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WOW: मध्‍यप्रदेश के इस गांव में नहीं है प्राकतिक आपदा का असर, अब किसानों की होगी बल्‍ले-बल्‍ले, पढें खबर

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WOW: मध्‍यप्रदेश के इस गांव में नहीं है प्राकतिक आपदा का असर, अब किसानों की होगी बल्‍ले-बल्‍ले, पढें खबर

मंदसौर :-

मंदसौर. प्राकृतिक आपदा नहीं आई तो इस साल गेहूं अन्नदाता को 'तरÓ कर देगा। कृषि विभाग ने इस बार जिले में गेहूं का 70.62 प्रतिशत उत्पादन अधिक होने की संभावना जताई है। रबी फसल का उत्पादन भी पिछले साल की तुलना में 51.4 फीसदी अधिक होने की संभावना है। चना, मसूर और सरसों को छोड़कर शेष सभी फसलों में अच्छे उत्पादन की संभावना है।

गेहूं का 8 लाख 55 हजार मीट्रिन टन संभावित है उत्पादन : कृषि विभाग ने रबी फसल वर्ष 2019-20 के संभावित उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले साल की तुलना में इस बार सभी जलस्त्रोत लबालब होने से रबी फसल के लक्ष्य में अप्रत्याशित वृद्धि होने के उम्मीद है। अतिवृष्टि से भले खरीफ फसल बर्बाद हो चुकी हो, लेकिन रबी फसल को इससे काफी लाभ होगा।

मंदसौर जिले में अकेले गेहूं का ही ८ लाख 55 हजार मीट्रिन टन उत्पादन की संभावना है, जो जिले में रबी फसल के संभावित उत्पादन का 74 फीसदी है। पिछले साल जिले में 5 लाख 1 हजार 110 मीट्रिन टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। इस बार अच्छी बारिश के चलते 70.62 फीसदी गेहूं का उत्पादन बढऩे की पूरी संभावना है।

पिछले साल के मुकाबले बढ़ेगा 51.4 फीसदी उत्पादन : कृषि विभाग से उपलब्ध जानकारी अनुसार मंदसौर जिले में रबी फसल वर्ष 2019-20 में 9 लाख 29 हजार मीट्रिक टन उत्पादन की संभावना व्यक्त की है। यह पिछले साल की तुलना में 51.4 फीसदी अधिक है। पिछले साल जिले में 6 लाख 13 हजार 620 मीट्रिन टन उत्पादन हुआ था।

मंदसौर जिले में सबसे अधिक गेहूं का उत्पादन होगा। गेहूं के अलावा चना 30 हजार मीट्रिन टन, मसूर १३ हजार मीट्रिन टन, सरसों १५ मीट्रिक टन, अलसी 16 मीट्रिक टन उत्पादन की संभावना व्यक्त की गई है। इस साल चना, मसूर और सरसों का रकबा घटने की वजह से उत्पादन भी काफी कम होगा। चना का 23 प्रतिशत, मसूर का 7.8 प्रतिशत और सरसों का 72.15 प्रतिशत उत्पादन घटने की आशंका व्यक्त की जा रही है। रबी फसल के संभावित उत्पादन में अनाज का उत्पादन बढऩे की संभावना जताई गई है, लेकिन दलहन में 19 प्रतिशत उत्पादन कम होने की आशंका है। इसी प्रकार तिलहन में भी 47.84 प्रतिशत उत्पादन घटने की आशंका व्यक्त की गई है।

पाला और ओलावृष्टि न फेर दे पानी-

कृषि विभाग के जानकारों का कहना है कि इस साल प्रकृति यदि अन्नदाता पर मेहरबान रही तो किसानों के सारे संकट दूर हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त कोई दूसरा कारण नजर नहीं आता जिससे किसानों की फसल पर प्रतिकूल असर पड़े।

मौसम में भी पाला और ओलावृष्टि किसानों के अरमानों पर पानी फेर सकते हैं। पौधे में फूल और दाना बनने की प्रक्रिया के दौरान यदि पाला और ओलावृष्टि नहीं हुई को खरीफ फसल में हुई नुकसान की भरपाई हो जाएगी। रबी फसल का इतना बंपर उत्पादन होगा कि अन्नदाता के सारे संकट दूर हो जाएंगे।


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