NEWS: त्याग का पहला चरण है दान - साध्वी उपेन्द्रयषा श्रीजी

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NEWS: त्याग का पहला चरण है दान - साध्वी उपेन्द्रयषा श्रीजी

नीमच :-

नीमच 10 अक्टुबर 18 (केबीसी न्यूज) धन के अर्जन और वस्तुओं के संग्रह के मूल में राग है जबकि त्याग हमें परिग्रह से मुक्ति दिलाता है । वस्तुओं के ममत्व को कम करके परिणामों में निर्मलता लानी है । त्याग हमारी आत्मा पर लगे कर्मो का बोझ कम करता है ।

यह बात साध्वी उपेन्द्रयषा श्रीजी मसा. ने कही वे पुस्तक बाजार स्थित आराधना भवन में बुधवार सुबह 9 बजे आयोजित चार्तुमास धर्मसभा में बोल रही थी उन्होने कहा कि जोडने के साथ छोडने की कला भी आनी चाहिये । समय आने पर छोडने का दान देने का साहस रखो । त्याग जीवन का परम सौंदर्य है । दान ही त्याग का प्रथम चरण है । दान देने से ही त्याग का संस्कार पड़ता है नदी, पानी, हवा, चन्द्रमा, सूर्य हमें त्याग का संदेष देते है । साध्वीजी ने बताया कंजूस व्यक्ति धन को छोड नहीं सकता है यह धन से सदा लिपटा रहता है । धन को छोड़ना उसके लिये मौत बराबर होता हे । वह धन के दान अथवा सदुपयोग में नहीं किन्तु बंधन के रक्षण में ही सुखानुभूति करता है । अपार धन सम्पति होने पर भी वह कश्टमय जीवन जीकर भी धन के रक्षण के लिये सतत उधमषील होता है । कृपण को धन, प्राण से भी अधिक प्यारा होता है । कृपण व्यक्ति प्राणो की परवाह किये बिना धन को बढ़ाने में अधिक प्रयत्नषील होता है । कृपण का धन, दान व भोग में नहीं जाता है बल्कि उसके धन का विनाष ही होता है ।

श्रीसंघ सचिव मनीश कोठारी ने बताया कि आज 11 अक्टुबर को प्रमोद कुमार, अमनकुमार मेहता के यहा सुबह 9 बजे प्रवचन आयोजित होगें ।  12 अक्टुबर को सुरभिरत्ना श्रीजी मसा. के 109 आयम्बिल की तपस्या का पारणा  सुरजमल, पारस नागोरी के आवास पर पगलिया के लिये बैण्डबाजों से जुलूस जायेगा । सकल संघ के साथ सुबह 8 बजे सभी श्रद्धालु भक्त सहभागी बनेगें । 


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