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NEWS: श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में बोले पं. पंकज कृष्‍ण शास्त्री, संसार का क्षय होना ही मोक्ष मार्ग है, पढें खबर

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NEWS: श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में बोले पं. पंकज कृष्‍ण शास्त्री, संसार का क्षय होना ही मोक्ष मार्ग है, पढें खबर

नीमच :-

नीमच 06 दिसम्बर 18 (केबीसी न्यूज)। नारायण नाम स्मरण करने से मनुश्य जीवन से मुक्ति मिलती है संसार के त्याग बिना जीवन का कल्याण नही मोह का उत्पन्न होना आसक्ति है संसार का क्षय होना ही मोक्ष मार्ग है आत्मा अमर है तो कड़वे बोल से मनुश्य की दुर्दषा हो सकती है व्यक्ति को इस जीवन में जितना हो सकें, हमें दुखियों की सहायता करना चाहिए । मनुश्य जीवन बार-बार नहीं मिलेगा । यह बात पं. पंकजकृश्ण षास्त्री महाराज ने कही वे अम्बेड़कर कालोनी स्थित नारायणगिरी बाबा मंदिर प्रांगण में गुरूवार दोपहर 1 से 5 बजे तक आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में बोल रहे थे ।

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उन्होंने कहा कि श्रीकृश्ण ने झुठी पत्तल उठाई और अपना भाग्य चमकाया लिया था अतिथि भाग्य से आते है उनकी सेवा ईष्वर सेवा समान है अतिथि भगवान होता है माता पिता की सेवा से बढ़कर कोई तीर्थ नहीं । पत्नी के लिए पती की सेवा ही परमेष्वर सेवा है पतिवृता स्त्री के आगे तो यमराज भी हारे है पति की सेवा से बढ़कर कोई नहीं होता है नारी षक्ति झांसी की रानी, मीरा, सीता, अनुसूईया का चरित्र पढ़े और उसे जीवन में आत्मसात करें । संसार में मोह होता है यही दुख का कारण है केवल मानव जीवन से ही मोक्ष सम्भव है जड़ भरत मुर्ख बनकर रहे । हिरणाकष्यप ने भक्त प्रहलाद को खूब प्रताड़ित किया लेकिन उसने प्रभु भक्ति को नहीं छोड़ा । 50 वर्श की आयु तक परिवार से मोह रखे तो वहां तक ठीक है लेकिन 50 वर्श बाद भक्ति तपस्या में लीन हो जाना चाहिये । राजा भरत मरते समय मोह हिरण के बच्चे में रहा तो अगला जन्म उनका हिरण के यहाॅं ही हो गया था इसलिए मरते समय मोह प्रभु भक्ति में ही रहे । नारायण की सेवा करेंगे तो लक्ष्मी स्वयं ही चली आएगी सच्ची नारी वही है जिसके मन में पति का पहले सम्मान हो । हाथी मगरमच्छ की लड़ाई में हाथी का अंहकार टूट गया । हाथी की मृत्यु नजर आती है तब उसे भगवान याद आते है अंहकार से जब पतन होता है तब कोई साथ नहीं आता है । भक्त का पैर पकड़ने वाले को भगवान पहले तार देते है । भगवान ने हाथी का कल्याण किया था कथा अमृत के ज्ञान से जीवन में पाप मिटते है अमृतधारा आती है । जीवन में कश्ट हो तो गुरू कोयाद करना चाहिए गुरू बिना ज्ञान नहीं मिलता है भगवान भाव के भुखे होते है धन के नहीं । यदि हम किसी का धन उधार लेगें तो वह वापस अगले जन्म में भी चुकाना पड़ता है । ईमानदारी आज भी जीवित है । धन का सद्उपयोग दान, पुण्य से होता है संसार में ये मानव षरीर किराएं का घर है । गजराज को बहुत अंहकार था भगवान अंहकार को मिटा देता है । रावण वेन्दान्त ज्ञानी था लेकिन अंहकार के चलते उसका सब कुछ नश्ट हो गया था राम स्वंय परमात्मा थे लेकिन मानव जीवन की सभी कठिनाईयों वनवास, सीता त्याग का अनुभव किया और संसार को मर्यादा पुरूशोतम का आर्दष प्रेरणा दी श्रीकृश्ण का तो जीवन भी अजीब रहा श्रीकृश्ण का जन्म ही जेल में हुआ । कृश्ण को मथुरा छोड़ना पड़ी फिर हस्तीनापुर से पांडाव आये तो महाभारत करवाना पड़ी थी । श्रीकृश्ण को सदैव भागना पड़ा कभी रण छोड तो कभी माखन चोर कहलाएं मनुश्य अवतार में कैसे-कैस रूप में दुख देखे । श्रीकृश्ण ने मनुश्य को दिखाया कि प्रभु को भी दुख देखना पड़ते है यह संसार को सिख दी थी । भागवत में राम सियाराम जय-जय राम.....गोविन्द मेरो है गोपाल मेरो राधा रमण नंदलाल मेरो है....अजब नैन मतवार राधा ने कियो इषारों, म्हारा नैना में राम समाई गयो रे......मीरा तो सांवलिया में समाई गई रे....नंद और यषोदा नाचे, थारो बहुत बड़ो उपकार....नटवर नागर नंदा भजोरे मन गोविन्दा आदि भजनों की प्रस्तुति दी । भागवत पूजन आरती में रूपेष कौषल, नाथुलाल कौषल, चन्दादेवी कौषल द्वारा चांदी का मुकूट सोने की बालि चढ़ाई गयी । आरती भागवत पूजन में कमल डुंगर, हेमचन्द्र, सावित्री व्यास, प्रमोद कौषल, षांतिबाई सोंलकी, राधाबाई पंवार, राकेष चैरसिया नीमचसिटी, अमरसिंह, त्रिवेणीदेवी बघाना, जितेन्द्र अजमेर, ओमप्रकाष कपड़े वाले, रज्जोबाई, करमतिबाई, षोभाबाई कौषल, कमलाबाई, सुमित्राबाई, मिश्रीलाल बघाना, अवतार पंवार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे ।  कथा में श्रीराम जन्म, राजा दषरथ, पुत्रेश्ठी यज्ञ, कैकयी, धनुशयज्ञ, श्रृंगीऋशी गुरूवषिश्ट, पृथ्वी, अजामिल, कयादु हिरणा कष्यप, चक्रवती सम्राट, भरत, पुनरंजन गौमाता, मनु महाराज राजा बलि आदि धार्मिक प्रसंगों का वर्तमान परिपे्रक्ष्य में महत्व प्रतिपादित किया ।  

श्रीकृश्ण जन्म पर झुमे श्रद्धालु -
भागवत ज्ञान गंगा में जब भगवताचार्य श्री षास्त्री ने श्रीकृश्ण जन्म का प्रसंग बताया तो भक्ति पांडाल आलकी की पालकी जय कन्हैयालाल की, जय-जय श्रीकृश्ण की स्वर लहरियां बिखरने लगी श्रीकृश्ण जन्म की झांकी श्रद्धालुओं के आर्कशण का केन्द्र बनी । भक्ति पांडाल को गुब्बारों, फुल पत्तियों से श्रृंगारित किया गया । बालकृश्ण का अभिनय 4 माह के नन्ने बालक रौनक पुत्र श्रीमती गंगा राजेन्द्र समीर ने तथा वासुदेव का अभिनय गणेष षर्मा ने प्रस्तुत किया । 


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