NEWS: गोवंश की रक्षा बिना राष्‍ट्र का कल्याण नहीं - नरेन्द्र शास्त्री

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NEWS: गोवंश की रक्षा बिना राष्‍ट्र का कल्याण नहीं - नरेन्द्र शास्त्री

नीमच :-

नीमच। नटखट पर नंदलाल की मनमोहन लीलाओं का सूनकर श्रद्धालुओं का मन श्री कृश्ण के चरणों  में रम रहा था यह दृष्य रहा स्कीम नं. 36ए,बी में चल रही भागवत ज्ञान गंगा का जहां माखन मटकी फोड़ की बाल लीलाओं को सुनकर कृश्ण भक्त उत्साह के साथ भक्ति रस में खुब डूबे । सिद्धेष्वर महादेव समिति द्वारा आयोजित भागवात कथा में षुक्रवार को पं. नरेन्द्र षास्त्री महाराज ने भगवान कृश्ण की माखन चोरी मटकी फोड की कथा सुनाने के साथ कृश्ण द्वारा गोपियों के आग्रह पर माखन चोरी का वृंतात सुनाया । उन्होंने कहां कि गोवंष की रक्षा बिना राश्ट्र का विकास नहीं यषोदा का अंहकार था तो कृश्ण नहीं बधे प्रेम से श्रीकृश्ण भक्तों के बधन में बंध जाते है ऐसा पुण्य कर्म करो जो सद्गुरू भगवान को अर्पण होता है भागवत का मूल्य नहीं करना चाहिए भागवत कथा अनमोल है अच्छे पुण्य कर्मो का फल से श्रीमद भागवत श्रवण का अवसर मिलता है मनुश्य जन्म अनमोल है वृन्दा भक्ति में प्रवेष की श्रेश्ट आयु 5 वर्श होती है पाप पुण्य से करता है साॅंप के काटने से बच सकते हे पाप के काटने से नहीं बच सकता है, भक्तों की रक्षा भगवान करते हे गाय की दुदर्षा चिंतन का विशय है । गाय विष्व की माता है इसे कभी पषु नहीं कहना चाहिए । कृश्ण गोकुल में रहे तब तक षस्त्र नहीं उठाया, मिले हुवे कपड़े नहीं पहने थे ओर गाय का आदर बढ़ाया है आज गाय की कौन सेवा कर रहा है गाय की रक्षा नहीं होना चिंतन का विशय है भगवान कृश्ण के घर गायों की कोई कमी नहीं थी और न ही माखन की कोई कमी इसके बावजूद गोपियों के अटूट प्रेम के चलते भगवान कृश्ण माखन चोर कहलाए । महाराज श्री ने बताया कि भगवान श्रीकृश्ण ने जब यषोदा माॅं को माटी खाने के बहाने  मुख में ब्रमाण्ड का दर्षन कराया । उसके बाद यषोदा को अहसास हो गया कि उनका लल्ला कोई साधारण नहीं ये परम ब्रहम का अवतार है भगवान श्रीकृश्ण ने गोर्वधन को इन्द्र देवता के कोप से बचाया एवं इन्द्र के अंहकार को नश्ट किया । कथा में भगवान कृश्ण के रूप में बालिका ने आर्कशक स्वांग का अभिनय प्रस्तुत किया । कथा के दौरान जैसे बालकृश्ण का प्रवेष हुआ तो मेरा दिल दिवाना हो गया वृन्दावन की गलियों में....जय जय राधे राधे ष्याम जय जय वृन्दावनधाम............ श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट बिराज रहियो....ऐसे कोई धार्मिक भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालुओं ने दर्षनकर उनका पूजन किया और पुरी श्रद्धा के साथ खुब नृत्य किया । भागवत कथा आरती पौथी पूजन में मंदिर प्रमुख ललित राठी, जगदीष थोरेचा, सुधीरसिंह, अषोक चैहान, पंकज श्रीवास्तव, केषरसिंह राठौर, नाथुसिंह राणावत, ओम वर्मा, राजेन्द्र पुरोहित, सुनीता प्रेमलता राठी, पोरवाल, सरिता पोरवाल, प्रेमप्रकाष पाण्डे, ओम यादव, घनष्याम राठी जावद, ब्रजेष पाण्डे, मंगल जोषी सहित बड़ी संख्या में आदि गणमान्य ने लिया भागवत कथा आरती के बाद प्रसादी के रूप में श्रद्धालुओं को वितरित किया गया । लोग धार्मिक सत्संग के नियमों को भूल रहे है  । उन्होंने सुकदेवमुनि, मधुमंगल, ग्वालपाल, श्रीधामा, कंसवध, वृन्दावन, मथुरा, ग्वालपाल लीला, गाये, यमुना, सांप, पाप, ब्रहमा, कार्तिक, गोपश्टमी पर्व, गोकुल, दाऊ बलराम, यषोदा, चंदा मामा, अगस्त ऋशी, धेनुकासुर, अकासूर, बगासूर, इन्द्रदेव, गिरीराज पर्वत, मानसी गंगा, मटकी फोड़, माखन रास लीला, भलाई, घुंघट, लाज षर्म, आदि धार्मिक प्रंसगों का वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महत्व प्रतिपादित किया । महाराज श्री ने जियो ष्याम लाला पीली तेरी पगडी रंग काला...यषुमति मय्या से बोले नंदलाला राधा क्यु गौरी में क्यु काला, लाडला कन्हैया काली कमली वाला....हे बांके बिहारी रहे ध्यान तुम्हारे चरणों...., आदि भजनों पर श्रद्धालु झुम उठे । 

गिरिराज पर्वत पूजा उत्सव मनाया -
भागवत कथा में जब पं. नरेन्द्र षास्त्री ने गिरिराज पर्वत इन्द्रदेव पूजा उत्सव का प्रसंग बताया ओर बरस बरस म्हारा इन्दर राजा भजन प्रस्तुत किया तो श्रद्धालु भाव विहल हो गए महिलाओं ने भक्ति में नृत्य किया । ,

भागवत में आज कृश्ण-रूकमणी विवाह -
कथा में आज 13 जनवरी षनिवार को महारास एवं श्रीकृश्ण-रूकमणी विवाह प्रंसग का श्रद्धालुओं को वर्णन सुनाया जायेंगा  साथ ही मनमोहक झांकी के माध्यम से भी कृश्ण-रूकमणी प्रंसग की प्रस्तुती होगी ।

 


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