BIG NEWS: नीमच में हुआ बडा जमीन घोटाला, उपर तक पहुंची शिकायत, राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के संभाग उपाध्यक्ष ने की कलेक्टर और कमिश्नर से शिकायत, पढें खबर

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BIG NEWS: नीमच में हुआ बडा जमीन घोटाला, उपर तक पहुंची शिकायत, राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के संभाग उपाध्यक्ष ने की कलेक्टर और कमिश्नर से शिकायत, पढें खबर

नीमच :-

नीमच जिले के अरनिया कुमार ग्राम में हाल ही में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया उक्त घोटाले में प्रशासन द्वारा जांच भी बैठाई गई और जांच में कुछ बिंदुओं पर जांच करते हुए पूर्व पटवारी को निलंबित कर दिया, परंतु जांच में भी कहीं ना कहीं जमीन घोटाले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है ।

यह आरोप राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के संभाग उपाध्यक्ष एडवोकेट अमित कुमार शर्मा ने कलेक्टर जिला नीमच एवं कमिश्नर उज्जैन संभाग उज्जैन को की गई शिकायत में लगाएं हैं और उन्होंने मांग की है कि ग्राम अरनिया कुमार जिला नीमच में शासकीय भूमि पुराना सर्वे नंबर 248/3 एवं 249 रकबा 0.75 हेक्टर एवं 0.627 हेक्टर भूमि को आपराधिक षड्यंत्र रच दस्तावेजों में हेरफेर कर शासन के साथ धोखाधड़ी करते हुए ग्राम के पूर्व पटवारी सुनील अग्रवाल द्वारा उक्त भूमि को भील के नाम चढ़ाकर बिना प्रशासन की अनुमति के अपने रिश्तेदार को विक्रय करने पर पूर्व पटवारी एवं उक्त भूमि का क्रय विक्रय करने वालों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्यवाही करने की जावे ।

एडवोकेट अमित शर्मा द्वारा उक्त मामले में दिनांक 12.02. 2018 को एक पत्र कमिश्नर महोदय उज्जैन संभाग एवं जिला कलेक्टर नीमच को लिखा गया है एवं उक्त पत्र में एडवोकेट शर्मा द्वारा यह आरोप लगाए गए हैं कि जमीन घोटाले में की गई शिकायत पर की जाने वाली जांच में प्रकरण क्रमांक 25/अ-6-अ/2006-2007 में 2 त्रुटियां बताई गई है । परंतु उक्त जांच में शासकीय भूमि के भील के नाम चढ़ा अपने रिश्तेदार को बेच देने वाले मामले को पूर्ण रुप से दबा दिया गया है ! ऐसे में कहीं ना कहीं मामले की जांच भी पर भी सवाल उठते हैं ! जिस प्रकार से मुख्य रूप से प्रकरण में दो त्रुटियां बताई गई और शासकीय भूमि के मामले को नजरअंदाज कर दिया गया यह एक गंभीर मामला है ।

शर्मा ने अपनी शिकायत में यह बताया कि 05-09-2017 को कार्यालय कलेक्टर भू अभिलेख जिला नीमच कार्यालय अधीक्षक श्री हुकुम सिंह निगवाल द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में बताया गया कि प्रकरण क्रमांक प्रकरण क्रमांक 25/अ-6-अ/2006-2007 में आदेश दिनांक 29 सितंबर 2007 पुनर्विलोकन किया जाना योग्य है । प्रकरण में बंदोबस्त के दौरान त्रुटि होना बताया गया है । बंदोबस्त की त्रुटि सुधार हेतु नक्शे में मातृ भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 107 के अधिकार कलेक्टर को प्रदत्त हैं । भूमि सर्वे नंबर 203 रकबा 0.627 का निर्धारण भू राजस्व संहिता की धारा 1959 की धारा 7 के नियम अनुसार निर्धारण का अधिकार कलेक्टर को प्रदत्त है ।

