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BIG BREAKING : वित्त मंत्रालय ने जारी की वर्ष 2022-23 की अफीम नीति, जानिये इस बार काश्तकारों को कितने आरी के मिलेंगे पट्टे और सीपीएस के लिए क्या रहेगा नियम, पढ़े महावीर सैनी के साथ कमलेश मांगरिया की खबर 

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BIG BREAKING : वित्त मंत्रालय ने जारी की वर्ष 2022-23 की अफीम नीति, जानिये इस बार काश्तकारों को कितने आरी के मिलेंगे पट्टे और सीपीएस के लिए क्या रहेगा नियम, पढ़े महावीर सैनी के साथ कमलेश मांगरिया की खबर 

नीमच :-

नीमच। वित्त मंत्रालय ने अफीम नीति 2022-23 की घोषणा कर दी है। इस अफीम नीति का राजपत्र में प्रकाशन भी हो गया है। इस बार वित्त मंत्रालय ने पात्र किसानों को 10-10 आरी का पट्टा देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त भी कई बिंदुओं पर विचार कर वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2022-23 की अफीम नीति को जारी किया है। 

वर्ष 2022-23 की अफीम नीति के प्रमुख बिंदू- 
- सभी पात्र किसानों को 10-10 आरी के पट्टे दिए जाएंगे।
- किसान 2 से अधिक भूखंडों पर अफीम की बुवाई कर सकेंगे। 
- काश्तकार यदि चाहे तो लाइसेंस प्राप्त करने के लिए पट्टे पर दूसरो की भूमि ले सकता है। इसकी अनुमति रहेगी। 
- आगामी वर्ष 2022-23 में प्रति हेक्टेयर 5.9 किलोग्राम मार्फिन देनी होगी। 
- 2019-20, 2020-21 vomp व 2021-22 के दौरान फसल की जुताई करने वाले किसानों को वर्ष 2023-24 के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। 
- लुइनी-चिरनी में 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से उपर मार्फिन देने वाले किसानों को भी 10-10 आरी के पट्टे दिए जाएंगे। 
- 1999 से 2021 तक 6 प्रतिशत से अधिक मार्फिन देने वाले सभी किसानों को पट्टे दिए जाएंगे। 
- सीपीएस पद्धति में 3 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से उपर तथा 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से नीचे मार्फिन देने वालों को भी 10-10 आरी के पट्टे दिए जाएंगे। 
- सीपीएस पद्धति के तहत लगभग 15 हजार नए पट्टे पढ़ सकते हैं। 

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नई अफीम नीति के खास बिंदू- 
1. खेती करने के स्थान
किसी भी ऐसे भूखंड में पोस्त की खेती के लिए लाइसेंस दिया जा सकता है जिसे केन्द्र सरकार द्वारा इस निमित अधिसूचित किया जाए।

2. खेती हेतु पात्रता
इस अधिसूचना के खण्ड 3 और 7 के अध्यधीन रहते हुए निम्नलिखित व्यक्ति लाइसेंस के माध्यम से अफीम-गोंद प्राप्त करने के लिए पोस्त की खेती के लाइसेंस हेतु पात्र होंगे

(1) वे किसान जिन्होंने फसल वर्ष 2021-22 के दौरान अफीम पोस्त की खेती की थी और उनके मार्फीन की औसत उपज 4.2 कि.ग्रा/है. से कम नहीं थी।

टिप्पणी- प्रति हेक्टेयर किग्रा में मार्फीन के अवयव की औसत अर्हक उपज को इस अधिसूचना में एतश्मिन पश्चात न्यूनतम अर्हक उपज (एमक्यूबाई-एम) कहा जाएगा।

(2) किसान जिन्होंने इससे संबंधित प्रावधानों के अनुसार केन्द्रीय स्वापक व्यूरो की देखरेख में फसल वर्ष 2019 20, 2020-21 और 2021-22 के दौरान vomp अपनी संपूर्ण पोस्त की फसल की जुताई की हो, परन्तु जिन्होंने इसी तरह फसल वर्ष 2018-19 के दौरान अपनी सम्पूर्ण पोस्त फसल की जुताई नहीं थी ।

