खबरे BIG NEWS: किसानों को 8 तक बैंकों में देनी होगी अंडरटेकिंग, 15 तक होगा फसल बीमा, पढें खबर BIG NEWS: जावद विधायक औमप्रकाश सकलेचा बनें कैबिनेट मंत्री, भाजपा कार्यकर्ताओं ने की आतिशबाजी, मनाया जश्‍न, पढें संदीप बाफना की खबर BIG BREAKING: अज्ञात वाहन ने युवक को कुचला, मौके पर मौत की सूचना, पुलिस और 108 मौके पर, पढें रवि पोरवाल की खबर CORONA FIGHT: कोरोना रिकवरी रेट में चित्तौडग़ढ़ प्रदेश में दूसरे स्थान पर, मरीजों के स्‍वस्‍थ होनें का क्रम लगातार जारी, पढें खबर UNLOCK 1.0: जुलाई में भी नहीं खुलेंगे स्कूलों व धर्मस्थलों के द्वार, 31 जुलाई तक बढ़ाई निषेधाज्ञा, पढें खबर NEWS: अस्सी वर्ष बाद चातुर्र्मास के लिए कहां पर दिगम्बर मुनियों का प्रवेश, पढें खबर OMG ! पुरानी क्रेन से हो रहा था काम, अचानक गिरी, बाल-बाल बचे कर्मचारी, एक माह में दूसरा बड़ा हादसा टला, पढें खबर POLITICS: मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बोले सिंधिया, मध्यप्रदेश में अब दो टाइगर, पढें खबर BIG NEWS: नगरपालिका की मतदाता सूची का हुआ प्रकाशन, दावे आपत्ति आमंत्रित, पढें खबर EXCLUSIVE: नीमच में नौजवानों का अड्डा, सूरज ढलतें ही सजती है महफिलें, सिगरेट और गांजें के सहारें नशे की दुनिया में रखतें है कदम, फिर मदमस्‍त होकर बन जातें है राईडर, पढें डेस्‍क इंचार्ज अभिषेक शर्मा की इनसाईड स्‍टोरी VIDEO: कैबिनेट मंत्री बनने के बाद ओम प्रकाश सकलेचा का विडियों आया सामने, मंत्री बनने पर बोली बड़ी बात, सुनिए क्या कहा VIDEO NEWS: बंजारा समाज के पांच आरोपियों से भयभीत है भील समाज, एकत्रित होकर सौपा एसपी के नाम ज्ञापन, देखे मुश्‍ताक अली शाह की रिपोर्ट VIDEO: उपचुनाव से पहले मालवा में कांग्रेस को बड़ा झटका, दिग्गी और कमलनाथ के करीबी नेता भाजपा में शामिल, देखे विडियों न्यूज VIDEO: #मालवा की #सियासत में #उपचुनाव के पहले #सखलेचा युग की शुरुआत, #पटवा - सखलेचा की राजनीति पर ख़ास खुलासा, देखिये ये रिपोर्ट

BIG REPORT: भोपाल गैस कांड के 35 साल, 'दर्द आज भी जिंदा है', कौन भूल सकता है, पढें खबर

Image not avalible

BIG REPORT: भोपाल गैस कांड के 35 साल, 'दर्द आज भी जिंदा है', कौन भूल सकता है, पढें खबर

डेस्‍क :-

कौन भूल सकता है 2-3 दिसंबर 1984 की वो काली अंधियारी दरम्यानी रात का खौफनाक मंजर, जब आंखों और सीने में जलन सहते हुए अपनी जान बचाने भोपाल के लोग सड़कों पर भागे जा रहे थे. भागने वालों में औरतें, मर्द, बच्चे सब शामिल थे. चारों तक चीख, पुकार, बदहवासी थी. शहर पर मौत का हमला हुआ था. सिर्फ यह सुनाई दे रहा था, भागो गैस रिस गई है