इस संबंध में उक्त प्रकरण में कोई आदेश पारित नहीं हुआ है तथा प्रकरण में सर्वे नंबर 203 मध्यप्रदेश शासन की भूमि है । इस प्रकरण में नकल संलग्न नहीं है । एवं मौजा पटवारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बंदोबस्त के पूर्व एवं बंदोबस्त के बाद की स्पष्ट स्थिति सर्वे नंबर नहीं बताई गई नहीं नक्शे में अंकित की गई जांच में साफ तौर पर यह स्पष्ट किया गया कि शासकीय भूमि लगभग  साडे तीन बीघा एक फर्जी प्रकरण तैयार कर नारू पिता को भूमि स्वामी स्वत्व बनाकर शासकीय भूमि को नारू के नाम दर्ज कर दिया गया ।

उसके बाद दिनांक 6.11.2007 को रजिस्टर्ड विक्रय पत्र नंबर 1975 व 1976 से क्रेता श्रीमती मायावती माधवदास मूलचंदानी हिंदी मितूल पिता घिसालाल मित्तल जाति अग्रवाल निवासी फतेह चौक बघाना को विक्रय कर दी गई । पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी बात यह है कि दिनांक 29 सितंबर 2007 को आदेश को आधार बना शासकीय भूमि भील के नाम चढ़ा दी गई उसके 2 माह के अंदर अंदर ही उक्त भूमि को रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के माध्यम से तत्कालीन पटवारी सुनील अग्रवाल के रिश्तेदार भाई मितूल पिता घीसालाल मित्तल जाति अग्रवाल निवासी बघाना एवं माया पति माधवदास मूलचंदानी को विक्रय कर दी गई । नियम अनुसार यदि कोई शासकीय भूमि किसी भील समाज के व्यक्ति को आवंटित की जाती है तो उसमें उसके विक्रय के लिए शासन से अनुमति लेना आवश्यक है । ऐसे में जिस प्रकरण को आधार माना गया और उसके निराकरण के 2 माह के अंदर ही उक्त भूमि को अपने रिश्तेदार को बिकवा दिया गया वह प्रकरण पूरी तरह से फर्जी रूप से बिना अधिकार के तैयार किया गया और उसके आधार पर ही पूरे गांव की जमीनों के दस्तावेजों में हेरफेर कर शासन को नियोजित षड्यंत्र के तहत नुकसान पहुंचाया । यह मामला अत्यंत गंभीर प्रवृत्ति का है ।

शिकायत में आरोप लगाया कि तत्कालीन पटवारी द्वारा दस्तावेजों में हेरफेर का आपराधिक षड्यंत्र रच शासन के साथ धोखाधड़ी करते हुए शासकीय भूमि को पहले भील के नाम चढ़ाया और फिर उसी भील के साथ मिलीभगत कर उक्त भूमि को अपने भाई को बिकवा दिया ऐसे में यह आरोप काफी गंभीर है और प्रशासन को इसकी गंभीरता पूर्वक जांच करनी चाहिए ताकि सारी सच्चाई सामने आ सके ।

- जिस प्रकार से तत्कालीन पटवारी द्वारा दस्तावेजों में हेरफेर कर और आपराधिक षड्यंत्र रचने हुए शासकीय भूमि को भील के नाम चढ़ा अपने रिश्तेदार को बिकवा दिया गया और पूरे मामले को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए फर्जी प्रकरण तैयार किया गया यह मामला काफी गंभीर है ऐसे में प्रशासन को इस पूरे मामले की जांच गंभीरता पूर्वक करनी चाहिए और शासकीय भूमि को खरीदने एवं बेचने वालों के विरुद्ध भी प्रकरण दर्ज करना चाहिए यदि जल्द ही प्रशासन उचित कार्यवाही नहीं करता है तो इस पूरे मामले के खिलाफ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका प्रस्तुत की जाएगी और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्यवाही की मांग की जाएगी । अमित कुमार शर्मा( एडवोकेट) संभाग उपाध्यक्ष -राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति, मध्य प्रदेश


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