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NEWS: कृष्‍णा की माखन लीला मनोरंजन का साधन नहीं प्रेरणा का माध्यम- पं. पंकजकृष्‍ण शास्त्री

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NEWS: कृष्‍णा की माखन लीला मनोरंजन का साधन नहीं प्रेरणा का माध्यम- पं. पंकजकृष्‍ण शास्त्री

नीमच :-

नीमच 07 दिसम्बर 18 (केबीसी न्यूज)। नटखट पर नंदलाल की मनमोहन लीलाओं का सूनकर श्रद्धालुओं का मन श्री कृश्ण के चरणों  में रम रहा था यह दृष्य रहा अम्बेडकर कालोनी स्थित नारायणगिरी बाबा मंदिर प्रांगण में चल रही भागवत ज्ञान गंगा का जहां माखन मटकी फोड़ की बाल लीलाओं को सुनकर कृश्ण भक्त उत्साह के साथ भक्ति रस में खुब डूबे । षुक्रवार पंचम दिवस को पं. पंकजकृश्ण षास्त्री महाराज ने भगवान कृश्ण की माखन चोरी मटकी फोड की कथा सुनाने के साथ कृश्ण द्वारा गोपियों के आग्रह पर माखन चोरी का वृंतात सुनाया । भागवत कथा अनमोल है महाराज श्री ने बताया कि भगवान श्रीकृश्ण ने जब यषोदा माॅं को माटी खाने के बहाने  मुख में ब्रमाण्ड का दर्षन कराया । उसके बाद यषोदा को अहसास हो गया कि उनका लल्ला कोई साधारण नहीं ये परम ब्रहम का अवतार है भगवान श्रीकृश्ण ने गोर्वधन को इन्द्र देवता के कोप से बचाया एवं इन्द्र के अंहकार को नश्ट किया । उन्होंने कहां कि परमात्मा एक बार जिसको पकड़ लेते है फिर उसका कल्याण के साथ मोक्ष करके ही छोड़ते है कृश्णाकी माखन लीला वात्सल्य का प्रेम ग्रंथ है भजन करते समय बैराग्य का भाव धारण करना चाहिये । मनुश्य अपने परिवार व पड़ौसी के प्रति राग, द्वेश नहीं रखें इससे अपना ही नुकसान होता है । कृश्णा की माखन लीला मनोरंजन का साधन नहीं प्रेरणा का माध्यम है भागवत सदकर्म की प्रेरणा देती है धर्म की रक्षा बिना राश्ट्र का विकास नहीं यषोदा का अंहकार था तो कृश्ण नहीं बधे प्रेम से श्रीकृश्ण भक्तों के बधन में बंध जाते है जनप्रतिनिधि नदी में प्रदुशण होने से बचाने के लिए प्रयास करें । कर्मो का फल 100 जन्म बाद  भी मिलता है इसलिए मनुश्य को पुण कर्म करना चाहिए ऐसा कर्म करो जो सद्गुरू भगवान को अर्पण होता है भागवत का मूल्य नहीं करना चाहिए कथा के दौरान जैसे बालकृश्ण का प्रवेष हुआ तो मेरा दिल दिवाना हो गया वृन्दावन की गलियों में....जय जय राधे राधे ष्याम जय जय वृन्दावनधाम...श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट बिराज रहियो....ऐसे कोई धार्मिक भजनों की प्रस्तुति दी । और पुरी श्रद्धा के साथ खुब नृत्य किया । भक्ति भागवत पांडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा नजर आया उन्होंने सुकदेवमुनि, मधुमंगल, ग्वालपाल, श्रीधामा, कंसवध, वृन्दावन, मथुरा, ग्वालपाल, गाये, यमुना, सांप, पाप, ब्रहमा, कार्तिक, गोपश्टमी पर्व, गोकुल, दाऊ बलराम, पुतना वध, नंदबाबा, यषोदा, चंदा मामा, अगस्त ऋशी, धेनुकासुर, अकासूर, बगासूर, इन्द्रदेव, गिरीराज पर्वत, मानसी गंगा, मटकी फोड़, माखन रास लीला, भलाई, घुंघट, लाज षर्म, आदि धार्मिक प्रंसगों का वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महत्व प्रतिपादित किया । भागवत कथा आरती पौथी पूजन में पप्पू समीर, सोनु खुंआर, महेष भंरग, ष्याम कैथवास, रज्जोबाई, राधेष्याम मालखेड़ा वाले, अषोक पंवार, प्रमोद कौषल, षांतिबाई सोंलकी, राधाबाई पंवार, षोभाबाई कौषल, कमलाबाई, सुमित्राबाई, मिश्रीलाल बघाना, अवतार पंवार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे । 

छप्पन भोग एवं गिरिराज पर्वत महोत्सव बना आर्कशण का केंद्र  -
भागवत के मध्य जब भागवताचार्य पं. पंकजकृश्ण षास्त्री ने गिरिराज पर्वत पूजा महोत्सव का प्रसंग बताया तो जय-जय श्रीकृश्ण की जयघोश होने लगी इसके साथ ही इस अवसर पर श्रद्धालु भक्तों द्वारा छप्पन भोग लगाकर झांकी श्रृंगारित की गयी। और नन्हे बालक देव पुत्र ललिता अवतार पंवार ने श्रीकृश्ण का आर्कशक अभिनय प्रस्तुत किया । जो श्रद्धालुओं के आस्था का केन्द्र बना सभी ने गिरिराज पर्वत की पूजा अर्चना कर सुख-समृधि के लिये प्रार्थना की । इस अवसर पर मे तो गोर्वधन को जाऊ न माने मेरो मनवा राधे ही विराज रही......एक बार वंदावन आकर देखों सांवरे को दिल में बसाकर देखों.....मेरा भी बना दो छोटा सा काम रे.....कजरारे कजरारे मोटे-मोटे तेरे नेन गौरी नजर ना लग जायें......ताही अहीर की छोरिया छछिया पर छाछ पर नाच नचावें.......आदि भजनों की प्रस्तुत पर श्रद्धालु झुम उठें । साथ ही गोपी कृश्ण मिलन, महारास की नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गयी ।  

 


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