(3) किसान जिनकी लाइसेंस मंजूर न करने के खिलाफ अपील को फसल वर्ष 2021-22 में निपटान की अंतिम तारीख के बाद अनुमति दे दी गई हो।

(4) किसान जिन्होंने फसल वर्ष 2021-22 अथवा किसी अगले वर्ष में पोस्त की खेती की हो और जो अनुवर्ती वर्ष में लाइसेंस के लिए पात्र थे, किन्तु किसी कारणवश लाइसेंस प्राप्त / जारी न किया हो अथवा, जिन्होंने अनुवर्ती फसल वर्ष में लाइसेंस प्राप्त करने के बाद किसी कारणवश अफीम पोस्त की खेती वास्तव में न की हो।

(5) किसान जिनको कि किसी दिवंगत पात्र किसान ने फसल वर्ष 2021-22 के लिए फॉर्म सं. 1 (देखें नियम 7 ) के कॉलम 11 में नामित किया गया हो।

(6) जिला अफीम अधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद मृत पात्र कृषकों के कानूनी वारिसों में से एक ऐसे मामलों में किसी भी कारण से किसान के विधिक उत्तराधिकारी को फॉर्म सं. 1 में नामित नहीं किया गया हो या किसी फसल वर्ष में फॉर्म सं. 1 में जिस व्यक्ति को नामित vomp किया गया है वह पारिवारिक सदस्य / रक्त संबंध की परिभाषा के अतंर्गत नहीं आते हों।
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3. लाइसेंस की शर्तें-
किसी भी किसान को तब तक लाइसेंस मंजूर नहीं किया जाएगा जब तक वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा न करता हो/करती हो-

(1) उसने फसल वर्ष 2021-22 के दौरान पोस्त की खेती के लिए लाइसेंसशुदा वास्तविक क्षेत्र से 5 प्रतिशत क्षम्य क्षेत्र से अधिक क्षेत्र में खेती न की हो।

(2) उसने कभी भी अफीम पोस्त की अवैध खेती न की हो तथा स्वापक औषधि तथा मनः प्रभावी द्रव्य पदार्थ अधिनियम, 1985 और उसके अंतर्गत बनाये गए नियमों के vomp अंतर्गत उस पर किसी अपराध के लिए किसी सक्षम न्यायालय में आरोप नहीं लगा सिद्ध किया गया हो।

(3) फसल वर्ष 2021-22 के दौरान उसने केन्द्रीय नार्काेटिक्स ब्यूरो/नार्काेटिक्स आयुक्त द्वारा किसानों को जारी किन्हीं विभागीय अनुदेशों का उल्लंघन नहीं किया हो।
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4. अधिकतम क्षेत्र-
(1) सभी पात्र किसानों में से प्रत्येक को 10 आरी के लिए लाइसेन्स दिया जायेगा।

(2) लाइसेंस प्राप्त करने वाले किसान दो से अधिक भू-खंडों में अफीम, पोस्त की बुआई कर सकते हैं।

(3) काश्तकारों को यदि वे चाहें तो, लाइसेंस प्राप्त करने के लिए, पट्टे पर दूसरों की भूमि लेने की अनुमति दी जाएगी।
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5. पूर्व चेतावनी
(1) आने वाले वर्ष 2023-24 में अफीम पोस्त की खेती के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की पात्रता हेतु फसल वर्ष 2022-23 के दौरान 5.9 किलोग्राम मार्फीन प्रति हेक्टेयर की न्यूनतम अर्हक उपज देना जरूरी है।

(2) वर्ष 2022-23 के दौरान दी गई अफीम में मार्फीन की मात्रा को फसल वर्ष 2022-23 के भुगतान का आधार माना जा सकता है, यदि सरकार इस बारे में निर्णय लें।

