WOW: पढें मुस्‍तफा हुसैन की कलम से, कनावटी जेल मेँ उसने कहा

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WOW: पढें मुस्‍तफा हुसैन की कलम से, कनावटी जेल मेँ उसने कहा

नीमच :-

पुरानी बात है एक बार में कनावटी जेल गया जेलर साहब से बाईट लेना थी अपना काम करने के बाद जेलर साहब बोले मैने जेल में नया निर्माण करवाया है आप देखिये मैने काफी मना किया लेकिन वो माने नहीं और मुझे जेल के अंदर लेते गए शाम को आरती का समय था तमाम कैदी बैरकों के बाहर थे में जैसे ही अंदर पहुंचा मुझे देखकर बहुत सारे कैदी मिलने आ गए जिसे देखकर जेलर साहब को थोड़ा अचम्बा हुआ "बोले अपराधियों में आपका बड़ा जनाधार है" मैने कहा ये अपराधी नहीं बेकसूर किसान है, मज़लूम है, मासूम है और फिर विचाराधीन है सज़ायाफ्ता नहीं इसलिए इन्हे कैसे अपराधी कहा जाए उस दिन के बाद वह बात आई गयी हो गयी

लेकिन अब मुझे वह बात फिर याद आयी जब मंदसौर एसपी मनोज कुमार सिंह साहब ने कहा डोडा चूरा में मॉर्फिन पर्सेंटेज 0.02 परसेंट है जो एनडीपीएस एक्ट में नहीं आता संवैधानिक पद पर बैठे आईपीएस अफसर के इस बयान के बाद जेले खाली कर दी जाना चाहिए और जिन बेकसूर किसानो को बेरहमी से दस दस साल के लिए जेलों में ठूंसा गया है उन्हें आज़ाद कर देना चाहिए

आईपीएस मनोज कुमार सिंह साहब ने जो कहा वो बात नयी नहीं है हाल ही में नीमच कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह साहब के निर्देश पर नीमच की अफीम फैक्ट्री में धोला पाली की जांच करवाई गयी थी जिसमे भी मॉर्फिन का पर्सेंटेज 0.02 परसेंट से कम आया वो भी एनडीपीएस की श्रेणी में नहीं आता फिर भी पोस्तादाना कारोबारी हरियाणा की कुंडली जेल में बंद है नीमच सहित समूचे मालवा मेँ व्यापारी डर डर कर पोस्तादाना छान रहे है

सवाल यह उठता है की आखिर क़ानून की इतनी बड़ी विसंगति के चलते देश में लाखो किसान एनडीपीएस एक्ट की भेंट चढ़ रहे है क़ानून की पेचीदगियों ने इस उत्पादन को बेईमानी से धन उगाने का बड़ा ज़रिया बना दिया है पोस्तादाना, डोडा चूरा और अफीम के नाम पर सरकारी एजेंसिया सालो से चांदी काट रही है जो लोग बेकसूर पकड़े जाते है कोर्ट कचहरी के चककर में उनका सबकुछ बिक जाता है वो तो बर्बाद होते ही है उनकी पूरी पीढ़ी बर्बाद हो जाती है क्योकि घर का मुखिया जेल चला जाएगा तो परिवार कौन पालेगा

आईपीएस मनोज कुमार सिंह साहब के साहस की मै सरहाना करता हु लेकिन बात यही ख़त्म नहीं होती जेल के नाम से आम आदमी की रूह काँप जाती है तो आप सोचिये सालो से लाखो लोग जेल की सींखचों में जीवन गुज़ार रहे है उनको एक एक पल एक एक साल से बड़ा लगता होगा जिन्होंने ये पाप किया उसका हिसाब तो कुदरत लेगी लेकिन अब इस क़ानून पर बात होनी चाहिए

मेरे ख्याल में एक बात आयी शराब हो या गुटखा ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है लेकिन ये खुले में बिकते है इनके खुले में बिकने से ऐसा तो नहीं की हर कोई शराब पीने लग गया हो जिसे पीना होती है वो पीता है भले दूकान के पास में ही रहने वाला क्यों न हो जिसे नहीं पीना उसे कौन पिला सकता है अब देखिये गुजरात में शराब बंदी है वहा सालाना 25 हज़ार करोड़ का काला कारोबार शराब का होता है जबकि एमपी में शराब खुले मै मिलती है तो कुल 6 हज़ार करोड़ की शराब सालाना बिकती है यदि डोडा चूरा, धोला पाली और अफीम पर से एनडीपीएस एक्ट हट गया तो क्या होगा क्या हर आदमी यह खाने लगेगा यदि ऐसा होता तो सालो से अफीम की खेती कर रहे परिवार अब तक अफीमची हो चुके होते क्योकि मालवा मेवाड़ मै एक लाख अफीम की खेती से जुड़े परिवार है

मेरा मत है एनडीपीएस क़ानून लगना चाहिए तब जब इस उत्पादन में किसी प्रकार की मिलावट के बाद यदि कोई इसका बाई प्रोडक्ट बनाता है जैसे ब्राउन शुगर, हेरोईन आदि तो उसे सीधे फांसी दे दी जाना चाहिए

लेकिन क़ानून की पेचीदगियों के कारण बेक़सूर किसान जेल में ठूंस दिए जाए ये सरासर अन्याय है क़ानून की इसी पेचीदगी के चलते अफीम, डोडा चूरा के धंधे में बेहिसाब काला धन पैदा हो रहा है क्योकि कड़े क़ानून ने इस धंधे में रिस्क बड़ा दी जिससे ये कीमती हो गया मेरा अंदाज़ा है जिसदिन डोडा चूरा एनडीपीएस के बाहर हो गया उस दिन लोग रोड़ी बनाकर इसे फेंकेंगे तो कोई ले जाने वाला नहीं मिलेगा क्योकि उस दिन इस धंधे में रिस्क नहीं होगी क़ानून लोगो को सुधारने का हो नाकि बिगाड़ने और बर्बाद करने का न ही एजंसियों के लिए धन उगाही का नामालूम कितने ऐसे अफसर आम लोगो की जानकारी में है जो इस क़ानून के कारण करोड़पति हो गए और बेकसूर अन्नदाता तस्कर हो गया किसान के माथे पर लगा तस्कर का काला दाग मिटना चाहिए और मालवा मेवाड़ के किसानो की आवाज़ सरकार के नक्कार खाने में गूंजना चाहिए

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