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WOW: वर्ल्ड कप में तीन देशों का राष्ट्रगान है इस भारतीय कवि का गीत-संगीत, पढें खबर

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WOW: वर्ल्ड कप में तीन देशों का राष्ट्रगान है इस भारतीय कवि का गीत-संगीत, पढें खबर

डेस्‍क :-

इंग्लैंड में चल वर्ल्ड कप में तीन देश एक भारतीय कवि के लिखे गीत का संगीत को अपने राष्ट्रगान में ढाल कर गा रहे हैं. इस भारतीय कवि का नाम गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर है. नोबेल अवार्ड प्राप्त टैगोर ऐसी हस्ती थे, जिन्होंने कई देशों की संस्कृति को अपने गीत, संगीत, चित्रकला या दर्शन से प्रभावित किया है

वो तीन देश जो इस वर्ल्ड कप में गुरुदेव टैगोर के लिखे गीत या संगीत से प्रभावित राष्ट्रगान को गाते हुए नजर आ रहे हैं, वो हैं-भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका. किस तरह से टैगोर ने इन तीनों देशों को प्रभावित किया और इनके राष्ट्रगान क्या हैं, वो हम आपको आगे बताते हैं

आमार सोनार बांगला- 

वर्ल्ड कप में जब भी बांग्लादेश की टीम मैदान में आती है तो मैच शुरू होने से पहले पूरे माहौल में जब उसका राष्ट्रीय गीत आमार सोनार बांगला, आमी तोमये भालोबासी..बजना शुरू होता है तो ये स्टेडियम में बैठे हर किसी के कानों में अलग ही तरह की मिठास घोलता है. 2.34 मिनट का ये नेशनल एंथेम बांग्लादेश ने 1971 में तब एडाप्ट किया था, जब ये देश पाकिस्तान से बंटकर आजाद हुआ था

हालांकि टैगोर ने ये गीत तब लिखा था जब 1905 बंगाल को अंग्रेज बांटने वाले थे और समूचे बंगाल में एकता का एक संदेश देना था. तब टैगोर ने अपनी कलम उठाई और आमार सोनार बांगला जैसी कालजयी कविता लिखी. देखते ही देखते ये कविता समूचे बंगाल के लोगों की जुबान पर समा गई

उन दिनों हर कोई इस कविता का पाठ करता था. बंगाल के स्कूलों, संगठनों और संस्थाओं में लोग बहुत फख्र से गुरुदेव की इन पंक्तियों को दोहराते थे. उल्लेखनीय बात ये है कि इस राष्ट्रगान का संगीत भी गुरुदेव का दिया हुआ है

जन-गण-मन अधिनायक जय हो-

वर्ल्ड कप में भारतीय टीम जब कोई मैच खेलने उतरती है तो फिजाओं में जन-गण-मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता..गूंजने लगता है. लोग सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाते हैं. 52 सेकेंड के इस राष्ट्रगान के साथ जब तिरंगा लहराता है तो दिल और दिमाग में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय भावना हिलोरें मारने लगती है. ये राष्ट्रगान गुरुदेव रविद्र नाथ टैगोर ने 1911 के आसपास लिखा था. जिसे सबसे पहले कोलकाता में 1911 में राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया

इसके बाद ये लगातार कांग्रेस के अधिवेशनों का अनिवार्य अंग भी बना. आजादी के आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानियों के बीच भी ये गीत बहुत लोकप्रिय था. देश की आजादी के बाद 24 जनवरी 1950 को जन-गण-मन अधिनायक जय हे राष्ट्रीय गीत के तौर पर संविधान में शामिल किया गया

श्रीलंका माता, श्रीलंका माता- 

तीसरा देश जो इस वर्ल्ड कप में टैगोर से प्रभावित नेशनल एंथेम श्रीलंका माता, श्रीलंका, नमो नमो नमो नमो माता...गा रहा है, दरअसल उसकी रचना टैगोर के ही असर से हुई और इसमें रविंद्र संगीत का इस्तेमाल हुआ है

दरअसल इस गीत को कंपोज करने वाले आनंद समराकून शांति निकेतन के विद्यार्थी थे. उन पर गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर का बहुत असर था. जब वो श्रीलंका लौटे तो उन्होंने गुरुदेव की प्रेरणा से ये गीत लिखा और फिर उसे रविंद्र संगीत के साथ कंपोज किया. ये गीत श्रीलंका में इतना लोकप्रिय हो गया कि इसे 1950 में राष्ट्रीय गान के तौर पर स्वीकार किया गया
इस तरह वर्ल्ड कप में जो दस टीमें खेल रही हैं, उसमें तीन टीमें ऐसी हैं जो गुरुदेव टैगोर के रचे गीत या संगीत को इस प्रतियोगिता में राष्ट्रगान के रूप गा रही हैं


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