NEWS: महावीर जन्म वाचन में उमड़े श्रद्धालु, गुणरंजना श्री जी बोले तीर्थंकर केवल विष्वकल्याण के लिए जन्म लेते है, पढें खबर

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NEWS: महावीर जन्म वाचन में उमड़े श्रद्धालु, गुणरंजना श्री जी बोले तीर्थंकर केवल विष्वकल्याण के लिए जन्म लेते है, पढें खबर

नीमच :-

नीमच 10 सितम्बर 18 (केबीसी न्यूज)। तीर्थंकर परमात्मा ऐसी आत्मा है जो  सिर्फ विष्व कल्याण के लिए जन्म लेते है वे सभी  के लिए होते है जीव मात्र के प्रति करूणा, दया का भाव तीर्थंकरो के आलंबन से ही प्रकृट होता है स्वंय पृथ्वी प्रकृति और दुसरे मनुश्य के  साथ व्यवहार के लिए परमात्मा, अंहिसा, सत्य अचाय ब्रहमचर्य और अपरिग्रह का मार्ग सुझाते है । यह बात साध्वी गुणरंजना श्रीजी मसा.ने कही वे सोमवार सुबह पर्युशण पर्व के पाॅचवे दिवस आयोजित महावीर धर्म वाचन की धर्म सभा में बोल रही थी ।

उन्होंने कहा कि माता त्रिषला के चैदह महास्वपनों का विस्तृत वर्णन आता है श्रीसंघ एकत्र होकर आनंद महोत्सव मनाता है ऐसा करते समय यही भाव रहता है कि प्रभु महावीर का जन्म जगत के लिए षुभ और सुखकारी बने पुरे संसार में आनंद हो। देवधर्म  गुरू पर श्रद्धा हो तो सुफल मिलता है पलने के बिना सारे सपने अधूरे है अनेकांत यानि हर चीज को सम्पूर्ण पहलू से देखे तो इससे  आग्रह खत्म होगा । जहाॅ आग्रह खत्म होता वहाॅ लड़ाई भी खत्म  हो जाती है ।

उन्होंने कहा  कि अपनी आत्मा को साक्षातकार किए बिना जीवन सार्थक नहीं होता है । हम जन्मदिन मना रहे है लेकिन अंन्र्तआत्मा को पवित्र  करना आवष्यक है संसार में एक मात्र देष भारत है जिसमें 24 तीर्थंकरों का जन्म हुआ है  हमारे व्यवहार को देख कर महावीर भी रूदन करते  है हमारे भीतर दान दया है लेकिन हमें सहना नहीं आया यह बड़ी भूल है कर्मो का खात्मा करना चाहिए ना काहु से दोस्ती ना कि काहु से बैर को जीवन में आत्मसात करना चाहिए। मानव  संसार में नग्न दिगम्बर ही आया है मृत्यु पर दिगम्बर ही जायेगा हमे आभुशण,  खाना, कपड़े सभी ब्रांडेड चाहिए लेकिन बोलना ब्रांडेड आया के नहीं है । हमारा कर्म कब ब्रांडेड बनेगा। ऋशि कृशि संस्कृति नहीं है  खेत पर मल्टीया बन  रही है खेति नहीं करेंगे तो खाऐंगे  क्या  ?  हमारा निर्वाण कब होगा । हमारा  पुण्य खत्म हो  रहा  है।  बच्चे के जन्म के 7 दिन दोनों हाथ खुल जाते है हम रोज  षरीर  को सजाते है लेकिन क्या  कभी आत्मा को  सजाते है। परमात्मा का जन्म कल्याणक मनाना तभी सार्थक है आत्मा  में पवित्रता आये है हम सपना देखते है जो कभी पुरे होते नहीं है गौतम को प्यास बुझाने पर केवल  ज्ञान हो गया था जो अपने विकारों को जीत  लेते है उसे महावीर कहते है । परमात्मा  का निर्वाण हो गया 36 हजार श्रावको का परिवार था । चिंतन करे  कि हमारी जिन्दगी कितनी  है  परमात्मा द्वारा 40  वर्श का जीवन दिया । 100 लक्ष्मी राजाओं  ने दीक्षा लेकर प्रेरणा दी  थी । गरीब की आंख के आंसु पोछे तो जिन्दगी भर जीने  की दुआ देगें । महावीर ने गरीब के आंसु पोछे है । हम अपरिग्रहवादी बने । मैथुन संज्ञा, आहार संज्ञा, का त्याग कर हम महापुरूश बने । इसअवसर पर प्रभु मुनीम बनने, पलनाजी, बहुमान करने की   आदि  धार्मिक   चढ़ाने की बोली लगाई गई जिसमें पंकज अलका सकलेचा  का बहुमान किया  गया । बाबला म्यूजिकल  के फारूख भाई ने मधुर कर्णप्रिय भजन प्रस्तुत  किऐ । साध्वीजी ने बोली की गाडी जब छूट जाती  है तो एक दो तीन हो जाती  है,  ओ गुरूजी सा. आत्मा नोखातो  खुलवाजों प्रभु  महावीरजी बैक   माॅं,  रगमारंगमा प्रभु थारा ही रंग में रंग गयोरे...  आत्मा आत्मा  आज  आनंद   ना आत्मा..., प्रभु तेरा पता मुझे मालुम नहीं में खत  लिखकर पुछती हूं  गौतम ने रूदन मचाया  प्रभु वीर ने निर्वाण पाया आदि भजन प्रस्तुत किएसिद्धीतप की लडी में हेमा कोठारी षिखरचन्द्र पगारिया द्वारा तीन उपवास करने श्रीसंघ द्वारा सामुहिक अनुमोदना की गई । तीन सोने चांदी  के लक्की ड्रा एवं धार्मिक प्रषन मंत्र के विजेताओं  को पुरूस्कार प्रदान  किए गए ।  साध्वी गुणरंजना श्रीजी के सानिध्य  में सिद्धीतप,   तेले बेले, विग्रह, त्याग,  रस त्याग,   आयम्बिल अठाई  तप की लडिया अनवरत  जारी है  तपस्या   के  ठाठ    जारी  है ।


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