नीमच। कलेक्टर एवं दण्डाधिकारी दिनेश जैन, द्वारा म.प्र.पेयजल परीक्षण अधिनियम-1986 तथा संशोधन अधिनियम-2022 की धारा-3 के तहत नीमच जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।
कलेक्टर जैन द्वारा जिले के समस्त स्त्रोतों यथा बांध नदी, नहर, जलधारा, झरना, झील, जलाशय, नाला, नलकूप या कुंओं एवं किसी भी साधन से घरेलू प्रयोजन (पेयजल को छोड़कर) के लिये (पूर्व अनुमति का छोड़कर) जल उपयोग करने के लिये प्रतिबंधित किया गया है। निरंतर भू-जल की गिरावट को दृष्टिगत रखते हुए संपूर्ण जिले में अशासकीय व निजी नलकूप खनन करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
नीमच जिले की सीमा क्षेत्र में नलकूप, बोरिंग मशीने संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी की अनुमति के बिना न, तो प्रवेश करेगी (सार्वजनिक सड़कों से गुजरने वाली मशीनों को छोड़कर) और न ही बिना अनुमति के कोई खनन करेगी। प्रत्येक राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों को ऐसी बोरिंग मशीनों जो अवैध रूप से जिले में प्रतिबंधित स्थानों पर प्रवेश करेगी अथवा नलकूप, बोरिंग का प्रयास कर रही (विभागीय पेयजल हेतु को छोड़कर) मशीनों को जप्त कर पुलिस में एफ.आई.आर. दर्ज कराने का अधिकार रहेगा एवं जप्त की गई, मशीनें तहसीलदार के अधिपत्य में रहेगी। इस अधिसूचना का उल्लंघन करने पर म.प्र.पेयजल परिरक्षण अधिनियम-1986 की धारा-3, धारा-4 या धारा-6 के उपबंध का उल्लघंन, प्रथम अपराध के लिये पांच हजार रूपये के जुर्माने से और पश्चातवर्ती प्रत्येक उपराध के लिये दस हजार रूपये के जुर्माने से या कारावास से, जो दो वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा।
मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण 1986 अन्तर्गत कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नीमच को अधिनियम के अन्तर्गत पारित आदेशों का पालन उनके संबंधित क्षेत्रों में सुनिश्चित करने हेतु अधिकृत किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से 31 जुलाई 2023 तक प्रभावशील रहेगा।