NEWS: चार्तुमासिक धर्मसभा, साध्वी पुण्य दर्शना श्रीजी नीमच में बोली इन्द्रियों पर नियंत्रण के लिए उपवास श्रेष्‍ठ माध्यम, पढें खबर 

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NEWS: चार्तुमासिक धर्मसभा, साध्वी पुण्य दर्शना श्रीजी नीमच में बोली इन्द्रियों पर नियंत्रण के लिए उपवास श्रेष्‍ठ माध्यम, पढें खबर 

नीमच :-

नीमच। इन्द्रियों पर संयम के लिए स्वादिश्ट आहार का त्याग आवश्‍यक है उपवास से आहार पर नियंत्रणहोता है आयम्बिल की तपस्या से इन्द्रियों पर नियंत्रण होता है इन्द्रियों पर नियंत्रण के तपस्या उपवास श्रेश्ठ माध्यम है श्रेष्‍ठ श्रावक बनने के 12 वृत पालन का संकल्प लेना चाहिए तभी आत्मा का कल्याण हो सकता है यह बात साध्वी पूण्य दर्षना श्रीजी मसा. ने कही  

वे बुधवार वे सौधर्म वृहद तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ नीमचसिटी के तत्वाधान में नीमचसिटी स्थित श्री राजेन्द्र सुरीज्ञान मंदिर सभागार में बुधवार सुबह आयोजित षंखेष्वर पाष्र्वनाथ के 108 अभिशेक के लिए आयोजित चार्तुमासिक धर्मसभा में बोल रही  थी उन्होंने कहां कि परमात्मा ने तप करते हुए भी  विचरण कर संसार को आर्दष प्रेरणा का संदेष दिया था । प्राणी किसी  भी योनि में आहार तो ग्रहण करना ही होगा । जीव को अनादिकाल से ही जीभ पर स्वाद की आदत  है अनादिकाल से चल रही आहार त्याग के लिए तप, धर्म का मार्ग ऋशि मुनियों ने बताया है श्रावक बनने के लिए 12 वृत करना चाहिए । अनेक कश्टों के बाद भी अपने सिद्धान्तों  से डिगे  नहीं इसलिए  महावीर कहलाएं । अपने ज्ञान का अंहकार नहीं होना चाहिए । हम जीओ और जीने दो के ध्येय वाक्य पर चले । इसे आचरण में लाना होगा पानी छान कर पीना चाहिए । लोग परमात्मा को मानते है परमात्मा की बात को नहीं मानते है पुरे परिवार को पानी छानकर पिलाना चाहिए । हम  संकल्प लेवे कि बिना छना पानी का उपयोग नहीं करे । ज्ञानी ने कहा कि पूजा से पूर्व स्नान परात (थाली)  में करना चाहिए षेश पानी को धुप में सुखाना चाहिए । तभी जीव हत्या का  पाप नहीं लगता है घरों में बारिक  झाडु का उपयोग करना चाहिए ताकि जीव हत्या नहीं होवे । 


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