खबरे NEWS: नगर में 1 दिवसीय हज तरबियत केंप का आयोजन सम्‍पन्‍न, पढें आशिष बैरागी की खबर MAHAKAAL: महाकाल मंदिर समिति का निर्णय, महाकाल को करीब से छूने का सभी को मिलेगा अवसर, पढें खबर और जानें क्‍या है प्‍लान WOW: मौसम सुहावना, प्री-मानसून में झमाझम....एक इंच से अधिक बरसा, पढें खबर BIG NEWS: शराब पीने के लिए रुपए नहीं दिए तो बदमाशों ने ढाबे में की तोडफ़ोड़, ढाबा मालिक को भी पीटा, पढें खबर NEWS: दस मिनट की बारिश जनजीवन अस्त व्यस्त, पढें खबर BIG REPORT: भारतीय रेलवे का बड़ा निर्णय, अब रेल अधिकारी करेंगे जनरल डिब्बे में यात्रा, पढें खबर OMG ! किन्नरों ने बोली ऐसी बात, सुनकर रेल अधिकारी भी रह गए हैरान, पढें खबर POLICE: पुलिस इकाईयों में साफ-सफाई अभियान प्रारंभ, बरसों से पुलिस थानों एवं चैकियों के मालखानों में जप्तशुदा मालों की सफाई हेतु 07 दिवसीय विशेष अभियान शुरू, पढें खबर BIG REPORT: चिकित्‍सालय में भर्ती होनें वालें मरीजों की संख्‍या पहुंची 40 के पार, मामला दूषित पानी पीनें का, पढें बद्रीलाल गुर्जर की खबर BIG NEWS: मंदिर से दर्शन कर लौट रही वृध्‍द महिला के साथ चैन स्‍नेचिंग की वारदात, ईलाकें में फैली दशहत, घटना सीसीटीवी कैमरें में कैद, पढें खबर WOW: नीमच के बेटे ललित यादव ने आल इंडिया प्रतियोगिता में नाम किया रोशन, 400 मीटर फ्री स्‍टाईल में प्रदर्शन कर हासिल किया गोल्‍ड मेडल, पढें खबर POLITICS: जिला के प्रभारी मंत्री और प्रदेश कृषि सहकारिता मंत्री का बडा बयान, बोले, 1 किसान, 2 कांग्रेस और 3 कमलनाथ, पढें खबर OMG ! महू-नीमच हाईवें पर फिर होनें लगी ट्रकों के साथ कटिंग की वारदात, उडा ले जातें है चलती ट्रक में भरा सामान, पढें खबर BIG NEWS: पीडि़तों के अन्याय की अर्जी पर जिले के थानाप्रभारियों की मनमर्जी, पढें खबर

Analysis: मैदानी तौर पर कमजोरी और अपनी ही योजनाओं को लोगों तक नहीं पहुंचा पाई कांग्रेस, पढें खबर

Image not avalible

Analysis: मैदानी तौर पर कमजोरी और अपनी ही योजनाओं को लोगों तक नहीं पहुंचा पाई कांग्रेस, पढें खबर

डेस्‍क :-

सिर्फ छह महीने पहले मध्यप्रदेश में सरकार बना चुकी कांग्रेस एग्जिट पोल में क्यों डूबती दिखाई दे रही है? प्रदेश में 29 लोकसभा सीटें हैं और एक्जिट पोल कांग्रेस के लिए 3 और ज्यादा से ज्यादा 8 सीटों पर आकर टिक गया है. अगर नतीजे सच साबित होते हैं तो ये कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होगा. माना जा रहा है कि प्रदेश मोदी लहर की चपेट में है लेकिन हार की उससे भी बड़ी वजह कांग्रेस की अपनी नाकामियां होंगी. सत्ता में काबिज होने के सिर्फ छह महीने बाद ही कांग्रेस ने चुनाव लड़ने और जीतने का जो ड्राइविंग फोर्स था, वह खो दिया

गांवों से भरोसा टूटा-

कांग्रेस अपने सबसे बड़े चुनावी अभियान 'अब होगा न्याय' और 72 हजार के सपने को ही वोटबैंक तक नहीं पहुंचा सकी. जमीनी स्तर पर इस गरीब हितैषी योजना की कोई आवाज नहीं थी. जबकि गरीबी सूचकांक में देखें तो मध्यप्रदेश देश में चौथे नंबर पर है. कांग्रेस मध्यप्रदेश में अपने ग्रामीण वोटबैंक के भरोसे ही लौटी थी लेकिन छह महीने में ही यह भरोसा टूटता दिखाई दिया

