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WOW: महाशिवरात्रि विशेष- क्या आपको पता है? भगवान शिव पर बिल्वपत्र के अलावा कौन कौन से पत्र चढ़ाये जाते है और क्या है इनके औषधीय गुण, बता रहे है डॉ. रविकांत वैष्णव

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WOW: महाशिवरात्रि विशेष- क्या आपको पता है? भगवान शिव पर बिल्वपत्र के अलावा कौन कौन से पत्र चढ़ाये जाते है और क्या है इनके औषधीय गुण, बता रहे है डॉ. रविकांत वैष्णव

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शिव पुराण के अनुसार भगवान शंकर को सबसे प्रिय बिल्व पत्र है। इसलिए ही सावन के महीने में भगवान शिव को जलाभिषेक के साथ बिल्व पत्र चढ़ाया जाता हैं। शिव पुराण के अनुसार जो भी इसे भोलेनाथ पर चढ़ाता है, भोले बाबा उस पर अपनी कृपा अवश्य बरसाते हैं। ऐसा नहीं है कि भगवान शिव को केवल बिल्व पत्र ही पसंद हैं। बल्कि बिल्व पत्र के अलावा भी ऐसी कई चीजें हैं जो भगवान शिव की पसंदीदा चीजों में हैं और उनका इस्तेमाल करके भगवान शिव को प्रसन्न किया जा सकता और स्वयं को स्वस्थ रखा जा सकता है। आइये जानते है भगवान आशुतोष पर चढ़ाए जाने वाले पत्र और उनके औषधीय प्रयोग ।

बिल्व
1 बुखार होने पर बेल की पत्तियों के काढ़े का सेवन लाभप्रद है। यदि मधुमक्खी, बर्र अथवा ततैया के काटने पर जलन होती है। ऐसी स्थिति में काटे गए स्थान पर बेलपत्र का रस लगाने से राहत मिलती है।

2 हृदय रोगियों के लिए भी बेलपत्र का प्रयोग बेहद फायदेमंद है। बेलपत्र का काढ़ा बनाकर पीने से हृदय मजबूत होता है और हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। श्वास रोगियों के लिए भी यह अमृत के समान है। इन पत्तियों का रस पीने से श्वास रोग में काफी लाभ होता है।

3 शरीर में गर्मी बढ़ने पर या मुंह में गर्मी के कारण यदि छाले हो जाएं, तो बेल की पत्तियों को मुंह में रखकर चबाने से लाभ मिलता है और छाले समाप्त हो जाते हैं।

4 बवासीर आजकल एक आम बीमारी हो गई है। खूनी बवासीर तो बहुत ही तकलीफ देने वाला रोग है। बेल की जड़ का गूदा पीसकर बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को सुबह शाम ठंडे पानी के साथ लें। यदि पीड़ा अधिक है तो दिन में तीन बार लें। इससे बवासीर में फौरन लाभ मिलता है।

5 यदि किसी कारण से बेल की जड़ उपलब्ध न हो सके तो कच्चे बेलफल का गूदा, सौंफ और सौंठ मिलाकर उसका काढ़ा बना कर सेवन करना भी लाभदायक होगा। यह प्रयोग एक सप्ताह तक करें।

6 बरसात में अक्सर सर्दी, जुकाम और बुखार की समस्याएं अधिक होती हैं। ऐसे में बेलपत्र के रस में शहद मिलाकर पीना फायदेमंद है। वहीं विषम ज्वर हो जाने पर इसके पेस्ट की गोलियां बनाकर गुड़ के साथ खाई जाती हैं।

7 पेट या आंतों में कीड़े होना या फिर बच्चें में दस्त लगने की समस्या हो, बेलपत्र का रस पिलाने से काफी फायदा होता है और यह समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।

भांग
जैसे कि सबको पता है कि भोलेनाथ को बिल्व के साथ-साथ भांग भी अधिक प्रिय है। ज्योतिष के अनुसार अगर भांग का पत्ता या भांग का शर्बत बनाकर भोलेनाथ को चढ़ाएं तो शिव बड़े प्रसन्न होते हैं। इसका कारण यह है कि भांग एक औषधि है। कहते हैं जब शिव जी ने विष का पान किया था तब जहर का उपचार करने के लिए भांग के पत्तों का इस्तेमाल किया था।

1 एक ओर जहां भांग का अत्यधिक सेवन सिरदर्द का कारण बन सकता है, वहीं सिरदर्द का इलाज भी भांग के पास है। जी हां, भांग की पत्तियों का अर्क निकालकर, इसकी कुछ बूंदे कान में डालने से सिरदर्द पूरी तरह से खत्म हो जाता है।

