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OMG ! मानसून में थोड़ी-सी देरी हुई तो यहां आ सकती है पानी की समस्या, भटकना पड सकता है जनता को, पढें खबर

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OMG ! मानसून में थोड़ी-सी देरी हुई तो यहां आ सकती है पानी की समस्या, भटकना पड सकता है जनता को, पढें खबर

नागदा :-

नागदा. चंबल नदी के बांध में अभी भी करीब 39 एमसीएफटी पानी भरा हुआ है, जो 30 जून तक ग्रेसिम उद्योग के संचालन और नागदा-खाचरौद एवं रेलवे यात्रियों की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त है, लेकिन परेशानी की बात यह है कि अगर मानसून ने अपने निर्धारित समय पर दस्तक नहीं दी और अच्छी बारिश नहीं हुई तो 30 जून के बाद शहर में पीने का पानी का संकट खड़ा हो जाएगा। हालांकि ग्रेसिम उद्योग के पास टकरावदा एवं जलवाल तालाब का अतिरिक्त पानी तो है, लेकिन मुश्किल यह है कि इस पानी का उपयोग उद्योग की उत्पादन प्रक्रिया में तो किया जा सकता हैं मगर पेयजल के लिए यह पानी उपयुक्त नहीं है। ऐसे मे संभावित पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रशासन भी सतर्क हो गया है और उसने 30 जून के बाद बनने वाली स्थिति से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी है, जिसके लिए एसडीएम आरपी वर्मा ने नगरपालिका और पीएचई को क्षेत्र के ऐसे जलस्त्रोतों को चयनित कर सूची बनाने के निर्देश जारी किए है। जो निजी होकर वर्तमान में जिंदा यानी पानी मौजूद है, जिसमें कुएं, बावड़ी, ट्यूबवेल आदि सम्मलित है। एसडीएम वर्मा का कहना है कि जलसंकट की स्थिति में इन निजी जलस्त्रोतों का अधिग्रहण किया जा सकता है।

नपा की दो टूक-

जलसंकट की स्थिति बनी तो सबसे बड़ी परेशानी ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन की होगी। कारण नगर पालिका अध्यक्ष पहले ही कह चुके है कि शहर को पर्याप्त मात्रा में पानी देने के जवाबदारी ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन की है। नगर पालिका अपनी जलापूर्ति में कटौती नहीं करेगी। अगर पानी की कमी है तो ग्रेसिम प्रबंधन अपनी मशीनों को बंद कर मेटेंनेस का कार्य शुरू कर सकता है। बता दें कि संभवत: नागदा ही प्रदेश का एक मात्र ऐसा शहर है जहां की नगर पालिका दोनों समय जलप्रदाय करती है, जिसमें करीब एक करोड़ लीटर पानी की खपत प्रतिदिन हो रही है।

दो एमसीएफटी पानी की रोज होती है खपत-

जलवाल व टकरावदा तालाब के पानी को छोड़ दें तो वर्तमान में चंबल के बांध क्रमांक एक और दो में करीब 39 एमसीएफटी पानी शेष बचा हुआ है। इसी पानी से ग्रेसिम उद्योग का संचालन एवं नागदा-खाचरौद व रेलवे की जलापूर्ति में करीब दो एमसीएफटी पानी प्रतिदिन की खपत हो रही हैं। इस हिसाब से चंबल में अभी 19 दिन का पानी शेष बचा हुआ हैं। जो 30 जूून तक के लिए तो पर्याप्त है, लेकिन परेशानी की बात यह है कि 30 जून के बाद भी मानसून क्षेत्र में नहीं पहुंचा और पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिन शहरवासियों के लिए भयावह हो सकते है, जो प्रशासन के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

नपा के पास 300 से ज्यादा जलस्रोत-

हालांकि शहर की जलापूर्ति पूरी तरह से चंबल नदी के पानी पर निर्भर है, लेकिन जलसंकट की स्थिति में नगर पालिका के पास भी अपने जलस्त्रोत है जो शहर के सभी 36 वार्डो में मौजूद है। मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान में नगर पालिका के पास करीब 176 ट्यूबवेल और 139 हैंडपंप है, जिनका उपयोग जलसंकट की स्थिति में किया जा सकता है। अच्छी बात यह है कि वर्तमान यह सभी ट्यूबवेल और हैंडपंप चालू स्थिति में बताए जा रहे है।

जलसंकट जैसी कोई बात नहीं है। हमारे पास 30 जून तक का पानी उपलब्ध है। बावजूद इसके जलसंकट खड़ा होता है तो प्रशासन ने इससे निपटने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है। नगर पालिका और पीएचइ विभाग को निजी जल स्त्रोतों की जानकारी एकत्रित करने के निर्देश दिए गए है, ताकि समय आने पर इनका अधिग्रहण किया जा सकें। किसी भी परिस्थिति में जलसंकट नहीं होगा।- आरपी वर्मा, एसडीएम नागदा


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