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NEWS : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय प्रताप नगर में मनाया मातेश्वरी जगदंबा का आज 57 वां पुण्य स्मृति दिवस, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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NEWS : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय प्रताप नगर में मनाया मातेश्वरी जगदंबा का आज 57 वां पुण्य स्मृति दिवस, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

चित्तौड़गढ़ :-

चित्तौड़गढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय प्रताप नगर में मातेश्वरी जगदंबा का आज 57 वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया गया। इस मौके पर राजयोगिनी आशा देवी ने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि सदा निर्भय और निश्चिंत मातेश्वरी जी का तपोबल उच्च स्तरीय और कभी न मिटने वाला था, जब कभी उनके पास जाना होता था तो ऐसा महसूस होता था कि वे योग की शक्तिशाली स्टेज में स्थित होकर पवित्रता एवं दिव्यता की किरणें प्रकीर्ण कर रही है।

उनके नयन स्थित चेहरे पर मुस्कुराहट और मुख मंडल दिव्य आभा को लिए हुए होता था। वे केवल ज्ञान द्वारा ही जन-जन की सेवा नहीं करती थी, बल्कि अपने तपोबल से और अपनी ऊंची स्थिति से आत्माओं में बल भर्ती थी और अपनी शीतलता से आत्माओं को शीतल कर देती थी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय प्रताप नगर सेवा केंद्र पर आशा दीदी ने मातेश्वरी जगदंबा के बारे में बताया कि उनके जीवन में अनेक घटनाएं ऐसी हुई जो भयानक एवं विकराल रूप धारण किए हुए होती थी, परंतु वे ऐसी परिस्थितियों में पूर्ण विश्वास रखती थी। कभी ऐसा नहीं कहा कि मैं इसे कैसे करूंगी। बल्कि उन्होंने सदा ही परमात्मा की शिक्षाओं को अपनी जिम्मेवारी समझकर स्वीकार किया और उसे संपन्न करके दिखाया। मातेश्वरी जगदंबा का नाम राधे था ज्ञान यज्ञ की रचना करने वाले ब्रह्मा को यज्ञ पिता कहा जाता है और उनके मुख कमल से जिन को ज्ञान मिला वह ब्रह्माकुमार और ब्रम्हाकुमारियां कहलाएं। इस दृष्टिकोण से सरस्वती भी ब्रह्माकुमारी की थी शास्त्रों में भी इनका गायन है।

दीदी जी ने बताया सरस्वती जी ने अपने मन को पूर्ण आहुति दी थी उन्होंने अपना सर्वस्व प्रभु अर्पण किया मन और बुद्धि पूर्ण परमात्मा को समर्पित कर दी। इसीलिए वह महाकाली दुर्गा और लक्ष्मी कहलाए। सभी नर-नारियों के प्रति उनके हृदय में वात्सल्य भरा रहता था। मातेश्वरी जगदंबा जब इस ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संपर्क में आई बाल्यकाल में ही वे गायन कला नृत्य कला में निपुण थे और ब्रह्मा बाबा की हर आज्ञा को जी बाबा कहकर पालन करती थी। मातेश्वरी जी की स्थिति संसार के आकर्षणों से ऊंचा उठ कर शिव बाबा के आकर्षण के क्षेत्र में रहती थी। इसलिए उनका व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली और रूहानी आकर्षण से भरा रहता था। उनकी वाणी में मधुरता थी और उनके बोल मन को शांत करने वाले तथा मन में शक्ति प्रदान करने वाले होते थे। इसके पश्चात सभी भाई बहनों ने मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती को पुष्प अर्पित किए और सभी भाई बहनों ने यह संकल्प लिया कि हम भी मातेश्वरी के जैसा निर्भय निश्चिंत और तपस्वी जीवन बनाएंगे। इसके पश्चात मातेश्वरी जी को भोग स्वीकार किया और सभी भाई बहनों को भोग बांटा गया।


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