2 पाचनशक्ति को बढ़ाने के लिए भांग फायदेमंद है। साथ ही किसी प्रकार का घाव हो जाने पर, भांग की पत्तियों का लेप बनाकर घाव पर लगाएं। ऐसा करने पर घाव जल्दी भर जाएगा और किसी प्रकार की अन्य परेशानी भी नहीं होगी।

3 यदि आपकी त्वचा अत्यधिक रूखी या खुरदुरी है, तो भांग की पत्तियों का इस्तेमाल त्वचा को चिकना बनाने में मदद करेगा। इसकी पत्तियों को पीसकर लेप तैयार करें और इसे त्वचा पर लगाएं।

4 कम मात्रा में भांग का सेवन आपकी इंद्रियों और संवेदनाओं की तीव्रता में इजाफा करती है। जैसे यह स्पष्ट सुनाई देने और दिखाई देने में मददगार है। इसका सेवन आपके खराब मूड को सुधारने का काम भी करता है।

5 भांग के बीज प्रोटीन और 20 अमीनो एसिड से भरपूर हैं, जो कैलोरी को जलाने वाली मांसपेशियों के विकास के लिए अहम हैं। कसरत के बाद भांग के कुछ बीजों का जूस या शेक पीना फायदेमंद होता है।

धतूरा
शिव पुराण के अनुसार शिव को धतूरा बहुत पसंद है। धतूरे का फल और पत्ता औषधि के रूप में भी काम आता है। शिव जी को धतूरा अर्पित करने वाले को शिव जी धन-धान्य प्रदान करते हैं।

1 धतूरे का प्रयोग गंजेपन को दूर करने के लिए फायदेमंद साबित होता है। इसके रस को सिर पर मलने से न केवल डैंड्रफ ख़त्म होती है, बल्कि गंजेपन से भी छुटकारा मिलता है।

2 दर्द से रहत पाने के लिए धतूरे के रस को टिल के तेल में मिलकर गर्म कर लें और दर्द वाली जगह पर इस तेल की मालिश करें।

3 बवासीर के इलाज के तौर पर भी धतूरे का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए दःतूरे के फूल और पत्तों को जलाकर इसके धुएं से बवासीर के मस्सों की सिकाई करने से भी फायदा होता है

4 नियमित रूप से धतूरे के रस और तिल के तेल की मालिश करने से जोड़ों की समस्या और गठिया जैसी समस्याओं से न केवल काफी हद तक निजात पाई जा सकती है बल्कि इस रोग को पूरी तरह से मिटाया भी जा सकता है

5 बुखार या कफ होने की स्थिति में लगभग 125 -250 मिलीग्राम धतूरे के बीज लेकर इसे जलाकर राख बना लें और इस राख को मरीज को दें। इससे बुखार या कफ गायब हो जाएगा।

नोट - धतूरे के फायदे आजमाने से पहले किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

आक
मान्यता है कि जो भक्त भगवान शिव को आक अर्पित करता है भगवान शिव उसके मानसिक और शारीरिक सभी तरह के कष्ट हर लेते हैं। इतना ही नहीं कहा जाता है कि जो शिव को आक अर्पित करता है भगवान शिव उनकी गरीबी दूर करते हैं।

1. अस्थमा
इसके फूलों को सूखा कर रोजाना इसका चूर्ण खाने से अस्थमा, फेफडों के रोग और शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है।

2. खुजली
स्किन में एलर्जी या रूखेपन के कारण खुजली की समस्या हो जाती है। इससे छुटकारा पाने के लिए इसकी जड़ को जला लें। इसकी राख को कड़वे तेल में मिलाकर खुजली वाली जगहें पर लगाएं। खुजली की परेशानी दूर हो जाएगी।

3. डायबिटीज
रोजाना सुबह इस पौधे की पत्तियों को पैर के नीचे रख कर जुराबें डाल लें। रात को सोने से पहले इस पत्ते को निकाल दें। इसका इस्तेमाल शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है।

4. कुष्ठ रोग
इसकी पत्तियों को पीस कर सरसों के तेल में मिक्स करें। इसे कुष्ठ रोग के घाव पर लगाएं। इसे नियमित रूप से लगाने पर घाव जल्दी भर जाएंगे।

5. बवासीर
आक का पत्ता और डण्ठल को पानी में भिगो दें। इसे पीने से बवासीर की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।

6. चोट लगना
शरीर के किसी भी हिस्से में चोट लगने पर आक के पत्तों को गर्म करके बांध लें। इससे चोट से खून बहना बंद होने के साथ-साथ दर्द और सूजन भी दूर हो जाएगी।