जमीनी तैयारी नहीं-

मोदी लहर से मुकाबला करने की कोई रणनीति या जमीनी तैयारी भी नहीं की गई थी. मध्यप्रदेश में कांग्रेस सत्ता में है लेकिन 0.1 फीसदी वोट भाजपा के पास ज्यादा है. यानी कांग्रेस बिलकुल किनारे पर बैठी हुई है. इसका कोई आभास चुनावी कैंपेन में नहीं दिखा. छह महीने पहले ही कांग्रेस ने भाजपा से 8.5 फीसदी वोटबैंक हथियाया था. यह वोट एससी, एसटी, किसान और कुछ हद तक सर्वणों के थे. लेकिन एग्जिट पोल के नतीजे बता रहे हैं कि यह वोट कुछ हद तक फिर से भाजपा की ओर लौटते दिखाई दे रहे हैं

किसान नाराज-

प्रदेश के किसानों का एक बड़ा तबका ऐसा था जिसने दो लाख रुपये की कर्ज माफी के कारण कांग्रेस का साथ दिया था. लेकिन चुनाव में यह कर्जमाफी ही कमलनाथ सरकार को भारी पड़ गई. कर्ज माफ नहीं होने के आरोप में सरकार बुरी तरह फंसी हुई दिखाई दी. सिर्फ छह महीने में ही कमलनाथ सरकार के मंत्रियों, विधायकों के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी का फैक्टर जोर पकड़ गया. खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में लोगों की नाराजगी और असंतोष दिखाई दे रहा था. इसी ग्रामीण इलाके के दम पर कांग्रेस ने प्रदेश में सरकार बनाई थी.सभी

दिग्गज चुनाव मैदान में

संगठन के मुद्दे पर बात करें तो पूरे चुनाव में कांग्रेस अप्रभावशाली दिखाई दी. मुख्यमंत्री रहते हुए कमलनाथ प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. वे संगठन और सरकार दोनों को चला रहे थे. प्रदेश प्रभारी के बतौर मध्यप्रदेश में काम कर रहे दीपक बाबरिया कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खास हैं. लेकिन वे बीमार होने के बाद पिछले दो महीनों से प्रदेश में नहीं हैं. कांग्रेस के बड़े नेता, जिन्हें अपने-अपने इलाके में चुनावी कमान दी जानी थी, वे सभी चुनाव लड़ रहे थे. स्वंय कमलनाथ अपने बेटे नकुलनाथ के साथ मैदान में थे. दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अजय सिंह, अरुण यादव पूरे समय अपने इलाकों में उलझे रहे

उम्मीदवार अपने दम पर लड़ा-

29 अप्रैल के बाद कमलनाथ, 12 मई के बाद दिग्विजय सिंह, सिंधिया अपने इलाकों से मुक्त हुए. कमलनाथ ने अपने मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्र में जिताने की जिम्मेदारी दे रखी थी. लेकिन तमाम नेता अपने-अपने आकाओं के क्षेत्र में ज्यादा सक्रिय दिखाई‌ दिए. जिसका साफ नुकसान उनके लोकसभा क्षेत्र में पड़ता दिखाई दे रहा है. नेता के बिना कार्यकर्ता मैदान नहीं पकड़ पाए और पूरा चुनाव उम्मीदवार कांग्रेस से ज्यादा अपनी ताकत के दम पर लड़ता दिखाई दिया. विधानसभा चुनाव में जिस तरह दिग्विजय सिंह और सीनियर लीडर्स की टीम कार्यकर्ताओं को चार्ज करने के लिए समन्वय का माहौल तैयार कर रही थी, वैसा इस बार नहीं था

निष्प्रभावी रहे पर्यवेक्षक-

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने अपने पर्यवेक्षक जरूर तैनात किए थे. इनमें से अधिकतर प्रदेश प्रभारी बाबरिया से जुड़े लोग थे. जिन्होंने विधानसभा में भी काम किया था. इस चुनाव में बाबरिया गैर मौजूद थे, इसलिए उनका पूरा नेटवर्क निष्प्रभावी साबित हुआ. संगठन के स्तर पर पूरी कमान ढीली रही

एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं-

कांग्रेस की मीडिया प्रभारी शोभा ओझा एग्जिट पोल के नतीजों को पूरी तरह नकारती हैं. वे मानती हैं कि प्रदेश में हम 15 से ज्यादा सीट जीत रहे हैं. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ग्राउंड लेवल पर जो मेहनत की है वह जबरदस्त है. हर छोटे कार्यकर्ता तक उनकी पहुंच रही. किसानों का कर्जमाफ हुआ है. आचार संहिता के कारण जो रुका था उसे भी अलग- अलग जगहों पर मतदान होते ही चालू कर दिया गया. यह नतीजे कांग्रेस के पक्ष में होंगे


SHARE ON:-

image not found image not found

© Copyright BABJI NEWS NETWORK 2017. Design and Developed By PIONEER TECHNOPLAYERS Pvt Ltd.