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WOW: ऐसे वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बनेगी राम की नगरी अयोध्या!

नीमच :-

एक तरफ योगी सरकार अयोध्या को सजाने-संवारने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है. वहीं दूसरी तरफ राम की इस नगरी को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के तौर पर प्रतिष्ठित करने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं.

सब कुछ ठीक रहा तो वह दिन दूर रही, जब यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज सिटी की लिस्ट में अयोध्या का नाम भी शामिल हो जाएगा.

इस मुहिम की अगुवाई फैजाबाद के अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज दीक्षित कर रहे हैं. उनके साथ ही कई शिक्षाविद लगे हुए हैं. इनमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर राना पीवी सिंह की भी सहायता ली जा रही है.

सिर्फ अहमदाबाद को मिला है ये स्टेटस

फैजाबाद के अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज दीक्षित ने बताया कि वर्ल्ड हेरिटेज सिटी की पूरी प्रक्रिया में डेढ़ से दो साल का समय लगता है. भारत में सिर्फ एक शहर अहमदाबाद ही वर्ल्ड हेरिटेज सिटी में शामिल हो सका है. वह भी आठ सालों के प्रयास के बाद. दूसरा काशी का प्रोजेक्ट पिछले 5 साल से लंबित पड़ा हुआ है.

उन्होंने बताया कि प्रोफेसर राना पीवी सिंह ने काशी का प्रोजैक्ट भी तैयार किया है. जब हमने ये प्रोजेक्ट शुरू किया तो उनसे संपर्क किया. वह राजी हो गए.

उन्होंने बताया कि अयोध्या को लेकर हम जो डीपीआर बना रहे हैं, उसे हम राज्य सरकार से लेकर यूनेस्को तक में जमा कर देंगे. उसके बाद राज्य और देश की लॉ​बिंग पर निर्भर करता है कि कैसे इस प्रोजेक्ट पर सहमति बन जाए. हालांकि जैसा प्रोजेक्ट हमने अयोध्या का बनाया है. उस हिसाब से हम उम्मीद करते हैं कि इसे बहुत जल्द ही अप्रूवल मिल जाना चाहिए.

यूनेस्को के मानकों को पूरा करने में लगेंगे करीब दो साल

मनोज दीक्षित ने बताया कि इसकी प्रक्रिया काफी लंबी है. यूनेस्को में जाने से पहले आपको अपने दावों को पहले वेरिफाई कराना होता है. मतलब अगर हम अयोध्या की किसी चीज पर दावा करते हैं कि ये यूनेस्को किस मानक का पूरा करती है. तो उसे हमें अंतर्राष्ट्रीय जनरल पर हमें पब्लिश कराना होता है. जब ये पब्लिश हो जाता है तो तमाम ऐसे लोग जो उस पर काम कर रहे होते हैं, वह उसमें खामियां बताते हैं या प्रशंसा करते हैं या किसी प्वाइंट पर आपत्ति जताते हैं. इसके बाद हम उन आपत्तियों, खामियों को सही करते हैं.

उन्होंने बताया कि यूनेस्को के मानक के हर बिंदु पर इसी प्रक्रिया को अपनाया जाता है. प्रोफेसर ने बताया कि इस प्रक्रिया में हमारे तीन पेपर पब्लिश हो चुके हैं. इन सभी पर सहमति करीब-करीब हो चुकी है. कुल 8 पेपर पब्लिश होने हैं.

दावेदारी के लिए यूनेस्को के 10 में से 8 मानकों पर खरी उतरेगी अयोध्या

उन्होंने बताया कि खास बात ये है कि ​दुनिया भर में जो भी वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बनी हुई हैं, वह इन 10 में से 2 या 3 बिंदुओं को सब्सक्राइब करती रही हैं. अधिकतम 4 बिंदु से ऊपर कोई नहीं गया है. हम अयोध्या का केस 8 बिंदुओं पर ले जा रहे हैं. सिर्फ दो बिंदुओं पर हम दावा नहीं कर सकते क्योंकि न तो यहां समुद्र है, न ही पहाड़ है.

प्रोफेसर मनोज दीक्षित ने बताया कि पूरे प्रोजैक्ट के दो हिस्से हैं. एक तो साइंटिफिक है. जिसमें उदाहरण के दौर पर शहर की ऐतिहासिकता, ये कब से है आदि. इनकी कार्बन डेटिंग आदि की जानकारी प्रोजेक्ट में रहनी है. दूसरा है खासियत. इसमें हमने परंपरा को जोड़ा है. जैसे अयोध्या एक ऐसी जगह हैं, जहां आपको चौबीसों घंटे कहीं न कहीं रामधुन जरूर सुनाई पड़ेगी. फिर है यहां के हैंडीक्राफ्ट आदि.

अयोध्या में होने वाली वर्ल्ड कांफ्रेंस में पेश होगा प्रोजैक्ट

उन्होंने बताया ​कि 23 से 25 अक्टूबर 2018 तक अयोध्या में एक वर्ल्‍ड कांफ्रेंस होने जा रही है. इस कांफ्रेंस में दुनिया भर के करीब 50 विद्वान आ रहे हैं, जो अयोध्या और दुनिया की तमाम धार्मिक नगरियों पर शोध करते रहे हैं. तब तक हम अपना पूरा प्रोजेक्ट तैयार कर लेंगे. इस कांफ्रेंस में हम विद्वानों के समक्ष अपना प्रेजेंटेशन देंगे. इसके बाद सरकार और यूनेस्को में रिपोर्ट दाखिल कर देंगे. इस प्रोजेक्ट में सरकार से कोई सहायता नहीं ली जा रही है. बस अगले साल जो कांफ्रेंस होनी है, उसमें हम जरूर प्रदेश सरकार से सहायता लेंगे.

वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के लिए जरूरी 10 मानक:

1. मानव रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रतिनिधित्व
2. वास्तुकला एवं स्मारकों में निहित मानव मूल्य
3. सांस्कृतिक परंपरा की प्राचीनता एवं निरंतरता
4. भू दृश्य एवं वास्तु की उत्कृष्टता
5. परंपरागत निवास स्थल
6. सांस्कृतिक उत्तरजीविता
7. जीवंत परंपरा एवं अमूर्त धरोहर
8. प्राकृतिक सुंदरता
9. पारिस्थितिकी
10. जैव विविधता


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