(3) ऐसे किसान जिन्होंने फसल वर्ष 2019-202020-21 और 2021-22 के दौरान अपनी पूरी फसल की जुताई कर दी थी उनको फसल वर्ष 2023 2024 के लिए vomp लाइसेंस का पात्र नहीं माना जाएगा, यदि उन्होंनें फसल वर्ष 2022-23 में भी पुनरू अपने फसलों की पूरी तरह जुताई कर दी हो।

(4) भविष्य में, यदि सरकार अतिरक्त लाइसेंस देना चाहती है तो वह उन किसाने के रद्द किए गए लाइसेंस को पुनः दे सकती हैं जिन्होंने ऐसी अफीम / मार्फिन की आपूर्ति की थी जिनकी लगातार 5 वर्ष में कुल एमक्यूवाई/ एमक्यूबाई-एम (अगले फसल वर्ष के लिए लाइसेंस के लिए निर्धारित) के कुल 108 प्रतिशत के बराबर या उससे अधिक का कुल औसत था।
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6. माफी योग्य सीमा-
यदि खेती किया गया वास्तविक क्षेत्र लाइसेंसशुदा क्षेत्र से 5 प्रतिशत तक अधिक है तो ऐसा अधिक क्षेत्र क्षम्य हो सकता है।
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7. विविध-
(1) जो किसान वर्ष 2022-23 के दौरान अफीम पोस्त की खेती अपने भू-खंड पर अथवा दूसरों से पट्टे पर लिये गये भू खंड पर करता है, भू-खंड के स्वामी का ब्यौरा, सर्वेक्षण संख्या और स्वापक आयुक्त द्वारा निर्देशित अन्य ब्यौरा प्रदान करेगा।

(2) इन सामान्य लाइसेंसिंग शर्तों से नार्काेटिक्स आयुक्त/नार्काेटिक्स उपायुक्त के किसी भी लाइसेंस को जारी करने/उसे रोकने के अधिकार को उस स्थिति में कोई क्षति नहीं पहुंचती जब कभी स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के उपबंधों और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार ऐसा करना ठीक समझा जाए।

(3) लाइसेंस इस शर्त पर दिया जाएगा कि किसी भी vomp खेत को सरकार द्वारा अथवा सरकार द्वारा विशिष्ट संस्था अथवा एजेंसी के साथ सहयोग करके किये जाने वाले अनुसंधान के प्रयोजनार्थ अधिगृहित किया जा सकता है। जिस किसान के खेतों को अनुसंधान के लिए चुना जाएगा उसका अगले वर्ष लाइसेंस मंजूर करने पर विचार किया जाएगा बशर्ते उसने निर्धारित न्यूनतम अर्हक उपज प्रस्तुत की हो और वह अन्यथा पात्र हो । अनुसंधान हेतु चुने गए क्षेत्र को उपज की गणना करते समय लेखे में नहीं लिया जाएगा।

(4) लाइसेंस इस अतिरिक्त शर्त के अध्यधीन होगा कि अफीम को निकाले बिना पोस्त भूसी प्राप्त करने के लिए किसी भी खेत को चुना जा सकता है। जिन किसानों के खेत ऐसे उपयोग के लिए चुने जाएंगे वे अन्यथा पात्र होने पर अगले फसल वर्ष के लिए लाइसेंस के लिए पात्र होंगे। 

(5) किसी किसान द्वारा सौंपी गई अफीम की मात्रा की गणना राजकीय अफीम एवं क्षारोध कार्यशाला, नीमच अथवा गाजीपुर में किए गए विश्लेषणों के आधार पर 70 डिग्री गाढ़ेपन पर की जाएगी।

(6) ऐसे किसान जिनका किसी विशेष गांव में अफीम की खेती का लाइसेंस है लेकिन वे पास के लगे दूसरे गांव के निवासी हैं तो उनको अपने आवास पर अफीम को इकट्ठा करने की vomp अनुमति होगी बशर्ते की ऐसी मानव वस्ती और गांव के बीच लगातार आना जाना होता हो।

(7) यदि अफीम की नीति अंग्रेजी और हिन्दी के संस्करणों में परस्पर विसंगति पाई जाती है तो अंग्रेजी संस्करण ही अधिमान्य होगा।


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