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NEWS: खतरनाक साइंस, बच्चों के साथ पहले करते थे रेप, फिर इलेक्ट्रिक शॉक देकर मिटा देते थे याद, पढें खबर

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NEWS: खतरनाक साइंस, बच्चों के साथ पहले करते थे रेप, फिर इलेक्ट्रिक शॉक देकर मिटा देते थे याद, पढें खबर

डेस्‍क :-

द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद अमेरिका और सोवियत यूनियन के बीच शीत युद्ध यानी 'कोल्ड वॉर' शुरू हो चुका था. इस दौरान दोनों देशों की इंटेलिजेंस एजेंसियां कई खतरनाक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही थीं. इन प्रोजेक्ट्स का मकसद था ऐसी जानकारियां इकट्ठा करना, जिन्हें एक-दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सके. इसी मकसद से आम लोगों पर अमेरिका एक ऐसा प्रयोग कर रहा था, जिसके खुलासे से पूरी दुनिया कांप उठी थी. ये प्रयोग था-माइंड कंट्रोल.  आज खतरनाक साइंस की सीरीज में अमेरिका के उस खतरनाक एक्सपेरिमेंट के बारे में जानिए, जिसने आम इंसान को चलता-फिरता रोबोट बना दिया था

साल 1974 में न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक ऐसा खुलासा किया जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. यह खुलासा एक ऐसे प्रयोग को लेकर था जिसे अमेरिका की खुफिया विभाग सीआईए ने आम नागरिकों पर किया था. इस प्रयोग के दौरान कुछ ऐसे तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता था जिससे किसी भी इंसान के दिमाग पर पूरी तरह से काबू किया जा सके. इतना ही नहीं, लोगों के दिमाग को कंट्रोल करने के लिए सीआईए उन्हें एक ऐसा ड्रग देती थी, जिससे उनकी सोचने-समझने की शक्ति पूरी तरह से खत्म हो जाती थी

सीआईए ये प्रयोग सिर्फ जानकारियां इकट्ठा करने के लिए नहीं कर रही थी, बल्कि उसका असल मकसद अमेरिका को दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बनाने का था. यह सब एक खास प्रोजेक्ट के अतंर्गत हो रहा था, जिसका नाम था-'एमके अल्ट्रा'. इस माइंड कंट्रोल एक्सपेरिमेंट के दौरान कई तरह के टेक्नीक और ड्रग्स का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिनमें मुख्य था हिपनोसिस और एलसीडी ड्रग


 


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