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NEWS: भूकंप जैसा मंजर दिखा सेसड़ी में, कुछ नही बचा ग्रामीणों के पास, पांच दिन बीतने के बाद भी प्रशासन ने नही ली अभी तक सुध, अनाज तक नही पहुंचा ग्रामीणों के पास, कांग्रेस नेताओं के समक्ष ग्रामीणों ने जताई नाराजी, पढें खबर

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NEWS: भूकंप जैसा मंजर दिखा सेसड़ी में, कुछ नही बचा ग्रामीणों के पास, पांच दिन बीतने के बाद भी प्रशासन ने नही ली अभी तक सुध, अनाज तक नही पहुंचा ग्रामीणों के पास, कांग्रेस नेताओं के समक्ष ग्रामीणों ने जताई नाराजी, पढें खबर

नीमच :-

पिपलिया स्टेशन (जेपी तेलकार)। तहसील के अंतिम छोर पर बसे गांव सेसड़ी बंजारा व सेसड़ी राजपूत में बाढ़ का पानी घुसने से तबाही मच गई थी, अभी भी लोगों के समान मकानों के नीचे दबे हुए है, जिधर देखो, उधर मकान गिरे हुए है, जैसे कोई भूकंप आया हो, वैसी स्थिति इन दोनों गांव की बनी हुई है, लेकिन प्रशासन की ओर से इन लोगों को अभी तक कोई मदद नही की गई। ग्रामीणों ने बताया बाढ़ आने के दौरान वे तो गांव छोड़कर पास के चले गए, इस दौरान उनका अनाज व बर्तन भी नाव में सवार होकर आए चोर, चोरी कर ले गए। गुरुवार को गांव पहंुचे प्रदेश कांग्रेस महामंत्री श्यामलाल जोकचन्द्र व कांग्रेस पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष दीपकसिंह चौहान के समक्ष ग्रामीणों ने अभी तक सरकार से मदद नही मिलने पर नाराजी जताई। ग्रामीणों का कहना था 14 सितम्बर को गांव में गांधीसागर का पानी भरने लगा था, सभी घर धराशाही हो गए, लोगों के खाने-पीने का राशन तक नही बचा, छह दिन बीतने के बाद भी अभी तक कोई अधिकारी या पटवारी गांव नही पहंुचा। 125 घरों में से केवल एक दो पक्के मकान बचे, बाकी सब बाढ़ के पानी से गिर गए। बाढ़ का पानी उतरने के बाद केवल 7 परिवारों को दिखावे के रुप में 50-50 किलो अनाज मिला था। छोटी मंशाखेड़ी, खड़पालिया, गायरीखेड़ा, मंशाखेड़ी, गरनई, टिडवास, ढ़ाणी, हिंगोरिया बड़ा, रायसिंह पिपलिया, खेड़ा, खंूटी आदि गांव के लोगों की भी बाढ़ के पानी के घुसने से नींदें उड़ गई थी, इन गांवों में कच्चे मकान गिरे है। तीन गांव के लोगों ने बताया कि वह कई वर्षों से प्रशासन से अन्यत्र विस्थापित करने की मांग कर रहे है, लेकिन उन्हें विस्थापित नही किया गया, पानी के साथ ही जहरीले जीव-जंतुओं का भी भय बना रहता है। गांव छोटी मंशाखेड़ी के ग्रामीणों ने बताया 2006 में गांव के करीब तक पानी आया था, लेकिन इस बार तो गांधी सागर का पानी गांव में घुस गया, आधे घर डूब गए, अनाज खराब हो गया। गांव टापू बन गया था, चारों और पानी ही पानी था। दोपहर में बाढ़ का पानी घुसा, शाम तक हमें गांव खाली कर जाना पड़ा। हमने प्रशासन से गांव से बाहर विस्थापित करने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नही हुई, गनीमत रही कि बाढ़ दिन में आई, रात्रि में अगर बाढ़ आती तो सभी बह जाते। गांव सेसड़ी बंजारा के सदाराम, कैलाश, सुरेश, रणजीत, पप्पू, कैलाश, बापू, भावसिंह, वकील, राहुल ने बताया बाढ़ का पानी गांव में गांव में घुसने से सब तबाह हो गया है। 10 फिट पानी भर गया, मकान गिर गए, सब सामान अभी तक नीचे दबे हुए है, लेकिन कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि गांव नही पहंुचा। इसी तरह पास के सेसड़ी राजपूत के भी यही हाल है, गांव की महिला भंवरकंुवर राजपूत, तंवरसिंह राजपूत, हिम्मतसिंह, मनोहरसिंह का कहना था अब कुछ नही बचा है, पानी से भीगा अनाज भी सड़ गया है, जो बदबू मार रहा है, बर्तन व अन्य सामान भी नाव में सवार होकर आए चोर ले गए। अब शासन से ही आस है, लेकिन अभी तक कोई सुध लेने वाला नही है। दोनों गांव के 125 परिवार के घर पूरी तरह टूट गए है, बाढ़ उतरने के बाद मात्र 8 परिवारों को दिखावे के तौर पर 50-50 किलो अनाज दिया, बाकी परिवारों को कोई मदद नही दी गई। ग्रामीणों ने गांव पहंुचे कांग्रेस नेता जोकचन्द्र व चौहान के समक्ष भी शासन-प्रशासन द्वारा कोई मदद नही दी जाने पर नाराजी जताई। नेताओं ने बाढ़ पीड़ितों को भरोसा दिलाया कि वे शासन से जितनी अधिक मदद हो सके एसे प्रयास कर रहे है, साथ ही ग्रमाीणों को अन्यत्र विस्थापित करने के लिए प्रयासरत है। साथ ही ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि उन्हें गांव से बाहर स्थापित किया जाए, ताकि भविष्य में भी इस तरह की परेशानी से बचा जा सके। इस अवसर पर हेमराज डांगी, रामदयाल धनगर, दशरथ गरासिया, राधेश्याम सूर्यवंशी, महेश पोरवाल आदि उपस्थित थे। 


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