NEWS: सरवानियां मे 21 अप्रेल को सकल विप्र बंधु आराध्य देव परशुरामजी की जयंती मनायेगा, पढ़े दिनेश वीरवाल की खबर

Image not avalible

NEWS: सरवानियां मे 21 अप्रेल को सकल विप्र बंधु आराध्य देव परशुरामजी की जयंती मनायेगा, पढ़े दिनेश वीरवाल की खबर

सरवानिया महाराज :-

सरवानिया महाराज । शहर में दुसरी बार की भगवान परशुरामजी की जयंती समारोह पुर्वक मनाई जाएगी। सकल ब्राहमण समाज के अध्यक्ष एवं परशुराम सेना के संयोजक संजय शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया की भगवान परशुराम जी की जयंती के उपलक्ष्य में सरवानिया महाराज में सकल  विप्र बंधुओं के द्वारा  21 अप्रेल  2018 को शहर  में 4:30 बजे एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन रखा गया है । आयोजन में भगवान परशुराम की मन मोहक झांकी बनाई जाएगी एवं बड़ी संख्या में सकल विप्र बंधु वह धर्मालु जन  शामिल होंगे। शोभा यात्रा शिव मंदिर सरवानिया महाराज से प्रारंभ होगी जो धर्म सभा में परिवर्तन होने के बाद महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा।  संजय शर्मा ने सकल विप्र बंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

भगवान परशुराम जी का परिचय

18 अप्रेल को भगवान परशुराम की जयंती है। इस दिन महू के पास जानापाव कुटिया में खास माहौल रहता है क्योंंकि ये भगवान परशुराम की जन्मस्थली है। मान्यता है कि जानापाव का पहाड़ी पर भगवान परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि का आश्रम था और यहीं उनका जन्म हुआ।

भगवान परशुराम को लेकर मान्यता है कि वे चिरंजीवी हैं। वे राम काल में भी थे और कृष्ण काल में भी थे। भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और ये भी मान्यता है कि उन्होंने ही भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र दिया।

भगवान परशुराम के जन्म को लेकर मान्यता है कि उन्होंने इंदौर से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जानापाव में जन्म लिया। यहां पहाड़ी पर उनके पिता महर्षि जमदग्रि की तपोभूमि और आश्रम था। इसी आश्रम में मां रेणुका ने परशुराम को जन्म दिया था। इसके बाद शिक्षा ग्रहण करने वे कैलाश पर्वत चले गए जहां भगवान शिव ने उन्हें शस्त्र और शास्त्र का ज्ञान दिया।

पिता के आदेश पर मां का सिर काट दिया था
पौराणिक कथाओं के मुताबिक ऋषि जमदग्रि बहुत ओजस्वी थे। उनके पत्नी रेणुका से 5 पुत्र रुक्मवान, सुखेण, वसु, विश्ववानस और परशुराम हुए थे। एक बार मां रेणुका स्नान के लिए नदी किनारे गईं तो वहां राजा चित्ररथ भी स्नान करने आये थे। राजा को देख रेणुका उनपर मोहित हो गईं। पत्नी रेणुका के इस आचरण को ऋषि ने अपने योग बल से जान लिया और उन्होंने गुस्से में अपने पुत्रों को मां का सिर काटने का आदेश दिया। पांचों पुत्रों में से केवल परशुराम ने पिता के आदेश का पालन किया और शेष सभी पुत्रों ने ऐसा करने से मना कर दिया। परशुराम ने पिता के आदेश पर मां का सिर काट दिया। पिता ने आज्ञा का पालन न करने वाले पुत्रों को चेतना शून्य होने का श्राप दिया, वहीं परशुराम को 3 वर मांगने को कहा। इस पर भगवान परशुराम ने पहले वर में माता रेणुका को फिर से जीवित करने, उन्हें मृत्यु की घटना याद न रहने का वर मांगा। दूसरे वर में परशुराम ने अपने चारों भाईयों की चेतना फिर से लौटाने का वरदान मांगा और तीसरा वरदान स्वयं के लिए मांगा कि उनकी किसी भी शत्रु से युद्ध में पराजय न हो और उनको लंबी आयु प्राप्त हो। पिता जमदग्रि ने खुश होकर बेटे परशुराम की सभी कामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद दिया।

एक किवदंती ये भी
इसके अलावा भगवान परशुराम की जन्मकथा का वर्णन श्रीहरिवंश पुराण के 27वें अध्ययाय में भी आता है। उनके जन्म की कथा भी विचित्र है। कथाओं के अनुसार भगवान परशुराम को राजा गाधि के घर जन्म लेना था लेकिन उनकी नानी द्वारा चरू बदल दिए जाने के कारण भगवान परशुराम का जन्म महार्षि ऋचीक के वंश में हुआ।

साढ़े 7 नदियां निकलती है जानापाव से
आज जानापाव पवित्र तीर्थ माना जाता है। जानापाव कुटिया पहाड़ी पर स्थित है और घने जंगलों से घिरा हुआ है। ये मालवा क्षेत्र का दूसरा सबसे ऊंचा स्थान माना जाता है। जानापाव पहाड़ी पर बने कुंड से दो दिशाओं में साढ़े सात नदियां बहतीं हैं। एक ओर बहने वाली नदियां करीब 750 किमी बहकर चंबल में होते हुए पहले यमुना और फिर गंगा से मिलती हैं। वहीं दूसरी ओर बहने वाली नदियां नर्मदा में मिलकर बंगाल की खाड़ी में जाती हैं। जानापाव पहाड़ी से निकलने वाली साढ़े सात नदियों में चंबल, गंभीर, अंगरेड़ व सुमरिया नदियां हैं जबकि साढ़े तीन नदियां बिरम, चोरल, कारम और नेकेड़ेश्वरी हैं


SHARE ON:-

image not found image not found

© Copyright VOICEOFMP 2017. Design and Developed By Pioneer Technoplayers Pvt Ltd.