अलसुबह छाई गहरी धुंध में निकले ट्रकों, जीपों से लाउडस्पीकर से आवाजें गूंजने लगीं...साहेबान लाशें उठाने वालों की जरूरत है, फौरन हमीदिया अस्पताल पहुंचिए, लोग तड़प रहे हैं, दवाएं लेकर फौरन फलां..फलां बस्तियों में पहुंचिए. बस्तियों में खुले में बंधे जानवर मरे पड़े थे. जो घरों में सो रहे थे, उनमें से हजारों सोते ही रह गए, कभी न जागने वाली नींद में. भागने के लिए घर का दरवाजा भी नहीं खोल पाए. खेतों के पत्ते जलकर नीले पड़ गए थे

आज मंगलवार 3 दिसंबर का दिन है, इस मंजर को देखे और भोगते हुए पूरे 35 साल गुजर गए. मानव इतिहास की सबसे बड़ी और भयावह औद्योगिक भोपाल गैस त्रासदी हुई थी उस दिन. भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने से करीब 30 टन जानलेवा मिथाइल आइसो साइनाइड गैस रिसी थी. इस त्रासदी से मिले जख्म पीड़ितों के जेहन और जिस्म में आज भी ताजा है

इस त्रासदी में 20 हजार के ज्यादा मौतें और पौने 6 लाख लोग आंखों, किडनी, लिवर, कैंसर, मस्तिष्क, दिल के रोगों समेत सैंकड़ों बीमारियों के शिकार हुए. सर्वाधिक प्रभावित जेपी नगर, बस स्टेण्ड, नारियल खेड़ा, छोला, इब्राहिम गंज, जहांगीराबाद जैसे इलाके हुए. दर्जनों इलाकों में कई बच्चे बीमार या शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम पैदा हो रहे हैं

पीढ़ी दर पीढ़ी इस त्रासदी से मिली बीमारियों को ढोने को मजबूर हैं. गैस पीड़ित विभिन्न बैनर, संगठनों के तले इंसाफ, बेहतर इलाज और मुआवजे की लड़ाई को लगातार जिंदा रखे हुए हैं. सीने में जलन, आंखों में चुभन, हांफते भागते लोगों की चीखें आज भी वैसी ही महसूस होती है, जैसी उस काली रात को थी

सिस्टम और संवेदनाओं की मौत, दोषियों को सजा नहीं-

इन 35 सालों में भोपाल के गैस पीड़ितों ने पहले दिन से वक्त के साथ-साथ सरकारों के सिस्टम और संवेदनाओं की मौत होते देखी है. यूनियन कार्बाइड हादसे का मुख्य गुनहगार यूनियन कार्बाइड का मालिक भोपाल में गिरफ्तार तो किया गया

लेकिन फिर वापस न लाया जा सका. फ्लोरिडा में एंडरसन की 92 साल की उम्र में मौत हो चुकी है. वारेन एंडरसन को भोपाल से भगाने में किसका हाथ था, आज तक तय न हो पाया. तब अर्जुन सिंह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे. केस के कई अभियुक्तों की मृत्य हो गई, सिर्फ दो लोगों को दो-दो साल की सजा हुई

कारखाने से नहीं हटा जहरीला कचरा-

सन 2012 में सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद भी यूनियन कार्बाइड कारखाने में दफन जहरीला कचरा राज्य की सरकारें हटवाने में आज तक नाकाम रहीं. सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निष्पादन किया जाए, लेकिन कारखाने में दफन 350 टन जहरीले कचरे में से 2015 तक केवल एक टन कचरे को हटाया जा सका है. इसे हटाने का ठेका रामको इन्वायरो नामक कंपनी को दिया गया है

लेकिन कचरा अभी तक क्यों नहीं हटाया जा सका, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. इस कचरे के कारण यूनियन कार्बाइड से आसपास की 42 से ज्यादा बस्तियों का भूजल जहरीला हो चुका है. पानी पीने लायक नहीं है, लेकिन किसी को फिक्र नहीं है

