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COMMODITY MARKET: सोयाबीन के वायदा भाव में आ सकता है उछाल

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COMMODITY MARKET: सोयाबीन के वायदा भाव में आ सकता है उछाल

डेस्‍क :-

नई दिल्ली. सोयाबीन की बाजार में आवक काफी कम है, जबकि तेल मिलों और स्टॉक करने वालों की ओर से मांग काफी ज्यादा बढ़ गई है. इससे आने वाले दिनों में सोयाबीन के वायदा कारोबार में भारी उछाल आ सकता है. फिलहाल, इंदौर की मंडी में सोयाबीन का भाव 3700 रुपये प्रति क्विंटल है, जोकि सालाना आधार पर 15 फीसदी अधिक है. हालांकि, एनसीडीईएक्स पर जनवरी डिलीवरी वाला दाम पिछले साल के मुकाबले 3 फीसदी कम है. व्यापारियों ने बताया कि राजस्थान और मध्यप्रदेश में नई फसल आने वाली लगी है, जबकि महाराष्ट्र में बारिश से कटाई पर बुरा असर पड़ा है.

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के चैयरमैन दविश जैन ने बताया, "महाराष्ट्र में अभी भी बारिश हो रही है. इससे पैदावार और गुणवत्ता प्रभावित होगी.' उन्होंने कहा, पिछले साल के मुकाबले इस साल पैदावार 20 फीसदी घटकर 90 लाख टन रह रहने का अनुमान था. अब इसमें और कमी आ सकती है. हालांकि, इससे निकट से मध्यम अवधि में कीमतें स्थिर बनी रहेंगी.''

इंदौर की संयोगितागंज मंडी में बिहारी लाल नंद किशोर ट्रेडर्स के एनके अग्रवाल ने बताया कि अभी जो भी सोयाबीन मंडियों में आ रहा है, उसे साल्वेंट प्लांट्स (तेल निकालने वाले प्लांट्स) या स्टॉक जमा करने वाले खरीद ले रहे हैं.

उन्होंने कहा कि स्टॉक जमा करने वालों की ओर से भारी खरीदारी को देखकर लगता है कि अगले साल तक बाजार में मजबूती बनी रहेगी. व्यापारियों ने बताया कि सोयाबीन मील एक्सपोर्टर्स की तरफ से भी मांग बढ़ रही है. एक व्यापारी ने कहा कि इंडस्ट्री के हिसाब से सोयाबीन का पुराना स्टॉक (पिछले साल का बकाया) 10 लाख टन से ज्यादा है. उन्होंने कहा कि सीजनल डिमांड पूरी करने के लिए नवंबर में नई फसल आते ही हर कोई मंडियों में खरीदारी बढ़ेगी. हालांकि, भाव 5 साल के रिकॉर्ड दाम 5200 रुपये प्रति क्विंटल तक तो नहीं पहुंचेगे. लेकिन 3000 से 4000 रुपये के रेंज के बीच जरूर रहेंगे.

भाव ज्यादा होने से सोयाबीन मील एक्सपोर्ट रुक गया था क्योंकि भारत कीमतों के लिहाज से वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सका. एक एनालिस्ट ने बताया कि 500 डॉलर प्रति टन के भाव पर भारतीय फसल के दाम वैश्विक कीमतों से 120 डॉलर प्रति क्विंटल अधिक थे. अगर सरकार कोई कदम नहीं उठाती है तो इस साल सोयाबीन का निर्यात पिछले साल के 22 लाख टन के निर्यात की तुलना में आधा रहेगा.नई दिल्ली. सोयाबीन की बाजार में आवक काफी कम है, जबकि तेल मिलों और स्टॉक करने वालों की ओर से मांग काफी ज्यादा बढ़ गई है. इससे आने वाले दिनों में सोयाबीन के वायदा कारोबार में भारी उछाल आ सकता है. फिलहाल, इंदौर की मंडी में सोयाबीन का भाव 3700 रुपये प्रति क्विंटल है, जोकि सालाना आधार पर 15 फीसदी अधिक है. हालांकि, एनसीडीईएक्स पर जनवरी डिलीवरी वाला दाम पिछले साल के मुकाबले 3 फीसदी कम है. व्यापारियों ने बताया कि राजस्थान और मध्यप्रदेश में नई फसल आने वाली लगी है, जबकि महाराष्ट्र में बारिश से कटाई पर बुरा असर पड़ा है.

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के चैयरमैन दविश जैन ने बताया, "महाराष्ट्र में अभी भी बारिश हो रही है. इससे पैदावार और गुणवत्ता प्रभावित होगी.' उन्होंने कहा, पिछले साल के मुकाबले इस साल पैदावार 20 फीसदी घटकर 90 लाख टन रह रहने का अनुमान था. अब इसमें और कमी आ सकती है. हालांकि, इससे निकट से मध्यम अवधि में कीमतें स्थिर बनी रहेंगी.''

इंदौर की संयोगितागंज मंडी में बिहारी लाल नंद किशोर ट्रेडर्स के एनके अग्रवाल ने बताया कि अभी जो भी सोयाबीन मंडियों में आ रहा है, उसे साल्वेंट प्लांट्स (तेल निकालने वाले प्लांट्स) या स्टॉक जमा करने वाले खरीद ले रहे हैं.

उन्होंने कहा कि स्टॉक जमा करने वालों की ओर से भारी खरीदारी को देखकर लगता है कि अगले साल तक बाजार में मजबूती बनी रहेगी. व्यापारियों ने बताया कि सोयाबीन मील एक्सपोर्टर्स की तरफ से भी मांग बढ़ रही है. एक व्यापारी ने कहा कि इंडस्ट्री के हिसाब से सोयाबीन का पुराना स्टॉक (पिछले साल का बकाया) 10 लाख टन से ज्यादा है. उन्होंने कहा कि सीजनल डिमांड पूरी करने के लिए नवंबर में नई फसल आते ही हर कोई मंडियों में खरीदारी बढ़ेगी. हालांकि, भाव 5 साल के रिकॉर्ड दाम 5200 रुपये प्रति क्विंटल तक तो नहीं पहुंचेगे. लेकिन 3000 से 4000 रुपये के रेंज के बीच जरूर रहेंगे.

भाव ज्यादा होने से सोयाबीन मील एक्सपोर्ट रुक गया था क्योंकि भारत कीमतों के लिहाज से वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सका. एक एनालिस्ट ने बताया कि 500 डॉलर प्रति टन के भाव पर भारतीय फसल के दाम वैश्विक कीमतों से 120 डॉलर प्रति क्विंटल अधिक थे. अगर सरकार कोई कदम नहीं उठाती है तो इस साल सोयाबीन का निर्यात पिछले साल के 22 लाख टन के निर्यात की तुलना में आधा रहेगा


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