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HEALTH: डायबीटीज के मरीजों को फल खाना चाहिए या नहीं, जानें

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HEALTH: डायबीटीज के मरीजों को फल खाना चाहिए या नहीं, जानें

डेस्क :-

डायबीटीज से पीड़ित कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि फलों में 'चीनी' नहीं होती इसलिए उन्हें जितना चाहे उतना खाया जा सकता है वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें लगता है कि चूंकि फल मीठे होते हैं, इसलिए उनमें चीनी की मात्रा तो निश्चित रूप से होती है लिहाजा उन्हें खाने से ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ने का खतरा रहता है। तो ऐसे में क्या किया जाए? 

ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए ग्लूकोज का इस्तेमाल 
मानव शरीर जिस शुगर को ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल करता है वह ग्लूकोज है। आलू, चावल, दूध, रोटी सब पचकर खून में ग्लूकोज प्रदान करते हैं। भोजन में लिए गए खाद्य पदार्थ जठर तंत्र में पचाए जाते हैं और इसलिए खाने के फौरन बाद खून में ग्लूकोज का स्तर (शर्करा स्तर) बढ़ा हुआ मिलता है। सामान्य लोगों में यह स्तर कम बढ़ता है जबकि डायबीटीज के रोगियों में अधिक। इसी बात को आधार बनाकर भोजन के 2 घंटे बाद खून में शर्करा की जांच की जाती है। हम लोग जो दैनिक भोजन करते हैं उसमें कई अन्य प्रकार का शर्करा भी होता है। दूध में लैक्टोज होता है, फलों में फ्रक्टोज, रोटी व आलू में माल्टोज होता है। 

डायबीटीज से बचें, इन उपायों को आजमाएं

फ्रक्टोज- फलों से मिलने वाला शर्करा 
यह सच है कि अगर आप फल खाते हैं तो खून में तुरंत ग्लूकोज का स्तर उतना नहीं बढ़ता जितना मिठाई खाने पर बढ़ता है। हालांकि शरीर के भीतर खाए गए फ्रक्टोज यानी फलों से मिलने वाले शर्करा को ग्लूकोज में बदलने की भी प्रणाली है। इसलिए फलों का अत्यधिक सेवन (विशेष रूप से मीठे फलों का) डायबीटीज रोगियों को नहीं करना चाहिए। फ्रक्टोज के कई अन्य नुकसान भी हैं। यह शरीर में ट्राइग्लिसराइड नामक वसा का स्तर व मोटापा बढ़ाता है और इंसुलिन के प्रति मानव ऊतकों की संवेदनशीलता कम करता है। 

मिथक: मीठा खाने से होता है डायबीटीज

हकीकत: मीठे से डायबीटीज होने का कोई संबंध नहीं है। इसके लिए वंशानुगत और दूसरे कारण जिम्मेदार होते हैं। हालांकि डायबीटीज हो जाने के बाद मीठा खाने से शुगर अनियंत्रित हो जाती है।

  • मिथक: ऐल्कॉहॉल का ब्लड ग्लूकोज के लेवल से संबंध नहीं है

    हकीकत: नियमित तौर पर ऐल्कॉहॉल के इस्तेमाल से शरीर में यूरिक ऐसिड और ट्राइग्लिसरॉइड बढ़ते हैं। साथ ही शुगर भी अनियंत्रित हो जाता है।

  • मिथक: डायबीटीज के लिए स्पेशल खाना होता है

    सच्चाई: डायबीटीज के लिए कोई स्पेशल खाना नहीं होता बल्कि संतुलित आहार की जरूरत होती है जिसमें 50-60 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 15-20 प्रतिशत प्रोटीन और 20-25 प्रतिशत फैट और दूसरे तत्व शामिल हों।

  • मिथक: शुगर फ्री खाना है समस्या का हल

    सच्चाई: शुगर फ्री का मतलब कैलरी फ्री नहीं है। शुगर फ्री के नाम पर जमकर मिठाइयां खाना नुकसानदेह हो सकता है। इनमें खोया, क्रीम आदि की कैलरी भी शामिल होती है जो शुगर अनियंत्रित कर सकती है।

  • मिथक: डायबीटीज हो तो फल खाना बंद कर दें

    हकीकत: डायबीटीज में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल जरूर खाने चाहिए। इनमें सेब, संतरा, मौसमी, अमरूद और पपीता खाएं। चीकू, केला और अंगूर जैसे फल न लें।

  • मिथक: ड्राई फ्रूट्स खाने से परहेज करना चाहिए

    सच्चाई: बादाम और अखरोट जैसे सूखे मेवों से शरीर में गुड कलेस्ट्रॉल यानी HDL कलेस्ट्रॉल बढ़ता है जो हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है, इसलिए ये चीजें खाएं।

  • मिथक: डायबीटीज हो तो कम खाना खाएं

    सच्चाई: कम खाना सही नहीं है। थोड़ा-थोड़ा खाएं और बार-बार खाएं। न तो ज्यादा देर भूखे रहें और न ही एक बार में ढेर सारा खाना खाएं।

  • मिथक: डायबीटीज एक उम्र के बाद ही होता है

    सच्चाई: डायबीटीज किसी को भी हो सकता है। इन दिनों नवजात और छोटे बच्चों में भी यह समस्या देखी जा रही है। उम्र बढ़ने के साथ टाइप 2 डायबीटीज की शिकायत बढ़ती है।

  • मिथक: डायबीटीक महिला को गर्भधारण नहीं करना चाहिए

    हकीकत: अगर आपको डायबीटीज है तो मां बनने से परहेज करने की कोई जरूरत नहीं है। एक्सपर्ट की देखरेख में संतुलित जीवनशैली अपनाएं। गर्भधारण से पहले, गर्भावस्था के दौरान और आगे भी सही शुगर लेवल मेनटेन रखें।

  • मिथक: डायबीटीज है तो ब्लड डोनेट नहीं कर सकते

    सच्चाई: रेड क्रॉस के अनुसार डायबीटीज के मरीज भी एक स्वस्थ इंसान की तरह रक्तदान कर सकते हैं बशर्ते कुछ मानकों को पूरा करते हों।

फलों में फ्रक्टोज के अलावा दूसरे पोषक तत्व भी 
इंसुलिन का काम मानव कोशिकाओं के भीतर ग्लूकोज को प्रवेश दिलाना है ताकि उसका ऊर्जा बनाने में इस्तेमाल हो सके। अगर फ्रक्टोज की मात्रा ज्यादा ली गई है तो वह इंसुलिन के कारण कोशिकाओं में प्रवेश पाने वाले ग्लूकोज को रोकेगा और इससे खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाएगा। हालांकि फल केवल फ्रक्टोज नहीं होते, उनमें फाइबर, विटमिन और कई दूसरे मिनरल्स भी होते हैं। लिहाजा, अगर फल बिल्कुल न खाया जाए तो इन सब पोषक तत्वों से भी मानव शरीर वंचित रह जाएगा। 

डायबीटीज के रोगी ज्यादा मीठे फलों से करें परहेज 
लिहाजा डायबीटीज में जोर फल बहुत अधिक न खाने पर और मीठे फलों से परहेज पर होना चाहिए। उदाहरण के लिए खीरे और केले में से खीरे को चुनें, अंगूर और पपीते में पपीता। आम-लीची न खाकर खरबूजा और तरबूज की थोड़ी मात्रा ली सकती है। ध्यान रखिए, डायबीटीज का अर्थ केवल शर्करा का स्तर रक्त में बढ़ना नहीं होता। डायबीटीज की कहानी ग्लूकोज से शुरू होकर बहुत आगे तक जाती है।


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