खबरे NEWS ROUND: पढियें जिले की हर एक छोटी खबर सिर्फ 5 मिनट में APRADH: जेवर-नगदी चोरी करने वाले दो आरोपियों को 20-20 माह का सश्रम कारावास व जुर्माना, पढें खबर OMG ! एमपी में सरकार जाते ही नीमच में भाजपा नेताओ का फोर जीरो पर पहला धरना, मौजूद रहेगें तीनो विधायक बापू, सखलेचा और मारू, पढें खबर DON T MISS: 5 मिनट में पढ़िए ये खबरें, PRO की खबरों से रहिए अपडेट APRADH: बरखेडा और भाटखेडा के समीप हादसा, तीन लोग गंभीर घायल, जिला अस्‍पताल रैफर, पढें बद्रीलाल गुर्जर की खबर REPORT : मुख्‍यमंत्री कन्‍या विवाह योजना के अंतर्गत मिलने वाली अनुदान राशि को भी बढ़ाकर 51000 रुपये कर दिया, शपथग्रहण के बाद बोले कमलनाथ, 'किसानों का कर्ज माफ करने में सरकारी बैंकों को पेटदर्द क्यों' REPORT : एमपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हो सकते हैं शिवराज सिंह चौहान, जिस दिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था उस दिन उन्होंने कहा भी था कि उम्मीद है कि नई सरकार विकास की योजनाओं को जारी रखेगी BIG NEWS: ऑपरेशन शिकंजा, 3 क्विंटल 92 किलो 500 ग्राम डोडाचूरा बरामद, ट्रक एवं स्वीफ्ट डिजायर कार सहित 05 तस्कर गिरफ्तार, 02 नामजद, पढें खबर NEWS: सावधान नीमच, आपके खिलाफ भी हो सकती है ये कार्रवाही, अगर आपने की ये गलती तो, पढें खबर REPORT : कमलनाथ के शपथ ग्रहण में दिखी 2019 के महागठबंधन की झलक, 10 दलों के नेता एकसाथ, पढ़े ये खबर

HEALTH: नहीं पीते मलाई वाला दूध, तो हो जाएगी ये लाइलाज बीमारी

Image not avalible

HEALTH: नहीं पीते मलाई वाला दूध, तो हो जाएगी ये लाइलाज बीमारी

डेस्‍क :-

नई दिल्ली। वजन कम करने के लिए डायटिंग को फैशन की तरह अपनाने वाली पीढ़ी सावधान! बिना मलाई वाला दूध पीने से पार्किंसन की लाइलाज बीमारी होने की आशंका 39 फीसदी तक बढ़ जाती है।

एक शोध से पता चला है कि रोजाना मलाईरहित दूध पीने से पार्किंसन बीमारी होने का जोखिम बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि अगर आप प्रतिदिन तीन बार मलाईरहित दूध ले रहे हैं तो भी पार्किंसन बीमारी का खतरा 34 फीसदी अधिक बना रहता है क्योंकि इससे भी शरीर को वसा की जरूरी मात्रा नहीं मिल पाती।

पार्किंसन बीमारी में मस्तिष्क के उस हिस्से की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं जो गति को नियंत्रित करता है। कंपन, मांसपेशियों में सख्ती व तालेमल की कमी और गति में धीमापन इसके आम लक्षण हैं. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अमेरिकी शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार कम वसा वाले डेयरी उत्पादों के नियमित सेवन और मस्तिष्क की सेहत या तंत्रिका संबंधी स्थिति के बीच एक अहम जुड़ाव है।

शोधकर्ताओं ने 1.30 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण करके यह नतीजा निकाला। ये आंकड़े इन लोगों की 25 साल तक निगरानी करके जुटाए गए। आंकड़ों ने दिखाया कि जो लोग नियमित रूप से दिन में एक बार मलाईरहित या अर्ध-मलाईरहित दूध पीते थे, उनमें पार्किंसन बीमारी होने की संभावना उन लोगों के मुकाबले 39 फीसदी अधिक थी, जो हफ्ते में एक बार से भी कम ऐसा दूध पीते थे. शोधकर्ताओं ने कहा, लेकिन जो लोग नियमित रूप से पूरी मलाईवाला दूध पीते थे उनमें यह जोखिम नजर नहीं आया। शोधकर्ताओं के मुताबिक पूर्ण मलाईदार डेयरी उत्पादों के सेवन से पार्किंसन बीमारी का खतरा कम किया जा सकता है। यह अध्ययन मेडिकल जर्नल ‘न्यूरोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ है।

राजधानी के फोर्टिस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में वरिष्ट कंसलटेंट डॉ. माधुरी बिहारी का कहना है कि शरीर की गति को नियंत्रित करने वाले हिस्से के क्षतिग्रस्त होने से यह लाइलाज बीमारी इनसान को एकदम बेबस बना देती है। ऐसे में परिवार के सदस्यों का सहयोग, सामान्य स्वास्थ्य देखभाल, व्यायाम और उचित भोजन से मरीज की परेशानियों को कुछ कम जरूर किया जा सकता है। डॉ. बिहारी के अनुसार पिछले 40 वर्ष में उन्होंने ऐसे बहुत से मरीज देखे हैं जो परिवार का उचित सहयोग मिलने पर अपनी इस बेदर्द बीमारी के साथ जीना सीख लेते हैं।

हाल ही में फोर्टिस अस्पताल वसंत कुंज द्वारा इस बीमारी के शिकार लोगों के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें 35 मरीजों के साथ उनके तीमारदारों ने भाग लिया। केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र के क्षतिग्रस्त होने पर पार्किंसन की बीमारी की आहट सुनाई देने लगती है। चलने और हाथ पैर को अपनी मर्जी से न हिला पाना इसके शुरूआती लक्षण हैं, जो धीरे धीरे मरीज को हताशा और अधीरता जैसी मानसिक परेशानियों की तरफ भी ले जाते हैं।

वेंकटेश्वर अस्पताल में न्यूरोलॉजी कंसलटेंट डा. दिनेश सरीन बताते हैं कि अनुवांशिकता या परिवार के एक या दो सदस्यों के इस बीमारी से पीड़ित होने पर बाकी सदस्यों के भी इसकी चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं के मुकाबले पुरूषों के इस बीमारी से प्रभावित होने की आशंका ज्यादा रहती है। शरीर के अंगों और चेहरे का लगातार हिलते रहना, चलने और बोलने में परेशानी तथा समन्वय तथा संतुलन की कमी इस रोग के मुख्य लक्षण हैं।

दुनियाभर में तकरीबन एक करोड़ लोग इस लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं। तमाम तथ्य डराने वाले हैं, लेकिन इन सबके बीच उम्मीद की एक किरण सिर्फ परिवार और अपनों का साथ है। यह बीमारी इनसान को एकदम बेबस बना देती है और ऐसे में अगर चंद हाथ उसके आसपास रहें, कुछ आंखे उसपर नजर बनाए रहें और जरूरत पड़ने पर कुछ हमदर्द चेहरे इर्दगिर्द नजर आएं तो बीमारी भले लाइलाज हो मरीज के हौंसले की डोर मजबूत बनी रहती है।


SHARE ON:-

image not found image not found

© Copyright BABJI NEWS NETWORK 2017. Design and Developed By PIONEER TECHNOPLAYERS Pvt Ltd.