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NEWS: कांठल की धरा पर बगुलों का गूंज रहा कलरव, पढें खबर

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NEWS: कांठल की धरा पर बगुलों का गूंज रहा कलरव, पढें खबर

प्रतापगढ़ :-

प्रतापगढ़.इन दिनों मानसून शुरु होने के साथ ही कई स्थानों पर पेड़ पर बगुलों ने अपने आशियाने बना लिए है। इससे सुबह से शाम तक दिनभर बगुलों का कलरव गूंज रहा है। जुलाई-अगस्त का समय केटल इग्रेट (गाय बगुला) के लिए प्रजनन का रहता है। ऐसे में इन पेड़ों पर घोंसले बनाए गए है। जहां बगुलों की अठखेलियां देखी जा सकती है। गौरतलब है कि यह समूह में रहकर ऊंचाई वाले कंटीले और विशेषकर बबूल के पेड़ों पर अपने घोंसले बनाते है। जिले में गांवों और खेतों पर पेड़ों पर बगुले के घोंसले बने हुए है। खेतों में इनकी गतिविधियों देखी जा सकती है।

होते है कृषकों के होते है मित्र- 

केटल इग्रेट का भोजन मुख्यत: कीट, छोटे रेंगने वाले जीव होते है। खेतों में सिंचाई, हंकाई, मवेशियों के विचरण करने के दौरान इस प्रकार के कीट जमीन से बाहर निकलते है, इन कीटों का भक्षण करने के कारण किसानों के दोस्त भी कहे जाते है।

कंटीले पेड़ होते है सुरक्षित ठिकाने-

गौरतलब है कि मानसून काल में बगुले प्रजनन करते है। सुरक्षा के कारण यह अक्सर बबूल, कांटेदार पेड़ों पर समूह में घोंसले बनाते है। जिससे मांसाहारी पक्षी औ अन्य जीवों से इनके अंडे और बच्चे की सुरक्षा हो जाती है। मादा इग्रेट एक बार में अमुमन दो से तीन अंडे देते है।पक्षीविद् देवेन्द्र मिस्त्री ने बताया कि रात्रि में यह अक्सर एक ही पसंदीदा पेड़ों पर समूह के रूप में एक ही विश्राम करते है।बार-बार उसी जगह पर आते है। 

इसलिए नाम है केटल इग्रेट-

बगुले की यह प्रजाति केटल इग्रेट नाम से जानी जताी है। इसका कारण यह है कि ये खेतों, बीड़ आदि स्थानों पर मवेशियो के साथ विचरण करते रहते है। इन मवेशियों के चलने के दौरान कीट, छोटे जीव आदि जमीन से बाहर निकलते है। इनका भक्षण बगले करते है।इस कारण इस बगुले को को केटल इग्रेट कहा जाता है। 

बगुले है किसानों के मित्र, करें संरक्षण-

केटल इग्रेट किसानों का दोस्त होता है। जो खेतों में निकलने वालें कीटों का भक्षण करता है।इसका हमें संरक्षण करना चाहिए। अभी मानसून के बाद इसका प्रजनन काल चल रहा है। अभी पेड़ों पर आशियाने बना रखे है। जहां अभी चूजे निकल रहे हैं।


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