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HEALTH: हेपटाइटिस, अगर हम होशियार तो यह खतरनाक नहीं

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HEALTH: हेपटाइटिस, अगर हम होशियार तो यह खतरनाक नहीं

डेस्‍क :-

 

हेपटाइटिस का नाम लेते कुछ डर-सा लगता है, लेकिन सच यह है कि अगर हम होशियार रहें तो यह उतना खतरनाक नहीं है। विशेषज्ञों से बात कर जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती 

क्या है हेपटाइटिस

सामान्य शब्दों में इसे लिवर में हेपटाइटिस वाइरस (HBV) का इन्फेक्शन कह सकते हैं। यह वाइरस खून, असुरक्षित सेक्स, दूसरों के इस्तेमाल की गई सूई से फैलता है और हां, मां से उसके नवजात बच्चे में भी। चूंकि यह वाइरस सीधे लिवर पर हमला करता है और इस वजह से लिवर में सूजन आ जाती है, इसलिए बीमारी को हेपटाइटिस नाम दिया गया। 

कितनी तरह की हेपेटाइटिस 
-A, B, C, D, E और G 
-इनमें A और B सबसे कॉमन हैं। 
-A और E ज्यादा खतरनाक नहीं होते। 
-B और C सबसे खतरनाक होते हैं और इन्हें क्रॉनिक हेपटाइटिस माना जाता है। 
-D कभी भी अकेला नहीं रहता। यह हमेशा B के साथ ही ऐक्टिव होता है। 
- हेपटाइटिस A और B के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन हेपटाइटिस C के लिए नहीं। 
-हेपटाइटिस E और G के मामले बहुत कम होते हैं। 

हेपटाइटिस के लक्षण 
-जोड़ों और पेट में दर्द, उलटी और कमजोरी 
-हमेशा थकान रहना 
-बुखार आ जाना और यूरिन का रंग गाढ़ा होना 
-भूख कम लगना 
-त्वचा पीली पड़ना और आंखों का सफेद हिस्सा भी पीला पड़ना 
-पेशाब का रंग पीला होना 

नोट: सामान्य फीवर और हेपटाइटिस के लक्षणों में कुछ खास फर्क होता है। मसलन, सामान्य बुखार में पेट दर्द, पेशाब का पीला होना जैसे लक्षण नहीं आते जबकि हेपेटाइटिस में ये खास लक्षण होते हैं। ऐसे लक्षण किसी दूसरी बीमारी में भी हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर से जरूर सलाह लें। 

हेपटाइटिस के टेस्ट 
अगर ऊपर के लक्षण हैं तो सबसे पहले लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) करवाया जाता है। इससे यह पता चलता है कि लिवर सही ढंग से काम कर रहा है या नहीं। अगर लिवर फंक्शन में कोई समस्या दिखती है तो फिर वाइरस की पहचान के लिए टेस्ट करवाया जाता है। LFT का खर्च 500-1200 रुपये होता है। 
रिपोर्ट: ब्लड सैंपल सुबह देने पर शाम तक या दूसरे दिन रिपोर्ट मिल जाती है। 

इतना खतरनाक क्यों 
इसकी सबसे बड़ी वजह है कि इसका इन्फेक्शन साइलेंट होता है। कई बार लोगों को इन्फेक्शन होता है, लेकिन उन्हें साल, दो साल तक पता नहीं चलता। इस वाइरस की वजह से कभी-कभी लिवर कैंसर भी हो सकता है। 

कितनी तरह के हेपटाइटिस B 
1. एक्यूट हेपटाइटिस बी: इसका इन्फेक्शन 6 महीने तक रह सकता है। हेपटाइटिस B पैनल टेस्ट से इसके बारे में पता चल जाता है। 
2. क्रॉनिक हेपटाइटिस B: अगर ब्लड में हेपटाइटिस बी का वाइरस 6 महीने से ज्यादा समय से हो तो उसका इलाज क्रॉनिक हेपटाइटिस बी के रूप में किया जाता है। यह ज्यादा खतरनाक है। 

