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POLITICS: हर तरफ किसान परेशान, आप नेता नवीन अग्रवाल बोले यह समय आरोप प्रत्यारोप का नहीं, गहन मंथन का है, पढें खबर

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POLITICS: हर तरफ किसान परेशान, आप नेता नवीन अग्रवाल बोले यह समय आरोप प्रत्यारोप का नहीं, गहन मंथन का है, पढें खबर

नीमच :-

नीमच अनाज मंडी में किसान द्वारा अपनी स्वयं की फसल में उचित दाम न मिलने के कारन आक्रोशित होकर आग लगा देना गंभीर घटना है  एवं प्रतिदिन किसानो द्वारा वर्तमान में आत्महत्याए करना उससे भी बड़ा दुखद पहलु है / प्रतिदिन इस प्रकार की घटनाये होना यह प्रदर्शित करता है की हमारे देश का किसान कही न कही वर्तमान परिदृश्य से विचलित है रुष्ट है / देश में कही न कही रोज किसान आंदोलन होना ,आत्महत्या करना ,अपनी फसलों को रोड पर फेंक देना अब आम बात हो गई है और उस पर विपक्षी दलों द्वारा आरोप लगाना और शाशित पक्ष द्वारा प्रत्यारोप करना भी आम बात हो गई है ,लेकिन इन सब के बिच देश के निति निर्माता प्रशाशनिक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि सोचने को मजबूर नहीं है 

हम याद करते है 1998 में मुलताई गोलीकांड एवं 2017 का पिपलिया मंडी गोलीकांड ,दोनों घटनाओं में एक समानता नजर आती है की किसान अपनी वाजिब मांगो के लिए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन तत्कालीन अधिकारियो ने परिस्थितियों को विकट बनाकर असमय किसानो को गोलियों से भून दिया क्या लोकतान्त्रिक व्यवस्था में किसी को भी अपनी मांग संवैधानिक तरीके से रखने की आजादी नहीं है ,क्या हमारे देश के राजनेता एवं प्रशसनिक अधिकारी तानाशाही प्रवति की और अग्रसर नहीं हो रहे है ? 

प्रशाशनिक व्यवस्था का दूसरा पहलु हम याद करते है की किसान आंदोलन के दौरान दलोदा में एक किसान को पुलिसिया बर्बरता के चलते अपनी जान गवाना पड़ी ,वही टीकमगढ़ में किसानो को अकारण पुलिसिया अत्याचार का सामना करना पड़ा और नीमच की बात करते है तो जनप्रतिनिधि से सवाल पूछना किसान को इतना महंगा पड़ा की उसे 18 घंटे थाने में बैठना पड़ा ,यह कुछ घटनाये है जो यह दर्शाती है की हम कंही न कही किसानो के साथ अत्याचार कर रहे है जिसके कारन दिन प्रतिदिन इस प्रकार की घटनाये जन्म ले रही है और किसान आक्रोशित होकर अपना आक्रोश स्वयं पर ही व्यक्त कर रहा है

उपरोक्त समस्त घटनाओ में विपक्ष ने आरोप लगाया एवं सत्ता पक्ष ने प्रत्यारोप ,लेकिन यह समय आरोप प्रत्यारोप का नहीं है हमें समझना होगा की वर्तमान में किसानो को फसलों का लागत मूल्य नहीं मिल रहा है ,जिसके कारन उसे लगातार कर्ज में डूबना पड़  रहा है और जब परिश्थितियां उसके अनुकूल नहीं होती है तो विवश होकर उसे अप्रत्याक्षित कदम उठाना पड़ता है

देश के निति निर्माता के यह गहन मंथन का समय है की किसान के लागत मूल्य को कम किया जावे, देश की 65 प्रतिशत जनता आज भी खेती किसानी पर निर्भर है उसे लाभ का धंधा बनाया  जावे और उसके लिए किसानो को सस्ती बिजली ,सस्ती कीटनाशक दवाइया ,असली कीटनाशक, सस्ता एवं गुणवत्तापूर्ण बिजवारा, सिंचाई के उचित माध्यम ,फसलों के उचित दाम ,बिमा क्लेम राशि का उचित भुगतान मिले, उसके  साथ ही स्वामीनाथन रिपोर्ट तुरंत लागु की जावे जिससे किसानो का रुझान खेती किसानी में लगा रहे और देश में किसानो को अप्रत्याक्षित कदम न उठाने पड़े  सत्ता पक्ष को भी वर्तमान में चल रही प्रशासन एवं बिजली कर्मचारियों की तानाशाही पर अंकुश लगाना नितांत आवश्य्क है

वर्तमान दौर में निरंतर हमें किसानो के असंतोष को दूर करने के कदम उठाने की जरुरत है आरोप प्रत्यारोप की नहीं /हमें गहन मंथन की जरुरत है ताकि देश का किसान का विस्वास बना रहे और देशवासियो को समय पर अन्न मिलता रहे नहीं तो किसी दिन अगर किसान ने यह सोच लिया की में सिर्फ उतना ही अनाज पैदा करूँगा जितना मुझे आवश्य्कता है तो उस दिन बाकि देशवासियो का क्या होगा यह मंथन का विषय है इसलिए यह समय है की हम सब देशवासी अन्नदाता किसानो की समस्याओ पर गहन मंथन करे, आरोप प्रत्यारोप नहीं 


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