परमात्मा को स्मरण करते है तो हम अपने को इस दुनिया से न्यारा और प्यारा अनुभव करते है और इस तनावपूर्ण जीवन से हमें सुख, षान्ति का अनुभव होता है जीवन में हर समस्या का समाधान तपस्या भक्ति ही हमें जीवन जीने की कला सिखाती है यह बात उभयजन्मदात्री गुरूमाता राजेन्द्रश्री जी म.सा. की बालषिश्या महामनीशी साध्वी देवेन्द्र श्रीजी म.सा. ने कही वे श्री धर्मरत्न पाष्र्वनाथ जैन ष्वेताम्बर द्वारा धर्मरत्न जमुनिया द्वारा श्री पाष्र्वनाथ प्रभु के जन्म दीक्षा कल्याणक के पावन प्रसंग पर अटृम तप तेला के उपलक्ष्य में गुरूवार 14 दिसम्बर को सुबह आयोजित धर्मसभा में बोल रही थी उन्होंने कहां कि आत्मा का वास्तविक धर्म षांति है तपस्या षांति, सुख, प्रेम, पवित्रता, ज्ञान षक्ति, आन्नद ही आत्मा का गुण है । तप उपवास आनंद देने वाला होता है और प्रभु भक्ति के दौरान असंख्य प्राणियों और जीवों का कल्याण होता है और दुखी प्राणियों के कश्ट दुर होते है  तपस्वियों का बहुमान एवं अनुमोदना करने का भाव होना चाहिये इससे जन्मों जन्मों के पाप पुण्य में बदल जाते है एकाग्रचित्त होकर तप उपवास में भाग लेने से मन षांत होता है और जीवन में सुख समृधि की सफलता मिलती है तपस्या भक्ति इंसान को संस्कारवान होना आवष्यक है तपस्या से जीवन का कल्याण होता है तपस्या में किया गया पुण्य परमार्थ कभी खाली नहीं जाता है इसका फल कश्टों को दुर करता है और परिवार में सुख समृधि लाता है इस अवसर पर साध्वी षासन ज्योति म.सा. का सानिध्य भी मिला । कार्यक्रम की श्रृखंला में गुरूवार 14 दिसम्बर गुरूवार सुबह 8.35 बजे तपस्वियों का बहुमान एवं पारणा आयोजित किया गया जिसके लाभार्थी श्रीमती सुखी बेन मुठलिया बेड़ा राज. एवं पारणा के लाभार्थी सुश्रावक नीमच थे । श्रद्धालुआंे ने अपार उत्साह के साथ सहभागिता निभाई ।  इस अवसर पर महापूजन में हो पाष्र्वनथ तुम्हारे चरणों में हम सब का वन्दन मंत्र नवकार सुना उसको देव बनाया ओम रिमसिम कुरू कुरू विजयामकुरू कुरू षांति कुरू कुरू आदि नमः स्वाह के साथ प्रभु दर्षन कराएं गए । मंदिर को आर्कशक रंगबिरंगे मोती, माला, षंख घंटी फूलो से श्रृगांरित किया गया । कर्मरत्न पाष्र्वनाथ प्रतिमा की आर्कशक फुलों से अंग रचना की गई । श्रीफल, सुखे मेवे नैवेध स्वास्तिक अक्षत गुलाब, फूल, जल आदि अभिशेक पूजन किया गया । श्राविकाएं पीताम्बरी केसरिया परिधानों में सहभागी बनी । ओरामरिम पदमावती मंत्र के साथ आहूतिया दी गई । आरती के साथ सम्पन्न हुई । अनुश्ठान में रमेषचन्द्र चैधरी, सुनिल कुमार पटवा, अजीत कुमार धीग, बाबुलाल खिन्दावत, कमलेष खिन्दावत, महेन्द्र चैधरी, जिनेन्द्र डोसी, मंजूला डोसी, देषना पटवा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे । महोत्सव में पक्षाल, अंग रचना, चन्दन पुश्प, धूप, दीपक, मोरपिछी, वर्शीदान, अश्टप्रकारी पूजा आदि की धार्मिक बोलियों के चढ़ावे में समाजजनों ने उत्साह के साथ भाग लिया । 

भजनों की भक्ति में डुबे श्रद्धालु -
पाष्र्व महिला मण्डल की महिलाओं ने महापूजन में दिवाना पाष्र्वनाथ का......, सुख में प्रभुवर तेरी याद नहीं आई दुख में प्रीत लगाई रे......, चरणों में जगह दे दो थोड़ी बस जीवन संग रहने के लिये....आदि भंजनों की स्वर लहरियों के साथ अभिशेक महापूजन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । 

अटृत तेला के तपस्वियों का किया सम्मान -
धर्मसभा में साध्वी वृन्द के सानिध्य में श्री धर्मरत्न पाष्र्वनाथ जैन ष्वेताम्बर द्वारा धर्मरत्न जमुनिया के श्रीसंघ पदाधिकारियों द्वारा महोत्सव में 71 अटृत तेला तप करने वाले तपस्वियों एवं श्रीमती सुखी बेन मुठलिया बेड़ा राज, पारणा के लाभार्थी सुश्रावक नीमच परिवार के सदस्यों आदि का धर्म लाभार्थीयों का षाल श्रीफल, मोतीमाला, तिलक से सम्मान किया गया ।  


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