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HEALTH: आपके घर के पानी से पता चलेगी आपकी बीमारी

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HEALTH: आपके घर के पानी से पता चलेगी आपकी बीमारी

डेस्‍क :-

आपकी बीमारी का पता लगाने के लिए AIIMS अब आपके घर में पीने के पानी की भी जांच करेगा। पर्यावरण में मौजूद हेवी मेटल्स की वजह से होने वाली बीमारी का पता लगाने के लिए AIIMS ने यह पहल की है। इसके लिए दुनिया में अपनी तरह की पहली क्लिनिकल इकोटॉक्सिकोलॉजी फैसिलिटी की शुरुआत की गई है। 
ब्लड और यूरिन के साथ घर के पानी की भी होगी जांच 
पर्यावरण में मौजूद हेवी मेट्ल्स में आर्सेनिक, मर्करी, लेड, कैडियम, यूरेनियम, आयरन जैसे जहरीले तत्व हैं, जो कैंसर, किडनी, हार्ट से जुड़ी बीमारियों की वजह है। लेकिन अभी तक यह जानने के लिए जांच नहीं हो पाती थी। अब एम्स में ऐसे मरीजों के ब्लड और यूरिन की जांच के साथ उनके घर के पानी की भी जांच की जाएगी और यह पता लगाने की कोशिश होगी कि पानी में कोई हेवी मेटल तो नहीं है। शुक्रवार को एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने इसकी शुरुआत की। 

इकोटॉक्सिकोलॉजी जांच पर होगा मुख्य फोकस 
इस बारे में डॉक्टर ए. शेरिफ ने लेसेंट का हवाला देते हुए कहा कि नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज की मुख्य वजह पर्यावरण में मौजूद हेवी मेटल्स हैं, चाहे प्रदूषित पानी हो, प्रदूषित हवा या मिट्टी। अभी तक हमें यह पता नहीं चल पाता था कि बीमारी की क्या वजह है। उन्होंने कहा कि एम्स में इलाज के लिए आने वाले ऐसे मरीज की बीमारी को लेकर अगर डॉक्टर को लगेगा कि बीमारी की वजह का पता लगाने के लिए इकोटॉक्सिकोलॉजी जांच होनी चाहिए तो वह मरीज को हमारे पास रेफर करेंगे। हम उनके ब्लड और यूरिन की जांच करेंगे और जानने की कोशिश करेंगे कि ब्लड में किस प्रकार का टॉक्सिक है। लेकिन इसके अलावा हम मरीज के घर का पानी मंगा कर जांच करेंगे कि जो पानी वो पी रहे हैं उसमें कहीं कोई हेवी मेटल तो नहीं है। आमतौर पर यह जांच नहीं हो पाती थी और मरीज की बीमारी का पता नहीं चल पाता था। लेकिन अब यह संभव हो पाएगा। 

परिवार के बाकी लोग बच जाएंगे बीमारी से 
डॉक्टर जावेद ए कादरी ने बताया कि इससे न केवल उस मरीज को बचाया जा सकेगा बल्कि उनके परिवार के बाकी लोगों को भी उस बीमारी से निजात मिलेगी। हम उनकी काउंसलिंग करेंगे, ताकि वह प्रदूषित पानी वे लोग न पिएं। इससे परिवार के बाकी लोगों को भी फायदा होगा। डॉक्टर जावेद ने बताया कि कई ऐसी बीमारी है जिसके बारे में हमें पता नहीं है कि क्यों होती है, चाहे बच्चों में होने वाली हार्ट की बीमारी हो, क्रॉनिक किडनी डिजीज, कैंसर, एपिलेप्सी, ऑटिज्म, हाइपरटेंशन आदि। 


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