खनियांधाना। ब्लॉक किसान कांग्रेस कमेटी खनियांधाना ने मध्य प्रदेश सरकार पर किसानों के साथ छल करने और उन्हें जानबूझकर आर्थिक संकट में धकेलने का गंभीर आरोप लगाया है। सोमवार को किसान कांग्रेस के अध्यक्ष राजकुमार पाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र खनियांधाना तहसीलदार निशिकांत जैन को सौंपा। इस मांग पत्र के माध्यम से गेहूं पंजीयन की तारीख बढ़ाने और ऋण वसूली की नीतियों में तुरंत बदलाव करने की पुरजोर मांग की गई है।
किसान कांग्रेस का कहना है कि सरकार द्वारा गेहूं पंजीयन की अंतिम तिथि 10 मार्च तय की गई थी, लेकिन सर्वर में आई तकनीकी खराबी और पोर्टल न चलने के कारण क्षेत्र के लगभग 30 से 40 प्रतिशत किसान अपना पंजीयन कराने से वंचित रह गए हैं। पंजीयन न होने से इन किसानों के सामने अपनी उपज बेचने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने मांग की है कि पंजीयन की तारीख को तत्काल प्रभाव से आगे बढ़ाया जाए ताकि शेष बचे किसानों को भी अपनी फसल सरकारी दर पर बेचने का मौका मिल सके।
इसके साथ ही ज्ञापन में सरकार की ऋण वसूली नीति पर भी कड़े सवाल उठाए गए हैं। किसान नेताओं ने तहसीलदार को बताया कि प्रदेश में गेहूं की तुलाई 1 अप्रैल से शुरू होनी है, जिसका भुगतान किसानों के खातों में 15 से 20 अप्रैल तक पहुंचेगा। इसके विपरीत, सरकार ने सोसायटी का ऋण जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च तय कर रखी है। किसान कांग्रेस का आरोप है कि जब किसान के पास फसल बेचने का पैसा ही अप्रैल के अंत में आएगा, तो वह मार्च में कर्ज कैसे चुका पाएगा। यह सीधे तौर पर किसानों को श्डिफॉल्टरश् घोषित करने की एक साजिश है, ताकि उन्हें भविष्य में खाद और बीज जैसी सरकारी सुविधाओं से वंचित रखा जा सके। अंत में चेतावनी देते हुए कहा गया है कि यदि सरकार जल्द ही गेहूं पंजीयन की तारीख नहीं बढ़ाती और ऋण वसूली की समय सीमा को 31 मार्च से बढ़ाकर 1 मई नहीं करती, तो आने वाले समय में पूरे मध्य प्रदेश में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस दौरान राजकुमार पाल सहित कई किसान प्रतिनिधि और कांग्रेस पदाधिकारी उपस्थित रहे।