NEWS: संसार मित्थ्यात्व है इसके त्याग बिना मोक्ष सम्भव नहीं - डॉ. शिवमुनि महाराज

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NEWS: संसार मित्थ्यात्व है इसके त्याग बिना मोक्ष सम्भव नहीं - डॉ. शिवमुनि महाराज

नीमच :-

नीमच। संसार मित्थ्यात्व है इसके त्याग बिना मोक्ष सम्भव नहीं है व्यक्ति स्वयं त्याग साधना कर सुधरेगा तो उसकी आत्मा का कल्याण होगा ं तो उसमें पुरा परिवार व देष भी प्रेरणा लेगा भव सागर से पार होना है तो कर्मो का क्षय करना होगा पुण्य परमार्थ करना होगा यह बात डाॅ. षिवमुनि महाराज ने कही वे वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ द्वारा जैन कालोनी जैन स्थानक में गुरूवार सुबह आयोजित धर्मसभा मे बोल रहे थे । उन्होंने कहां कि मानव को भव सागर से पार होना है अनंत कर्मो का क्षय करना होगा जीवन में सदलक्ष्य पाना चाहते है तो परीक्षा देनी होगी । लोगों को भोजन परिवार, पैसा अच्छा लगता है भगवान महावीर की साधना सिंह के समान है षेर संगठन में विष्वास नहीं करता है साधु भी अकेले ही चलते है महावीर भी अकेले रहे कोई जाति, कोई सम्प्रदाय नहीं है महावीर जो बोलते है वह षास्त्र बन जाता है जो कुछ तुम इक्कठा किया क्या तुम्हारा है आत्मा का प्रकाष सुरज से बढ़कर है तीनों लोकों को प्रकाष करे लोक तीनों लोकों को प्रकाषवान बनाता है तीर्थकर में कीर्तन प्रार्थना वन्दन पूजा भक्ति आराधना त्याग सर्मपण है संसार पुण्य पाप का खेल है यह सुख की भ्रांति है सुख चाहिए तो कीर्तन करो । मानव अपने चिंतन को बदले धन बंगला बेटा परिवार कुछ भी हमारा नहीं है धर्म का कर्म अन्र्त में धर्म प्रर्दषन की वस्तु नहीं है धर्म को जिया जा सकता है नापा तोला नहीं जाता है किसी भी जीव को कश्ट नहीं दिया यह सच्चा जीवन है तेरा मेरा राग द्वेश मोह वासना से दूर हो तभी कल्याण होगा आत्मा अमर है उन्होंने ष्विो हम षिवोहम वही आत्मा का किनारा में हूं जिसे षस्त्र काटे ना अग्नि जलाएं गलाये ना पानी न मृत्यु मिटाएं वहीं आत्मा सा किनारा में हूं अमर आत्मा का किनारा में हूं गीता ष्लोक प्रस्तुत की । आत्मा को कोई सुखी दुखी नहीं कर सकते है षरीर को दुख दे सकते है आत्मा को नहीं परिवार में रहो लेकिन मेरा ममत्व तेरा मेरा नहीं करे ये सारा मिथ्या तत्व है मोह है तो मोक्ष नहीं मिल सकता है सारी परम्परा का भेद खत्म कर दो कोई छोटा नहीं सब समान है पति-पत्नी एक दुसरें  में आत्मा परमात्मा मानें, गीता में कहां कुछ भी साथ जाने वाला नहीं पुण्य साथ जायेगा । अश्ट गुणों से युक्त आत्मा में हूं हर आत्मा पवित्र बने । आत्मा को पकड़ लो सब छोड़ दो तो सब मिल जायेगा । विचार करेंगे तो केवल ज्ञान नहीं मिलेगा जो गुरू कभी किसी को बाधता नहीं है केवल अपने नियम में बंध जाओ पहचानों अपने आप को देह के भीतर चेतना है इससे मोक्ष पाया जा सकता है आचाय्र श्री ने सभी श्रावक श्राविकाओं को आंखे बंद करवाकर सामुहिक ध्यान के करवाया उन्होंने कहा कि तुम अनंत केवल आत्मा ही अनंत ध्यान में रहो । भगवान महावीर के वेद विज्ञान को समझे धर्मसभा में सकल जैन समाज द्वारा प्रकाषित पारिवारिक मार्गदर्षिका का विमोचन करने के उपरान्त जिला पुलिस अधीक्षक तुशारकांत विद्यार्थी ने कहा कि समाज का विकास सकारात्मक दिषा में की गई में सार्थक पहल से होता है कोई भी समाज सामुहिक पहल करे उसका परिणाम