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OMG ! चित्‍तौडगढ सहित पूरें संभाग में मक्‍का की फसल पर नए कीटों का हमला, अब किसान हों रहें परेशान, पढें खबर

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OMG ! चित्‍तौडगढ सहित पूरें संभाग में मक्‍का की फसल पर नए कीटों का हमला, अब किसान हों रहें परेशान, पढें खबर

चित्तौडग़ढ़ :-

चित्तौडग़ढ़, सहायक निदेशक कृषि विस्तार डॉ. शंकरलाल जाट के नेतृत्व में चार दिन पहले एक टीम ने गोपालपुरा व सेमलपुरा आदि इलाकों में मक्का की फसल का निरीक्षण करने के दौरान नए कीट को देखा था। इसके बाद संयुक्त निदेशक कृषि भीलवाड़ा व उप निदेशक कृषि विस्तार चित्तौडग़ढ़ को कीट एवं प्रभावित पौधों के नमूने भेजे थे। बुधवार को महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर व कृषि महाविद्यालय भीलवाड़ा से वरिष्ठ कीट वैज्ञाानिक डॉ. किशन जीनगर, वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक प्रोफेसर दिलीप सिंह, कीट वैज्ञानिक डॉ. मनोज महेला, भूपेन्द्र सिंह राठौड़, उप निदेशक कृषि (विस्तार) चित्तौडग़ढ़, डॉ. शंकर सिंह राठौड़ सहायक निदेशक भीलवाड़ा, डॉ. शंकर लाल जाट सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) चित्तौडग़ढ़, ने सहायक कृषि अधिकारियों व कृषि पर्यवेक्षकों के साथ चित्तौडग़ढ़ जिले के पुलामगरा (बड़ीसादड़ी), जलिया, कल्याणपुरा (निम्बाहेड़ा), गोपाल नगर, सेमलपुरा, बस्सी, गंगरार, दुगार, पारसोली (बेंगू), कपासन, भूपालसागर आदि क्षेत्रों का दौरा कर खेतों में मक्का की फसल का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान पुला मंगरा में किसान निर्भयराम व कन्हैयालाल धाकड के खेत में मक्का की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप होने की पुष्टि की। इसी तरह निम्बाहेड़ा में किसान रामप्रसाद, सेमलपुरा में देवीलाल धाकड़ के खेत पर इस कीट का प्रकोप पाया गया।

एक बार में दो सौ अण्डे-

मक्का परियोजना प्रभारी डॉ. दिलीप सिंह व कीट वैज्ञानिक डॉ. महला ने बताया कि इस कीट की व्यस्क मादा मौंथ पौधों की पत्तियों और तनों पर अण्डे देती है। एक मौथ एक बार में 50 से 200 अण्डे देती है। मादा अपने जीवन काल में 10 बार यानी 1200 से 2000 तक अण्डे दे सकती है। ये अण्डे तीन से चार दिन में फूट जाते है। इनमें से जो लार्वा निकलते है वो 17-22 दिन तक इस अवस्था में रहते है। कीट के लार्वा की तीसरी अवस्था तक इसकी पहचान मुश्किल है, लेकिन चौथी अवस्था में लार्वा के सिर पर अंग्रेजी के उल्टे वाई आकार का सफेद निशान दिखाई देता है। इसके पीछे वाले हिस्से पर गहरे रंग के चार बिन्दु वर्गाकार आकृति में देखे जा सकते हैं । लार्वा पौधों पत्तियों को खुरचकर खाता हैं जिससे पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देती हैं । पत्तियों पर बडे गोल - गोल छिद्र नजर आते है। लार्वा का मल भी पौधों की पत्तियों पर नजर आता हैं। इसका प्यूपा गहरे भूरे काले रंग का होता है। प्यूपा से कीट नर व मादा मौंथ बनते है।

बहु फसल भक्षी है फॉल आर्मी वर्म-

यहां पहुंचे वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कीट बहु फसल भक्षी कीट है। इसकी समय पर पहचान एवं प्रभावी निंयत्रण जरूरी हैं अन्यथा आने वाले समय में फसलोंं की भारी तबाही संभव है। वैज्ञानिकों के अनुसार अभी इस कीट के लार्वा की तीसरी स्टेज पाई गई है।

ऐसे होगा नियंत्रण-

वैज्ञानिकों ने इस इस कीट पर नियंत्रण के लिए ईमामेक्टीन बेन्जोएट 5 एस जी 0.4 ग्राम/ लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करने की सलाह दी है। इसके अलावा स्पाइनोसेड 45 एस.सी. 0.3 मी.ली./लीटर पानी या क्लोरेनथ्रानीलीप्रोल 18.5 ए.सी. 0.4 मी.ली /लीटर पानी में मिला कर फसल पर छिड़काव करने को कहा गया है। वैज्ञानिकों ने इसके मौथ को भी प्रकाशपोश लगाकार नष्ट करने की सलाह दी है । इसके मौथ एक रात में 100 किलोमीटर तक की दूरी तय कर संक्रमण फैलाते है।

भारत में पिछले साल पहली बार दिखा था फॉल आर्मी वर्म-

सहायक निदेशक कृषि विस्तार डॉ. जाट ने बताया कि भारत में फॉल आर्मी वर्म कीट सबसे पहले जून २०१८ में कर्नाटक के शिवमोगा जिले में देखा गया था। कृषि महाविद्यालय उदयपुर के कीट विज्ञान विभाग के सर्वे में रबी २०१८ में महाविद्यालय क्षेत्र में देखा गया था।


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