OMG ! अफीम किसानों से 3 करोड़ वसूलने की तैयारी में था नारकोटिक्स इंस्पेक्टर, पट्टे के मांग रहा था 20 हजार, पढें खबर

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OMG ! अफीम किसानों से 3 करोड़ वसूलने की तैयारी में था नारकोटिक्स इंस्पेक्टर, पट्टे के मांग रहा था 20 हजार, पढें खबर

निम्‍बाहेडा :-

किसानों को आगामी फसल वर्ष के लिए अफीम पट्टे जारी करने की एवज में घूस लेते गिरफ्तार किए गए नारकोटिक्स इंस्पेक्टर विपिन अग्रवाल व कंप्यूटर ऑपरेटर पंकज पांचाल इस अफीम सीजन में ही करीब 3 करोड़ रुपए उगाही करने की तैयारी में थे। इसकी उन्होंने पूरी तैयारी कर ली थी और गांव-गांव में अपने आदमी लगा दिए थे। 

हालांकि समय रहते एक जागरूक किसान एसीबी तक पहुंच गया और एसीबी ने दोनों को पट्टा शिविर शुरू होने से एक दिन पहले ही गिरफ्तार कर लिया। दोनों को अब न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। एसीबी सूत्रों ने बताया कि कोटा जिला अफीम अधिकारी के अधीन विपिन काम कर रहा था और उसके पास कंप्यूटर ऑपरेटर पंकज बतौर संविदा कर्मी कार्यरत था। इन्हें इस सीजन में पहले चरण में करीब 1500 पट्टे जारी करने थे। प्रत्येक किसान से ये 15 से 20 हजार रुपए की मांग कर रहे थे। परिवादी नरेंद्र की शिकायत पर जब एसीबी टीम सत्यापन करने नारकोटिक्स ऑफिस पहुंची तो पता चला कि वहां किसानों का जमावड़ा लगा था और किसान इधर-उधर लोगों को पैसा दे रहे थे। हालांकि उस वक्त एसीबी ने कोई एक्शन लेना इसलिए उचित नहीं समझा, क्योंकि उससे ट्रैप फेल होने की आशंका थी। कार्रवाई के बाद एसीबी उन सभी किसानों से बात करने की भी कोशिश की, लेकिन किसी ने मुंह नहीं खोला। असल में किसान अधिकारियों से इसलिए भी डरते हैं, क्योंकि पूरे साल उन्हीं की देखरेख में खेती करनी होती है और अधिकारियों को उनके खिलाफ असीमित अधिकार प्राप्त होते हैं। 

एसीबी की कार्रवाई के बाद नारकोटिक्स उपायुक्त डॉ. सहीराम मीना ने कोटा के जिला अफीम अधिकारी एपी चौधरी को हटा दिया और उनकी जगह रंजना पाठक को लगाया है। वहीं इंस्पेक्टर विपिन को नारकोटिक्स मुख्यालय ग्वालियर से निलंबित कर दिया गया है। उनकी जगह एचके दानवानी को लगाया गया है। उपायुक्त ने बताया कि अब जिला अफीम अधिकारी समेत पूरे ऑफिस में पोस्टर व बैनर लगवाए हैं कि कोई भी किसी भी काम के लिए पैसा मांगे तो सीधे मेरे चैंबर में आकर बताएं। विभागीय स्तर पर भी इसकी जांच शुरू की गई है, उसके बाद विस्तृत स्थिति सामने आ जाएगी। 

एसीबी ने दोनों की गिरफ्तारी के बाद जब कंप्यूटर ऑपरेटर की तलाशी ली तो उसकी दोनों जेब नोटों से ठसाठस भरी थीं। उससे ट्रैप राशि 15 हजार के अलावा 86 हजार 80 रुपए अलग जब्त किए गए। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उक्त रकम किसानों से ही ली गई थी। मौके पर इतना खुला भ्रष्टाचार चल रहा था, जिसे देख एसीबी भी हैरान रह गई। 

गड़बड़ी पकड़ने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे थे, लेकिन ऑन नहीं थे 
जब भी सेटलमेंट यानी अफीम पट्टे जारी करने का काम चलता है तो नारकोटिक्स विभाग पारदर्शिता के लिहाज से निजी फर्म के माध्यम से टेंडर करके संबंधित एरिया में सीसीटीवी कैमरे लगवाता है, जो शिविर तक लगे रहते हैं। इस बार भी 10 से 16 अक्टूबर तक पट्टा शिविर लगना था, शिविर से पहले वहां कैमरे लगा भी दिए थे, लेकिन ये कैमरे टेंडर की शर्तों के अनुरूप 10 अक्टूबर से शुरू होने थे। यदि कैमरे ऑन होते तो शायद दोनों कार्मिकों की सारी हरकतें कैद हो जाती। 


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