सार्थक सिद्ध होता है पीड़ित मानवता के सेवा के लिए उठे हाथ साधुवाद एवं सम्मान के योग्य है समाज को आगे बढ़ाने की दिषा में किया गया कोई भी कार्य हो वह आर्दष प्रेरणा सिद्ध होगा । साध्वी डाॅ. सुभाशा श्रीजी ने कहा कि लक्ष्मी भाग्य से मिलती है संत सौभाग्य से मिलते है जैसी हमारी दृश्टि होगी वैसा ही हमें श्रृश्टि दिखेगी । षिरिश मुनि श्री ने सामुहिक ध्यान योग करवाया और कहा कि संसार में जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार कर स्वयं के भीतर भी एक संसार है बाहर का संसार अनादिकाल से चल रहा है चलता रहेगा सारा संसार में मानव भीतर चल रहे संसार को मन भाव से अनुभव कर देखे विचार को अच्छा बुरा नहीं माने । पर का उपयोग करे मोह नहीं रखे स्व में ही षांति है जगत की सभी आत्मा समान है हमने सत्य का संग किया तो आनन्द षांति मिली । असत्य का संग किया तो दुख मिलता है आत्मा की और अभिमुख होते तो अनंत सुख मिलता है हमारा ध्यान उधर नहीं है हमारा ध्यान विशयों और योग की ओर है उधर से समय मिलेगा तभी आत्मा का अवलोकन हो सकता है मन वचन काया से अलग तत्व आत्म तत्व अभी भी है पहले भी था आगे भी रहेगा लेकिन हमारा ध्यान नहीं है ज्ञानी का लक्ष्य है कि जो है जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करना होगा तो जीवन आनंदमय होगा । धर्म ध्यान सामायिक एक घंटा मानव करता है लेकिन षेश 23 घंटे तनाव में रहता है । मानव रोटी कपड़ा और मकान को मोह छोड़े । मानव प्रतिदिन दिन में तीन बार साधना करेगें तो लोग हमारे दर्षन के लिए लाईनें लगेगी जितनी साधना बढ़ेगी तो लोग आपके दर्षन कर प्रसन्न होगें । व्यक्ति स्वंय बदलेगा तो परिवार बदलेगा परिवार बदलेगा तो देष बदलेगा । जितने भी तीर्थंकर हुवे उन्होंने पहले स्वंय साधना की स्वंय बदले महावीर के तप का प्रभाव है षरीर का उपयोग सिर्फ आत्म ज्ञान में करेंगे तो हमारा जीवन आनंदायी होगा । प्रकाष चैधरी ने कहा कि गुरू भगवन्त बताते है मानव जीवन मिला है इसे षान से जिएं उन्होंने जीवन है उपहार प्रभु को इसको रोषन कीजिए । काव्य रचना प्रस्तुत की । संतोश चैपड़ा ने आन्नद विहार कालोनी में आचार्य श्री एवं सभी से प्रवचन धर्मसभा में आमंत्रण की विनती की । संगीता जारोली ने कहा कि परम सौभाग्य मिला है ध्यान गुरू आर्षीवाद से जीवन सफल हो जाता है गुरू गुणगान नहीं हो सकता है गुरू ज्ञान का सागर है पुस्तिका मार्गदर्षिका सकल समाज के लिए लाभकारी सिद्ध होगी समाज विकास में मील का पत्थर साबित होगी ।

इस अवसर पर अग्रवाल समाज नीमच के अध्यक्ष षिवनारायण गर्ग, दिगम्बर जैन समाज अध्यक्ष जम्बु कुमार जैन, भाजपा नेता संतोश चैपड़ा, पार्शद प्रतिनिधि विजय बाफना, श्रावक संघ के संयोजक मोहनलाल चैपड़ा, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ अध्यक्ष अजीत कुमार बम्ब, भंवरलाल देषलेहरा, अ.भा. स्थानकवासी जैन कान्फ्रेस जिलाध्यक्ष मनोहर बम्ब षम्भु, मदनलाल वीरवाल, ज्ञानचन्द्र बम्ब, प्रकाष चैधरी दिलीप बाफना, धर्मेन्द्र बम्ब, प्रषान्त श्रीमाल रविन्द्र जैन दिल्ली भंवरलाल देषलेहरा संगीता जारोली संगीता नाहर, आल इण्डिया जैन कान्फ्रेंस के राश्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र जैन सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे ।


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