माउंट आबू। राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ द्वारा 6 मार्च को माउंट आबू में लगाई गई संपूर्ण रोक के विरोध में शहर की जनता, सामाजिक संगठन और राजनीतिक दल एकजुट हो गए हैं। इस मुद्दे को लेकर भाजपा, कांग्रेस सहित विभिन्न सामाजिक और व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अदालत में जनता का पक्ष मजबूती से रखने की मांग की है।
बताया गया कि आबू रोड के तीन निवासियों द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने 6 मार्च को पूरे माउंट आबू क्षेत्र पर रोक लगा दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को निर्धारित की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले मास्टर प्लान बायलॉज को स्वीकृति मिलने के बाद 12 दिसंबर 2024 को उच्च न्यायालय ने माउंट आबू की जनता के मौलिक अधिकारों का सम्मान करते हुए राहत दी थी। लेकिन हालिया आदेश के बाद शहर में फिर से असमंजस की स्थिति बन गई है।
इसी के चलते माउंट आबू में भाजपा, कांग्रेस, आबू संघर्ष समिति, अग्रवाल समाज, 16 गांव राजपूत समाज, अनुसूचित जाति-जनजाति संगठनों सहित कई सामाजिक और व्यापारिक संगठन एक मंच पर आ गए हैं। सभी संगठनों ने नगर पालिका माउंट आबू के आयुक्त और उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि 24 मार्च की सुनवाई से पहले प्रशासन अदालत में जनता के हित में मजबूत पक्ष रखे।
संगठनों का कहना है कि माउंट आबू की जनता ने पिछले तीन दशकों तक संघर्ष कर अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है। ऐसे में इस प्रकार की रोक से लोगों के मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष और आबू संघर्ष समिति के पूर्व अध्यक्ष सुनील आचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विभिन्न सामाजिक संगठन भी अदालत में अपना पक्ष रखेंगे, ताकि माउंट आबू के लोगों को राहत मिल सके।