पीपल
पुराणों में उल्लेख मिलता है कि पीपल पर त्रिदेवों का वास होता है। पीपल के पत्तों पर भगवान शिव विराजमान होते हैं। जो भक्त शिव जी को पीपल के पत्ते अर्पित करते हैं शिव जी उन्हें शनि के प्रकोप से बचाते हैं।

1 सांस की तकलीफ - सांस संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या में पीपल का पेड़ आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए पीपल के पेड़ की छाल का अंदरूनी हिस्सा निकालकर सुखा लें। सूखे हुए इस भाग का चूर्ण बनाकर खाने से सांस संबंधी सभी समस्याएं दूर हो जाती है। इसके अलावा इसके पत्तों का दूध में उबालकर पीने से भी दमा में लाभ होता है।

2 गैस या कब्ज - पीपल के पत्तों का प्रयोग कब्ज या गैस की समस्या में दवा के तौर पर किया जाता है। इसे पित्त नाशक भी माना जाता है, इसलिए पेट की समस्याओं में इसका प्रयोग लाभप्रद होता है। इसके ताजे पत्तों के रस निकालकर सुबह शाम एक चम्मच पीने से पित्त के साथ ही समस्याएं भी समाप्त होती हैं।

3 दांतों के लिए - पीपल की दातुन करने से दांत मजबूत होते हैं, और दांतों में दर्द की समस्या समाप्त हो जाती है। इसके अलावा 10 ग्राम पीपल की छाल, कत्था और 2 ग्राम काली मिर्च को बारीक पीसकर बनाए गए मंजन का प्रयोग करने से भी दांतों की सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।

4 विष का प्रभाव - किसी जहरीले जीव-जंतु द्वारा काट लेने पर अगर समय पर कोई चिकित्सक मौजूद नहीं हो, जब पीपल के पत्ते का रस थोड़ी-थोड़ी देर में पिलाने पर विष का असर कम होने लगता है।

5 त्वचा रोग - त्वचा पर होने वाली समस्याओं जैसे दाद, खाज, खुजली में पीपल के कोमल पत्तों को खाने या इसका काढ़ा बनाकर पीने से लाभ होता है। इसके अलावा फोड़े-फुंसी जैसी समस्या होने पर पीपल की छाल का घिसकर लगाने से फायदा होता है।

6 घाव होने पर - शरीर के किसी हिस्से में घाव हो जाने पर पीपल के पत्तों का गर्म लेप लगाने से घाव सूखने में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रतिदिन इस लेप का प्रयोग करने व पीपल की छाल का लेप करने से घाव जल्दी भर जाता है और जलन भी नहीं होती।

7 जुकाम - सर्दी-जुकाम जैसी समस्या में भी पीपल लाभदायक होता है। पीपल के पत्तों को छांव में सुखाकर मिश्री के साथ इसका काढ़ा बनाकर पीने से काफी लाभ होता है। इससे जुकाम जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है।

8 त्वचा के लिए - त्वचा का रंग निखारने के लिए भी पीपल की छाल का लेप या इसके पत्तों का प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा यह त्वचा की झुर्रियों को कम करने में भी मदद करता है। पीपल की ताजी जड़ को भिगोकर त्वचा पर इसका लेप करने से झुर्रियां कम होने लगती हैं।

9 तनाव करे कम - पीपल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, इसके कोमल पत्तों को नियमित रूप से चबाने पर तनाव में कमी होती है, और बढ़ती उम्र का असर भी कम होता है।

10  नकसीर - नकसीर फूटने की समस्या होने पर पीपल के ताजे पत्तों को तोड़कर उसकर रस निकालकर नाक में डालने से बहुत फायदा होता है। इसके अलावा इसके पत्तों को मसलकर सूंघने से भी नकसीर में आराम होता है।

11 फटी एड़ियां - एड़ियों के फटने की समस्या में भी पीपल आपकी काफी मदद करेगा। फटी हुई एड़ियों पर पीपल के पत्तों का दूध निकालकर लगाने से कुछ ही दिनों फटी एड़ियां ठीक हो जाती हैं और तालु नरम पड़ जाते हैं।

12 पीलिया - पीलिया हो जाने पर पीपल के 3-4 नए पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर बनाए गए शरबत को पीना बेहद फायदेमंद होता है। इसे 3-5 दिन तक दिन में दो बार देने से लाभ होता है।

13 हकलाना - पीपल के पके हुए फलों को सुखाकर बनाए गए चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से हकलाने की समस्या दूर होती है और वाणी में सुधार होता है।

