OMG ! सिम लेते समय अगर एजेंट बार-बार लगवाए आपका अंगूठा, तो इस मुसीबत में फंस सकते हैं आप, पढें खबर

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OMG ! सिम लेते समय अगर एजेंट बार-बार लगवाए आपका अंगूठा, तो इस मुसीबत में फंस सकते हैं आप, पढें खबर

नीमच :-

निजी नेटवर्क कंपनियां चाहे लाख दावे करें कि आधार नंबर से लिंक कराने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से प्री-एक्टिवेटिड सिम कार्ड का गोरखधंधा खत्म हो चुका है, लेकिन स्थिति इसके ठीक उलट है। दरअसल अपने नेटवर्क के सिम की बिक्री बढ़ाने के लिए निजी कंपनियों के एजेंटों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। जिसके चलते बाजार में अब फिर पहले से एक्टीवेटेड सिम आपको आसानी से मिल जाएंगे। बाराबंकी पुलिस ने भी ऐसे ही प्री-एक्टिवेटेड फर्जी सिम के गोरखधंधे का भांडाफोड़ किया है।

फर्जी सिम से बढ़ रही वारदात
दूसरों के आधारकार्ड पर सिम को पहले एक्टीवेट करवाने और उसे बाजार में तय कीमत से ज्यादा पर बेच देने की होड़ में तमाम कंपनियों के एजेंट लगे हुए हैं। ऐसे सिम जो किसी और के नाम से चालू किया गया हो उसे कोई भी आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति किसी भी अपराधिक गतिविधि में प्रयोग कर सकता है। ऐसे ही प्री-एक्टिवेटेड फर्जी सिम के चलते आज के दौर में ऑनलाइन बैंकिंग की धोखाधड़ी, ग्राहकों को जाल में फंसाकर विभिन्न तरीके का फर्जीवाड़ा, फर्जी फेसबुक आईडी और व्हाट्सएप के जरिये अफवाह फैलाना और सबसे बड़ी बात देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होना और किसी के पकड़ में न आना जैसी गम्भीर घटनाओं का बोलबाला है। बाराबंकी पुलिस की गिरफ्त में भी एक ऐसा गिरोह आया है जो बाजार में ऐसे प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड को उप्लब्ध कराता है। इनके पास से पुलिस ने एक दो नहीं बल्कि सिमकार्ड का जखीरा बरामद किया है।

260 प्री-ऐक्टीवेटड सिम बरामद
पकड़े गए आरोपी मोहम्मद सालिम और संदीप कुमार के पास से एक दो नहीं बल्कि 260 ऐसे सिमकार्ड मिले हैं जिनके लिए आपको अपनी पहचान उजागर करने की जरूरत ही नहीं है, बल्कि वह पहले से ही ऐक्टीवेट हैं। कीमत थोड़ी ज्यादा दीजिये और तुरंत इन सिम कार्डों का इस्तेमाल शुरू कर दीजिए। इनके इस्तेमाल से आपको कहीं फंसने का खतरा ही नहीं क्योंकि यह आपके नाम पर हैं ही नहीं।पुलिस का भी मानना है कि पहले से चालू ऐसे सिमकार्ड से उन अपराधियों को पकड़ना मुश्किल हो जाता है जो अपराध करते हैं। इस तरह के सिमकार्ड का इस्तेमाल भी अपराधी ही करते हैं। आजकल तमाम तरह के साइबर अपराध बढ़े हैं।

एक ही ग्राहक से कई बार लगवा लेते थे अंगूठा
बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक वी.पी. श्रीवास्तव ने बताया कि साइबर सेल को एक मामले से यह ज्ञात हुआ था कि बाजार में पहले से ऐक्टिवेटेड फर्जी सिम बिक रहे हैं। इस पर जब काम शुरू हुआ तो यह दोनों लड़के गिरफ्त में आए। यह लोग भोले भाले ग्राहकों के सिम को चालू किये जाने वाली मशीन या फोन पर कई बार यह कहकर अंगूठा लगवा लेते थे कि अभी ठीक से अंगूठे का निशान आया नही हैं इस तरह से वह एक ही ग्राहक के आधारकार्ड पर दो या तीन सिम एक्टीवेट कर लेते थे। एक सिम ग्राहक को देते थे बाकी सिम एक्टीवेट कर अपने पास रख लेते थे। जो बाद में एक हजार रुपए से तीन हजार रुपए तक बेंच देते थे। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सिम कार्ड की कंपनियां अपने डिस्ट्रीब्यूटर को कभी-कभी उपहार का प्रलोभन देकर बड़े टारगेट देती हैं और डिस्ट्रीब्यूटर भी अपने कर्मचारियों को ज्यादा सिम बेचने का जिम्मा सौंपती हैं। जिससे वह ज्यादा से ज्यादा सिम एक्टीवेट कर लिए जाते हैं। जो बाद में बड़ी कीमत में बेचे जाते हैं। ऐसे सिम का उपयोग लोग अपराध में इस्तेमाल करते हैं। पुलिस जांच में डिस्ट्रीब्यूटर की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


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