कैसे फैलता है 
-संक्रमित ब्लड दूसरे शख्स के शरीर के ब्लड से संपर्क होने पर 
-संक्रमित शख्स के साथ असुरक्षित सहवास करने से 
-सूई जैसी चीजें जिन पर खून लगने का अंदेशा हो, उसे दोबारा इस्तेमाल करने पर अगर पहला शख्स संक्रमित हो 
-मां से उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को 
-ऐसे हॉस्पिटल या ब्लड बैंक से ही खून लें, जहां तरीके से चेक करने के बाद ही खून लिया जाता हो 
-टैटू लगवाने के दौरान 
-दांत का इलाज कराने के दौरान इन्फेक्टेड इक्वेपमेंट्स इस्तेमाल करने से 
नोट: यह छूने से नहीं फैलता और न ही हवा, छींकने से, खांसी या टॉयलेट की सीट इस्तेमाल करने से 

वैक्सीन लगाने की जरूरत 
-वैक्सीन सभी बड़ों को लगवाने की जरूरत नहीं, हालांकि कुछ डॉक्टर सभी को वैक्सीन लगाने की सलाह देते हैं। 
-सभी नवजात (1 साल तक के बच्चे) को लगवाना जरूरी 
-मेडिकल फील्ड और पब्लिक सेफ्टी के लिए काम करने वाले लोगों को 
-जिनकी किडनी खराब हो और डाइलिसिस होता हो 
-जिन्हें बार-बार अपना खून बदलवाना पड़ता हो 
-प्रेग्नेंसी के दौरान nड्रग्स लेने वाले या जिन्होंने पहले ड्रक्स लिया हो 
-शरीर पर टैटू बनवाने वाले लोग nअसुरक्षित सेक्स किया हो तो 
-जिनकी फैमिली में हेपटाइटिस बी किसी को पहले या अभी हुआ हो 
-अगर किसी को यह वैक्सीन पहले लग चुका है तो उसे नहीं लगवाना चाहिए। 

कितना सुरक्षित है वैक्सीन 
हेपटाइटिस B वैक्सीन असरदार है। दरअसल, यह वैक्सीन कैंसररोधी है। यह बीमार शख्स में लिवर कैंसर होने से रोकता है। दुनिया में 80 फीसदी से ज्यादा लिवर कैंसर के मामले हेपटाइटिस B की वजह से ही होते हैं। 

नोट: अगर किसी को पहले यह वैक्सीन लग चुका है, लेकिन उसे ठीक से याद नहीं तो सबसे पहले उसे डॉक्टर की सलाह से ब्लड टेस्ट (anti-HBs) करवाना चाहिए। वैसे दोबारा लेने से कोई नुकसान नहीं होता। 

हेपटाइटिस A 
हेपटाइटिस A क्रॉनिक (जो बीमारी लंबे समय तक रहे) नहीं, एक्यूट (ऐसी बीमारी जो कम समय तक रहे यानी कम खतरनाक) है। यह लिवर को अमूमन नुकसान नहीं पहुंचाता। 
वैक्सीन- 
बच्चों में: 18 से 20 महीने की उम्र में 
खर्च: 2000 से 2500 (पेनलेस) 
सामान्य: 400 से 600 
बड़ों में: शरीर में हेपेटाइटिस A के लिए एंटीबॉडी कम होने पर डॉक्टर के कहने पर। 
खर्च: 2000 से 2500 (पेनलेस) 
सामान्य: 400 से 600 

