WOW: छा गये गोपाल धाकड़, अफीम फसल को रोजड़ों से बचाने के लिए बनाया सायरन, एमपी राजस्‍थान के अफीम तस्‍कर आतें है खरीदने, पढें खबर

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WOW: छा गये गोपाल धाकड़, अफीम फसल को रोजड़ों से बचाने के लिए बनाया सायरन, एमपी राजस्‍थान के अफीम तस्‍कर आतें है खरीदने, पढें खबर

निंबाहेड़ा :-

 फसल की रखवाली के लिए रूपपुरा गांव के गोपाल धाकड़ ने जुगाड़ साइरन बनाया है। 9 वीं कक्षा तक पढ़े गोपाल ने साइरन विशेषकर अफीम फसल की सुरक्षा के लिए बनाया है। गोपाल के बनाए जुगाड़ साइरन नीमच, चित्तौड़गढ़, शाहपुरा तक के किसान लेकर जाते हैं।

रूपपुरा गांव निवासी गोपाल धाकड़ पुत्र नारायणलाल धाकड़ बेगूं में बिजली के उपकरणों की दुकानदार चलाता है। दो साल पहले गोपाल को यह आइडिया आया। गोपाल ने सोचा क्यों न ऐसा साइरन बना दिया जाए जो रातभर बजता रहे। जिससे रोजड़े भी भाग जाएं और किसान की रात की नींद खराब न हो। गोपाल ने अपनी दुकान से तरह-तरह के सामान जुटाए और जुगाड़ साइरन बना डाला।

गोपाल ने इंजीनियरिंग के छात्र अपने बेटे महेश धाकड़ से भी तकनीकी राय ली। बेगूं क्षेत्र के अधिकांश अफीम खेतों में अब यह जुगाड साइरन लगे हैं। जो रातभर चार प्रकार की आवाज निकालते हैं। जुगाड साइरन भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, शाहपुरा, मध्यप्रदेश के नीमच जिले के कई किसान खरीद ले जाते हैं। 

6 वॉल्ट की बैट्री से 12 घंटे बजता है साइरन...

गोपाल ने बताया कि जुगाड़ साइरन में 10 ट्रांजिस्टर पीसीपी, 6 वाॅल्ट की बैट्री, 9 वाॅल्ट का ट्रांसफार्मर एक प्लास्टिक के डिब्बे में लगाए जाते हैं। डिब्बे के बाहर चारों दिशाओं में 12 वॉल्ट के चार साइरन लगाकर जुगाड़ तैयार किया जाता है। 700-800 रुपए के उपकरणों से यह बनता है। एक बैट्री से यह जुगाड़ पूरी रात यानि 12 घंटे तक बजता रहता है। 


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