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May 28, 2024, 8:27 pm
BIG REPORT : कलेक्टर दिनेश जैन ने ली जिला अधिकारियों की बैठक, बोले- 5 जून पर्यावरण दिवस से जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए चलाया जाएगा अभियान, जनभागीदारी से कराएंगे नदी, कुएं, तालाब, बावड़ियों की सफाई, पढ़े खबर 

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नीमच। जिले में 5 जून पर्यावरण दिवस से गंगा दशमी पर्व तक जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए संपूर्ण प्रदेश में अभियान चलाया जाएगा। अभियान की अवधि में जिले में जल के स्रोतों, जैसे नदी, कुएं, तालाब, बावड़ियों आदि को स्वच्छ रखने और आवश्यकता होने पर उनके गहरीकरण के लिए गतिविधियां संचालित की जाएंगी। यह कार्य जनसहभागिता से होगा।इससे जल स्रोतों के प्रति सामाजिक चेतना जागृत करने और जनसामान्य का जल स्रोतों से जीवंत संबंध विकसित करने में मदद मिलेगी। गंगा दशमी पर्व माँ गंगा का अवतरण दिवस हैऔर माँ गंगा से ही भारतीय संस्कृति विश्व में जानी जाती है। शहरी औऱ ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान का नेतृत्व जनप्रतिनिधि करेंगे।

जल ही जीवन है केवल स्लोगन नहीं, हम जलस्रोतों से ही जीवन पाते हैं-
कलेक्‍टर जैन ने सभी सामाजिक, शासकीय, अशासकीय संस्थाओं, जनअभियान परिषद से जुड़े संगठनों से अभियान में शामिल होने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जनसहभगिता से जल संरचनाओं का चयन किया जाए और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सघन जनजागृति के कार्यक्रम चलाये जाएं। इससे भविष्य के लिए जल संरक्षण के संबंध में कार्य योजना बनाने में मदद मिलेगी। पेयजल की आपूर्ति में नदियां, बावड़ियां, कुएँ व तालाब महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ष्जल ही जीवन हैष् केवल स्लोगन नहीं है, यह जल स्रोतों की हमारे जीवन में भूमिका से स्पष्ट होता है। हमारी यह पीढ़ी इन जल संरचनाओं की महत्ता से परिचित हो, हमारा संबंध जल संरचनाओं से अधिक प्रगाढ़ हो, यही इस अभियान का उद्देश्य है।

जल संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा- 
कलेक्‍टर जैन ने कहा कि अभियान के दौरान नदियों और तालाबों से गाद या खाद के रूप में निकलने वाली मिट्टी, किसानों को खेतों में उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। जल संरचनाओं पर किये गये अतिक्रमणों को हटाया जाएगा। अभियान के संबंध में अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं, कि प्रारंभिक रूप से यह अभियान 5 से 15 जून तक चलाया जाएगा। इसके बाद अभियान की अवधि बढ़ाई जा सकती है।

अभियान के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय विकास एवं आवास होंगे नोडल विभाग-
नमामि गंगे परियोजना के नाम से आरंभ हो रहे जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के विशेष अभियान के लिए ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय क्षेत्र में नगरीय विकास एवं आवास, नोडल विभाग होंगे। जल संरचनाओं के चयन और उन्नयन कार्य में जीआईएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इन स्थलों की मोबाइल एप के माध्यम से जियो -टैगिंग की जाएगी। सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से जल संरचनाओं के आसपास स्वच्छता बनाए रखने, जल संरचनाओं के किनारों पर अतिक्रमण रोकने के लिए फेंसिंग के रूप में वृक्षारोपण करने जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा और जल संरचनाओं के किनारों पर बफर जोन तैयार कर उन्हें हरित क्षेत्र या पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। जल संरचनाओं में मिलने वाले गंदे पानी के नाले-नालियों को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत डायवर्जन उपरांत शोधित कर जल संरचनाओं में छोड़ा जाएगा।                  

रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए चलेगा जागरूकता अभियान- 
कलेक्‍टर जैन ने कहा कि राज्य शासन द्वारा अमृत 2.0 योजना के तहत जल संरचनाओं के उन्नयन का कार्य सर्वाेच्च प्राथमिकता से कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत नदी, झील, तालाब, कुओं, बावड़ी आदि के पुनर्जीवीकरण/संरक्षण व संरचनाओं के उन्नयन का कार्य स्थानीय सामाजिक, प्रशासकीय संस्थाओं के साथ मिलकर जनभागीदारी से कराए जाएंगे। प्रयास होगा कि जल संरचनाओं का उपयोग जल प्रदाय अथवा पर्यटन, भू-जल संरक्षण, मत्स्य पालन अथवा सिंघाड़े के उत्पादन के लिए भी किया जा सके। रिहायशी इलाकों में बंद पड़े रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की साफ-सफाई कर उनके पुनरू उपयोग के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। निकायों को नाले-नालियों की साफ-सफाई, वाटर ड्रेनिंग मैनेजमेंट, घाट निर्माण, वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों के संबंध में भी विस्तृत निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्‍टर जैन ने जिला अधिकारियों को बैठक में उक्‍त अभियान की कार्य योजना बनाकर उसका क्रियान्‍वयन सुनिश्चित करने के निर्देश सभी जनपद सीईओ और सीएमओ को दिए है। बैठक में जिला पंचायत सीईओ गुरूप्रसाद, एडीएम लक्ष्‍मी गामड, सभी एसडीएम, जनपद सीईओ, सीएमओ और जिला अधिकारी उपस्थित थे।

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