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NEWS: दिपावाली पर गणेश पूजन में सूंड का रखे विशेष ध्यान, नहीं तो चली जाती है महालक्ष्मी, पढें खबर

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NEWS: दिपावाली पर गणेश पूजन में सूंड का रखे विशेष ध्यान, नहीं तो चली जाती है महालक्ष्मी, पढें खबर

रतलाम :-

रतलाम। आगामी 27 अक्टूबर को देश व दुनिया में महालक्ष्मी पूजन दिवाली पर किया जाएगा। महालक्ष्मी पूजन के पूर्व हर घर में भगवान गणपति की पूजन होती है। भगवान श्री गणेश की सूंड दायीं तरफ हो या बाईं तरफ यह सवाल किया जाता है। अक्सर श्री गणेश की प्रतिमा लाने से पूर्व या घर में स्थापना से पूर्व यह सवाल सामने आता है कि श्री गणेश की किस तरफ सूंड होनी चाहिए, दिवाली पर महालक्ष्मी पूजन के समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए, नहीं तो महालक्ष्मी घर से चली जाती है। ये बात उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषी दयानंद शास्त्री ने रतलाम में भक्तों को दिवाली पूजन में गणपति या गणेश पूजन में सूंड की दिशा के बारे में बताते हुए कही।

ज्योतिषी दयानंद शास्त्री ने बताया कि गौरीनंदन श्री गणेश जी विघ्न विनाशक हैं। इनका जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय हुआ था। ये शिव और पार्वती के द्वितीय पुत्र हैं। भगवान गणेश का स्वरूप अत्यन्त मोहक व मंगलदायक है। वे एकदंत और चतुर्भुज हैं। अपने चारों हाथों में वे पाश, अंकुश, मोदक तथा वरमुद्रा धारण किए हुए हैं। वे रक्तवर्ण, लम्बोदर, शूर्पकर्ण तथा पीताम्बरधारी हैं। वे रक्त चन्दन धारण करते हैं तथा उन्हें लाल रंग के पुष्प विशेष प्रिय हैं। वे अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होकर उनकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। वे प्रथम पूज्य, गणों के ईश अर्थात स्वामी, स्वस्तिकरूप तथा प्रणवस्वरूप हैं।

घर में इस तरह होना चाहिए प्रतिमा-

ज्योतिषी दयानंद शास्त्री ने बताया कि यदि गणेशजी की स्थापना घर में करनी हो तो दाईं ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी शुभ होते हैं। दाईं ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी सिद्धिविनायक कहलाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इनके दर्शन से हर कार्य सिद्ध हो जाता है। किसी भी विशेष कार्य के लिए कहीं जाते समय यदि इनके दर्शन करें तो वह कार्य सफल होता है व शुभ फल प्रदान करता है। इससे घर में सकारात्मक उर्जा रहती है व वास्तु दोषों का नाश होता है।

मुख्य दरवाजे पर होती शुभ-

ज्योतिषी दयानंद शास्त्री ने बताया कि घर के मुख्य द्वार पर भी गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ होता है। यहां बाईं तरफ घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी की स्थापना करना चाहिए। बाईं ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी विघ्नविनाशक कहलाते हैं। इन्हें घर में मुख्य द्वार पर लगाने के पीछे तर्क है कि जब हम कहीं बाहर जाते हैं तो कई प्रकार की बलाएं, विपदाएं या नकारात्मक उर्जा हमारे साथ आ जाती है।

घर में प्रवेश करने से पहले जब हम विघ्वविनाशक गणेशजी के दर्शन करते हैं तो इसके प्रभाव से यह सभी नेगेटिव एनर्जी वहीं रुक जाती है व हमारे साथ घर में प्रवेश नहीं कर पाती। वास्तु विज्ञान के अनुसार गणेश जी को घर के ब्रह्म स्थान (केंद्र) में, पूर्व दिशा में एवं ईशान में विराजमान करना शुभ एवं मंगलकारी होता है। इस बात का ध्यान रखें कि गणेश जी की सूंड उत्तर दिशा की ओर हो। गणेश जी को दक्षिण या नैऋत्य कोण में नहीं रखना चाहिए।

राइट व लेफ्ट में ये है अंतर-

ज्योतिषी दयानंद शास्त्री ने बताया कि क्या कभी आपने ध्यान दिया है कि भगवान गणेश की तस्वीरों और मूर्तियों में उनकी सूंड दाई या कुछ में बाई ओर होती है। सीधी सूंड वाले गणेश भगवान दुर्लभ हैं। इनकी एकतरफ मुड़ी हुई सूंड के कारण ही गणेश जी को वक्रतुण्ड कहा जाता है। दाई और की सूंड वाले सिद्धि विनायक कहलाते हैं तो बाई सूंड वाले वक्रतुंड हालांकि शास्त्रों में दोनों का पूजा विधान अलग-अलग बताया गया है।

बाएं सूंड की प्रतिमा लेना ही शास्त्र सम्मत माना गया है। दाएं सूंड की प्रतिमा में नियम-कायदों का पालन करना होता है। प्रतिमा हमेशी बैठी हुई मुद्रा में ही लेनी चाहिए, क्योंकि खड़े हुए गणेश को चलायमान माना जाता है

सूर्य चंद्र से जुड़ी है मान्यता-

ज्योतिषी दयानंद शास्त्री ने बताया कि भगवान गणेश के वक्रतुंड स्वरूप के भी कई भेद हैं। कुछ मुर्तियों में गणेशजी की सूंड को बाई को घुमा हुआ दर्शाया जाता है तो कुछ में दाई ओर। गणेश जी की सभी मूर्तियां सीधी या उत्तर की ओर सूंड वाली होती हैं।

मान्यता है कि गणेश जी की मूर्त जब भी दक्षिण की ओर मुड़ी हुई बनाई जाती है तो वह टूट जाती है। कहा जाता है कि यदि संयोगवश आपको दक्षिणावर्ती मूर्त मिल जाए और उसकी विधिवत उपासना की जाए तो अभिष्ट फल मिलते हैं। गणपति जी की बाईं सूंड में चंद्रमा का और दाईं में सूर्य का प्रभाव माना गया है।

ये मिलता है फल भक्त को-

ज्योतिषी दयानंद शास्त्री ने बताया कि गणेश जी की सीधी सूंड तीन दिशाओं से दिखती है। जब सूंड दाईं ओर घूमी होती है तो इसे पिंगला स्वर और सूर्य से प्रभावित माना गया है। ऐसी प्रतिमा का पूजन विघ्न-विनाश, शत्रु पराजय, विजय प्राप्ति, उग्र तथा शक्ति प्रदर्शन जैसे कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है।

वहीं बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली मूर्त को इड़ा नाड़ी व चंद्र प्रभावित माना गया है। ऐसी मूर्त की पूजा स्थायी कार्यों के लिए की जाती है। जैसे शिक्षा, धन प्राप्ति, व्यवसाय, उन्नति, संतान सुख, विवाह, सृजन कार्य और पारिवारिक खुशहाली।

 


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