दूर्वा
दूर्वा यानि घास के बारे पुराणों में बताया गया है कि इनमें अमृत बसा है। भगवान शिव और उनके पुत्र गणेश जी को दूर्वा बेहद पसंद है। भगवान शिव को दूर्वा अर्पित करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

1) नाक से खून निकलना : नाक से खून निकले तो ताजी व हरी दूर्वा का रस 2-2 बूंद नाक के नथुनों में टपकाने से नाक से खून आना बंद हो जायेगा।

2) मुंह के छाले : दूब के काढ़े से दिन में 3-4 बार गरारे करने से मुंह के छालों में लाभ पहुंचता है।
30 त्वचा के रोग: दूब के रस और सरसों के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर गर्म करें जब पानी उड़ जाए तो इस तेल को चर्म विकारों (चमड़ी के रोगों) पर दिन में 2-3 बार लगाने से लाभ होता है।

4) दाद, खाज-खुजली : हल्दी के साथ बराबर मात्रा में दूब पीसकर बने लेप को नियमित रूप से 3 बार लगाने से दाद, खाज-खुजली और फुंसियां ठीक हो जाती हैं।

5) खूनी बवासीर:
• तालाब के नजदीक की हरी दूब को मिट्टी के बर्तन में थोड़े पानी के साथ आंच पर चढ़ाकर उबालने से खूनी बवासीर का दर्द शान्त होता है।

• दूब के पत्तों, तनों, टहनियां और जड़ों को दही में पीसकर मस्सों व गुदा में लगायें और सुबह-शाम 1 कप की मात्रा में सेवन करें। इससे खूनी बवासीर में लाभ मिलेगा।

6) चोट से रक्तस्राव:

• चोट से खून निकलने पर दूब का लेप बनाकर लगाने से और पट्टी बांधने से रक्तस्राव (खून बहना) रुक जाता है और जख्म जल्द ही भर जाता है।

• कटने या चोट लगने से यदि रक्तस्राव (खून बहना) हो तो दूब को कूटकर उसका रस निकालकर उसमें कपड़े को भिगोकर चोट पर उस कपड़े को बांधने से खून का बहना बंद हो जाता है।

7) मानसिक रोग: शरीर में ज्यादा गर्मी, जलन, महसूस होने पर दूब का रस सारे शरीर पर लगाने से मानसिक रोग के कष्ट में आराम मिलता है।

8) सिर दर्द: जौ को 3 चम्मच दूब के रस में घोटकर सिर पर मलने से सिर दर्द दूर होता है।

9) मलेरिया बुखार: मलेरिया के बुखार में दूध के रस में अतीस के चूर्ण को मिलाकर दिन में 2-3 बार चटाने से, बारी से चढ़ने वाला मलेरिया बुखार में अत्यधिक लाभ मिलता है।

10) कामशक्ति की कमी: सफेद दूर्वा वीर्य को कम करती है और कामशक्ति को घटाती है।

11) बच्चों के रोग: बड़ी-बड़ी शाखाओं वाली दूब जो अक्सर कुंओं पर होती है। उसे छानकर उसमें 2-3 ग्राम बारीक पिसे हुए नागकेशर और छोटी इलायची के दाने मिलाकर, सुबह सूरज उगने से पहले उस बच्चे को जिसका तालू बैठ गया हो उसकी नाक में डालकर सुंघाने से तालू ऊपर को चढ़ जाती है। इसके सेवन से ताकत बढ़ती है। बच्चे दूध निकालना बंद कर देते हैं तथा बच्चों का दुबलापन (कमजोरी) समाप्त हो जाती है।

12) हिचकी: दूब का रस और 1 चम्मच शहद मिलाकर पीने से हिचकी आना बंद होती है।

13) पेशाब में जलन: 4 चम्मच दूब के रस को 1 कप दूध के साथ सेवन करने से पेशाब के जलन में लाभ मिलता है।

14) पेशाब उतरने में कष्ट: 10 ग्राम दूब की जड़ को 1 कप दही में पीसकर सेवन करने से पेशाब करते समय का दर्द दूर हो जाता है।

15) प्यास की अधिकता: हरी दूब का 2 चम्मच रस 3-4 बार सेवन करने से किसी भी रोग में प्यास दूर हो जाती है।

16) पथरी: दूब को जड़ सहित उखाड़कर उसकी पत्तियों को तोड़कर अलग कर लेते हैं फिर इसे पीसकर, इसमें स्वादानुसार मिश्री डालकर, पानी के साथ छान लेते हैं। इसे 1 गिलास की मात्रा में रोजाना पीने से पथरी गल जाती है और पेशाब खुलकर आता है। उपरोक्त प्रयोग चिकित्सक की देख रेख में करें। एक बार पुनः शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। 


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