टेस्ट :Hepatitis A IgM खर्च: 200-300 

बचाव: हेपटाइटिस A गंदे खानपान से फैलता है, इसलिए साफ खानपान जरूरी है। 

हेपटाइटिस C 
सी वायरस का इन्फेक्शन होने के करीब डेढ़ से दो महीने बाद लक्षण नजर आते हैं। जिन मामलों में एक महीने से चार महीने में लक्षण नजर आ जाते हैं, उन्हें एक्यूट कहा जाता है। इन्फेक्शन को छह महीने से ज्यादा हो जाए तो वह क्रॉनिक कहलाता है। ऐसा होने पर मरीज के पूरी तरह ठीक होने के आसार कम हो जाते हैं। हालांकि क्रॉनिक के मामले कम ही होते हैं। जिनको बचपन में यह इन्फेक्शन होता है, ज्यादातर उन्हीं में बड़े होने पर क्रॉनिक हेपटाइटिस होता है। 
टेस्ट: HCV RNA खर्च: 5000-6000 रुपये 
नोट: हेपटाइटिस सी की वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। 
(खर्च में कमी-बेशी मुमकिन है।) 

प्रेग्नेंसी और हेपटाइटिस 
मां को अगर हेपटाइटिस है तो बच्चे के भी इससे पीड़ित होने की आशंका रहती है। प्रेग्नेंसी के दौरान सही इलाज न हो तो महिला को ब्लीडिंग हो सकती है और बच्चे व महिला, दोनों की जान जा सकती है। अगर मां को पहले से मालूम है कि उसे हेपटाइटिस है तो उसे डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए। जिन महिलाओं को हेपटाइटिस बी का टीका लगा है, उन्हें भी प्रेग्नेंसी के दौरान जांच करानी चाहिए। जन्म के बाद भी बच्चे को टीका लगाकर बीमारी से बचाया जा सकता है। 

क्या है पीलिया 
मां को अगर हेपटाइटिस है तो बच्चे के भी इससे पीड़ित होने की आशंका रहती है। प्रेग्नेंसी के दौरान सही इलाज न हो तो महिला को ब्लीडिंग हो सकती है और बच्चे व महिला, दोनों की जान जा सकती है। अगर मां को पहले से मालूम है कि उसे हेपटाइटिस है तो उसे डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए। जिन महिलाओं को हेपटाइटिस बी का टीका लगा है, उन्हें भी प्रेग्नेंसी के दौरान जांच करानी चाहिए। जन्म के बाद भी बच्चे को टीका लगाकर बीमारी से बचाया जा सकता है। 

हेल्दी लिवर के 7 टिप्स 
-सुबह एक गिलास गुनगुना पानी और दिन में कम से कम 2 लीटर गुनगुना या सामान्य साफ पानी पिएं। 
-शराब न पिएं। सेल्फ मेडिकेशन (डॉक्टर से बिना पूछे, खुद से दवाई लेना) न करें। 
-नीबू, ग्रीन टी, फलों का जूस (स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी) आदि पिएं। 
-सात या पंद्रह दिनों पर किसी दिन जूस उपवास रखने से लिवर को फायदा होगा। 
-प्रोसेस्ड फूड जिनमें बहुत ज्यादा प्रिजर्वेटिव, फैट्स और कॉलेस्ट्रॉल हों, खाने से बचें। मसलन, फास्ट फूड, डीप फ्राइड फूड आदि न खाएं। 
-हरी साग-सब्जियां (करेला, सरसों का साग, पालक) आदि को खाने में शामिल करें। 
-लहसुन और अखरोट को भी डाइट में शामिल करें। 

एक्सपर्ट्स पैनल 
-डॉ. एस. के. सरीन डायरेक्टर, द इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलयरी साइंस 
-डॉ. के. एन. सिंगला, एचओडी एंड सीनियर कंसल्टेंट, गेस्ट्रोइंटेरॉलजी, मैक्स 
-डॉ. (कर्नल) वी. के. गुप्ता, स्पेशलिस्ट, गेस्ट्रोइंटेरॉलजी एंड हेपटॉलजी 
डॉ. संदीप गर्ग, डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज 


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