और मुआवजे की दरकार-

मुआवजे के मामले में कंपनी और केन्द्र सरकार के बीच हुए समझौते के बाद 705 करोड़ रुपए मिले थे. इसके बाद भोपाल गैस पीड़ित संगठनों की ओर से 2010 में एक पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी, जिसमें 7728 करोड़ मुआवजे की मांग की गई थी. इस मामले में अब तक फैसला नहीं हो पया

गैस राहत अस्पताल खुद हुए बीमार-

1989 में मप्र सरकार ने गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग का गठन किया. इसके बाद बीएचएमआरसी समेत 6 गैस राहत अस्पताल बनाए गए, लेकिन इन अस्पतालों में न डॉक्टर हैं, न संसाधन. गैस पीड़ितों के लिए बने सबसे बड़े अस्पताल बीएमएचआरसी का हाल ये है कि यहां कई विशेषज्ञ डॉक्टर नौकरी छोड़ कर निजी अस्पतालों में ऊंची तनख्वाहों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अस्पताल के गैस्ट्रो, हार्ट जैसे विभागों में तो लगभग ताले ही लग चुके हैं. भोपाल गैस पीड़ितों के लिए अस्पताल, इलाज, मुआवजे के लिए सड़क से सुप्रीमकोर्ट तक लंबी लड़ाई लड़ने वाले गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के नेता अब्दुल जब्बार की पिछले दिनों समय पर बीएमएचआरसी में बेहतर इलाज न मिलने के चलते मौत हो गई थी.

लड़ाई अभी जारी है-

- यूनियन कार्बाइड कारखाने के ग्राउंड में दफन 350 टन जहरीला कचरा हटाने के लिए जहरीली गैस कांड संघर्ष मोर्चा के अनन्य प्रताप सिंह के मुताबिक क्लीयर टॉक्सिक वेस्ट भोपाल नाम से सोशल मीडिया पर एक अभियान शुरू किया है. ऑनलाइन ज्ञापन देने के इस अभियान को अब तक 65 हजार लोगों के समर्थन का दावा किया गया है

- भोपाल के तमाम संगठन 20 हजार मौतों और पौने 6 लाख प्रभावितों की संख्या को देखते हुए सरकार पर प्रदर्शनों, ज्ञापनों के माध्यम सें दबाव बना रहे हैं कि डाऊ केमिकल्स से दोबारा मुआवजा राशि वसूल की जाए और पीड़ितों के बीच अंतिम मुआवजे के तौर पर बांटी जाए

- इलाज के अभाव में गैस पीड़ित नेता अब्दुल जब्बार की मौत के बाद अब उनके गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन ने गैस राहत अस्पतालों की दशा सुधारने के लिए आंदोलन शुरू किया है

कई फिल्में बन चुकी-

- भोपाल गैस त्रासदी, पीड़ितों को इंसाफ और उनकी बदहाल हुई जिंदगी पर भोपाल ए प्रेयर फॉर रेन, भोपाल एक्सप्रेस, यस मेनफिक्स द वर्ल्ड जैसी फिल्में बन चुकी हैं. इनमें हॉलीवुड अभिनेता कलपेन से लेकर नसीरुद्दीन शाह, के.के. मेनन जैसे कलाकारों ने काम किया. बीबीसी की डाक्यूमेंट्री बनी

ये फिल्में दुनिया भर में दिखाई गईं, लेकिन न पीड़ितों के प्रति सिस्टम जागा, न पीड़ितों की जिंदगी बदली. पिछले 35 सालों से गैस पीड़ितों की जिंदगी का रिकॉर्ड एक ही दर्द नगमा बजा रहा है... सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यूं है, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यूं है

 


SHARE ON:-

image not found image not found

© Copyright BABJI NEWS NETWORK 2017. Design and Developed By PIONEER TECHNOPLAYERS Pvt Ltd.