NEWS: पवित्र भाव से जुडेगे तो आत्म कल्याण होगा - ब्रहमचारिणी संगीता दीदी

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NEWS: पवित्र भाव से जुडेगे तो आत्म कल्याण होगा - ब्रहमचारिणी संगीता दीदी

नीमच :-

मानव को हमेषा पवित्र भाव रखना चाहिए। उदार ओर पवित्र भाव रखने वाले को हर कही प्रषंसा मिलती है परिवार में हमेषा समन्वय षांति के साथ रहे तो परिवार में सुखषांति भी रहेगी और सभी के मन भी पवित्र होंगे और सभी आत्म कल्याण की और बढ़ सकेंगे । यह बात ब्रहचारीणी संगीता दीदी ने कही वे दिगम्बर जेन मंदिर पर्युशण पर्व में आयोजित धर्मसभा में बोल रही थी ।

उन्होंने कहा कि संत कहते है कि आज जितने भी लोग अपने दुखों का, कश्टों का रोना रोते है, उन्हें समझना हैं कि उनके अन्दर अनंत षक्ति संपन्न हीरा पड़ा है उस पर आपके अज्ञान का, निथ्यात्व का, आसक्ति का आवरण चढ़ा हैं ये जब हटेगा तभी तुम्हें भीतर के तत्व की पहचान होगी । तुम्हें ये तन इसलिये मिला है कि तुम इन्द्रियों पर नियंत्रण रखो । भोगों में रत मत रहो, कर्मो का नाष करो । लोगों को अपने षरीर में इतनी आसक्ति होती है कि वे तपस्या या साधना सोच ही नहीं पाते । आसक्ति मनुश्य को रोकती है जबकि विरक्ति प्रोत्साहन करती है षरीर को पाकर जो व्यक्ति अपने षरीर के पोशण में लगा रहता है वह उसी में रत रहकर अपने संसार को बढ़ाता है और एक व्यक्ति उसी षरीर से तपस्या कर संसार को पार कर लेता है दृश्टि का खेल है आसक्ति होगी तो संसार में घूमोगे और विरक्ति होती तो साधना से, तप के माध्यम से मुक्ति पाओगे ।

ब्रहमचारिणी संगीता दीदी ने कहा कि जीवों की रक्षा करना ही सब से बड़ा मानव धर्म हे तत्व अलग भक्ति अलग होती है तत्व और मुक्ति दोनों भक्ति से मिलते है सच्चे मन से परमात्मा के मंदिर में आये तो भक्ति भी मिलेगी मुक्ति भी मिलेगी ।
जीनी जीणी उडेरे गुलाल चालो रे मंदरिया में...भक्ति का भाव चला उमंग उमंग बाजे रे बाजे ढोली थारो ढोल बाजे बाजे ढोल मंदिर में बाजे  ढोल केसरिया आज ध्यारोमन केसरिया भजनों की प्रस्तुति दी गई । मोनिका विनायका जम्बुकुमार जैन ने बार-बार गाऊ पंखीडा ओ पखीडा उड़ ने जाई जे म्हारा महावीर ने कीजे द्वारा भक्त आयारे पाष्र्वनाथ से कहना तेरे भक्त आये...रंगमा रंगमा प्रभु थार ही रंग में रंग गमोरे बड़ी मस्तानी है म्हारी महावीर री वाणी कोई जो मुझसे के पुछे गुरू की सुरत में दिखाऊ गुरू के चरणों में दिखाऊ जहाॅं भटकता है तु राही यही सबरी जिन्दगानी यही पर है चार धाम तेरे....यु तो मुरत तेरी ।

 


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