WOW: सलाम करते है मंदसौर के धावक समीर सिंह गुर्जर को, शहीदों के परिवार की मदद का ऐसा जज्बा कि मां के गुजरने पर भी नहीं छोड़ा मैराथन, मदन गुर्जर बोले पूरे देश में किया समाज के साथ एमपी का नाम रोशन, पढें खबर

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WOW: सलाम करते है मंदसौर के धावक समीर सिंह गुर्जर को, शहीदों के परिवार की मदद का ऐसा जज्बा कि मां के गुजरने पर भी नहीं छोड़ा मैराथन, मदन गुर्जर बोले पूरे देश में किया समाज के साथ एमपी का नाम रोशन, पढें खबर

नीमच :-

मंदसौर। देश की सेवा करते हुए शहीद हो जाने वाले सैनिकों के परिवारों को आर्थिक मदद पहुंचाने के उद्देश्य से फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार की पहल पर राष्ट्रव्यापी अल्ट्रा मैराथन ‘भारत के वीर’ के धावक समीर सिंह बुधवार को कैमूर जिले के मझारी गांव पहुंचे। 45 वर्षीय इस मैराथन धावक ने शरीर में पानी की कमी हो जाने के बाद स्थानीय दवा व्यवसायी विनोद कुमार के परिसर में कुछ देर आराम किया और ग्लूकोज आदि लिया। अल्ट्रा मैराथन धावक समीर सिंह ने बताया कि 01 दिसंबर 2017 से वाघा बार्डर से उन्होंने मैराथन की शुरुआत की थी। 

गुर्जर समाज के जिलाध्‍यक्ष मदन गुर्जर ने बताया कि हमारे समाज व युवाओं के लिये यह अच्‍छी बात है कि हमेशा गुर्जर समाज किसान के रूप में जाना जाता है लेकिन धावक समीर सिंह गुर्जर ने एक बार फिर गुर्जर समाज का नाम पूरे देश में शहीद सैनिको के परिवारों को आर्थिक मदद पहुंचाने के उद्देश से राष्‍ट्रव्‍यापी अल्‍ट्रा मैराथन शुरू की है जिसे पूरे देश का गुर्जर समाज सलाम करता है 

जिलाध्‍यक्ष मदन गुर्जर ने बताया कि धावक समीर सिंह गुर्जर सुबह 5 बजे से रात 12 तक दौड़ता है  हर दिन तकरीबन 70 से 100 किलोमीटर की दूरी तय होती है। अब तक करीब 12 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर देश के 23 राज्यों का भ्रमण कर चुके है। पंजाब, हरियाणा, राजस्‍थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से होकर गुजरा चूकें।

पूरे भारत में करीब 15000 किमी दौड़ लगाते हुए पुनः वाघा बार्डर तक पहुंचना मेरा टारगेट है। इस दौरान मैं ‘भारत के वीर’ पोर्टल के माध्यम से लोगों को शहीदों के परिवार के लिए आॅनलाइन मदद करने की अपील की है और हम भी यही अपील करतें है ।

रॉ में जाना चाहते थे समीर
मूलतः मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के रहने वाले समीर सिंह एक गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके मन में बचपन से ही देश के लिये कुछ करने का जज्बा था और वे राॅ में शामिल होना चाहते थे। लेकिन ग्रामीण इलाके में पर्याप्त सुविधा न मिल पाने के कारण वे महज चौथी कक्षा तक ही शिक्षा ले पाए। लेकिन अक्षय कुमार द्वारा चलाए जा रहे कैम्पेन के माध्यम से देश व शहीदों के लिए कुछ करने का मौका उन्हें मिला।

अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए
अल्ट्रा मैराथन के दौरान 06 फरवरी 2018 को उन्हें खबर मिली कि उनकी मां का देहांत हो गया और उन्हें इस खबर से काफी तकलीफ भी हुई लेकिन उन्होंने अपना सफर नहीं छोड़ा, जिस वजह से वे अपनी मां के अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हो पाए।

छोटा भाई व कोच रहते हैं हमेशा साथ
समीर के साथ मैराथन में उनके कोच कीरूई कुरूई, जो मूलतः केन्या के रहने वाले हैं और छोटे भाई प्रहलाद सिंह हमेशा साथ होते हैं। समीर सिंह जब दौड़ लगाते हैं तो उनके आगे और पीछे एक-एक गाड़ी रहती है, जिसमें उनके छोटे भाई, कोच व अन्य सहयोगी बैठे रहते हैं।

अभिनेता अक्षय कुमार की पहल पर शुरू हुआ था पोर्टल
समीर सिंह ने बताया कि फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार की पहल पर पिछले साल केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा शहीद परिवारों की मदद के लिए ‘भारत के वीर’ पोर्टल की शुरूआत की थी। बताया कि वेब पोर्टल के माध्यम से चंदा देकर लोग शहीद जवानों के परिजन को आर्थिक मदद पहुंचा सकते हैं।


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