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OMG ! चुनाव हारने के बाद कांग्रेस में कॉस्ट कटिंग, किसी की नौकरी गई, किसी को देर से मिल रही सैलरी, पढें खबर

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OMG ! चुनाव हारने के बाद कांग्रेस में कॉस्ट कटिंग, किसी की नौकरी गई, किसी को देर से मिल रही सैलरी, पढें खबर

डेस्‍क :-

लोकसभा चुनाव में करारी हार का ठीकरा कांग्रेस के नेताओं पर अब तक भले ही न फूटा हो लेकिन संगठन में काम करने वाले कर्मचारियों पर इसका दिखना शुरू हो गया है

कुछ विभागों में छंटनी शुरू हो गई है तो कुछ को खर्चे कम करने के निर्देश दे दिए गए हैं. सबसे ज्यादा मुश्किल में पार्टी का डेटा एनालिटिक्स डिपार्टमेंट है. इसमें काम कर रहे कुछ लोगों को कहीं और नौकरी ढूंढ लेने का इशारा कर दिया गया है. यही नहीं इसमें काम कर रहे स्टाफ को जून महीने की तनख्वाह अब तक नहीं मिली है

सोशल मीडिया टीम में हुई छटनी-

कुछ यही हाल पार्टी के हाई प्रोफाइल सोशल मीडिया डिपार्टमेंट का भी है. चुनाव के दौरान लगभग 50 से 55 लोग इस विभाग में काम करते थे जिनकी संख्या अब 35 रह गई है. ये भी कॉस्ट कटिंग के नाम पर किया गया है. इस डिपार्टमेंट में काम कर रहे लोगों को भी जून महीने की सैलरी लगभग 10 दिन लेट मिली है

इसके अलावा सूत्रों के मुताबिक पार्टी के मुख्य दफ्तर 24 अकबर रोड से सटे हुए कांग्रेस सेवादल को भी खर्च में कटौती की ताकीद की गई है. अब तक सेवा दल को कुल मासिक खर्च 2.5 लाख रुपया मिलता था जिसे अब घटाकर 2 लाख कर दिया गया है. खर्च में भारी कटौती के यही निर्देश युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस एनएसयूआई और अन्य संगठनों को भी दिए गए हैं

स्टाफ को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया-

कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट में भी एक स्टाफ को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. गौरतलब है कि हार का ये साइड इफ़ेक्ट एआईसीसी में काम कर रहे स्थाई कर्मचारियों पर अब तक नहीं पड़ा है और उनकी तनख्वाह भी समय से मिल रही है. असर सिर्फ उनलोगों पर है जो अस्थाई कर्मचारी नियुक्त हुए थे.

कांग्रेस के खजाने की हालत 2019 के आम चुनाव के पहले से ही खस्ता है.पार्टी का खजाना खाली है और अब चुनाव में हार के बाद खर्च में कटौती के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं. इसमें भविष्य में नौकरियों में और कटौती और खर्च में कमी शामिल है.

पहले भी दी गई है कम खर्चा करने की सलाह-

पार्टी अपने नेताओं को पहले भी शाहखर्ची से बाज़ आने की सलाह दे चुकी है. पार्टी का दफ्तर पैसे की कमी की वजह से अब तक नहीं बन पाया है. सांसदों और विधायकों से एक महीन की सैलरी पार्टी फंड में जमा कराने को पार्टी पहले ही कह चुकी है.

हालांकि इन खबरों की बाबत पूछने पर नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर एक नेता कहते हैं ,'चुनाव खत्म हो जाने के बाद डेटा एनालिटिक्स डिपार्टमेंट या सोशल मीडिया डिपार्टमेंट की वैसी ज़रूरत नहीं है जो चुनाव के दौरान थी लिहाजा स्टाफ कम होना स्वाभाविक है


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