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NEWS: बता रहे नीमच से टेक्‍स गुरू, Handicapped ऐसे बचा सकते हैं Income Tax, पढें खबर

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NEWS: बता रहे नीमच से टेक्‍स गुरू, Handicapped ऐसे बचा सकते हैं Income Tax, पढें खबर

डेस्‍क :-

सेक्शन 80DD या 80U के तहत डिडक्शन क्लेम करने के लिए विकलांगता का प्रमाणपत्र देने की जरूरत पड़ती है.सेक्शन 80डीडी और सेक्शन 80यू Handicapped के इलाज पर किए गए खर्च के लिए डिडक्शन की अनुमति देते हैं.

आयकर कानून के तहत कई तरह के खर्चों और निवेश पर टैक्स से छूट मिलती है. इन डिडक्शन को तमाम सेक्शन के अंतर्गत क्लेम कर सकते हैं. दिव्यांगों के इलाज पर किया जाने वाला खर्च भी इसके दायरे में आता है. सेक्शन 80डीडी और 80यू के तहत ऐसे खर्चों को शामिल किया जाता है. वैसे तो इन दोनों सेक्शन के तहत डिडक्शन एक जैसा है. लेकिन, याद रखना चाहिए कि इन्हें साथ-साथ क्लेम नहीं कर सकते हैं. 

The Accounts hub के Tax Consultant Jitendra Sharma कहते हैं, "सेक्शन 80डीडी और सेक्शन 80यू दिव्यांगों के इलाज पर किए गए खर्च के लिए डिडक्शन की अनुमति देते हैं. दोनों सेक्शन के लिए डिडक्शन की रकम बराबर है. हालांकि, इनमें थोड़ा अंतर है. सेक्शन 80डीडी के तहत वे लोग डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं जो दिव्यांग के इलाज पर खर्च करते हैं. जबकि 80यू के तहत खुद दिव्यांग अपने लिए डिडक्शन क्लेम करते हैं. अगर 80यू के तहत डिडक्शन क्लेम किया जाता है तो कोई दूसरा व्यक्ति उनके लिए 80डीडी के अंतर्गत डिडक्शन क्लेम नहीं कर सकता है।"यहां हम सेक्शन 80डीडी और 80यू के तहत डिडक्शन क्लेम करने से जुड़ी और कई जरूरी चीजें बता रहे हैं

कौन क्लेम कर सकता है डिडक्शन?
जैसा पहले ही बताया गया है कि सेक्शन 80DD के तहत कोई भी वह भारतीय नागरिक डिडक्शन क्लेम कर सकता है जिसने खुद पर आश्रित दिव्यांग के इलाज, उनकी ट्रेनिंग और पुनर्वास पर खर्च किया है. आयकर कानून के अनुसार, इन आश्रितों में जीवनसाथी, बच्चे, माता-पिता, भाई और बहन हो सकते हैं.

डिडक्शन क्लेम करने की शर्तें
 सेक्शन 80डीडी या 80यू के तहत डिडक्शन क्लेम करने के लिए जरूरी है कि खुद व्यक्ति या आश्रित किसी ऐसी बीमारी से पीड़ित हो जिसमें वह काम करने में अक्षम हो. इन सेक्शनों में विकलांगता का स्तर 40 फीसदी से कम नहीं होना चाहिए. गंभीर विकलांगता के मामले में डिडक्शन क्लेम किया जा रहा है तो उसमें इसका स्तर कम से कम 80 फीसदी होना चाहिए.

उम्र से नहीं, विकलांगता से तय होती है डिडक्शन की रकम 
क्लेम किया जाना वाला डिडक्शन विकलांगता के प्रतिशत पर निर्भर करता है. यदि आश्रित या व्यक्ति में विकलांगता का प्रतिशत 40 फीसदी या इससे ज्यादा है. लेकिन, 80 फीसदी से कम है तो 75,000 रुपये तक डिडक्शन क्लेम किया जा सकाता है. 

गंभीर विकलांगता है तो 1.25 लाख रुपये तक के डिडक्शन की अनुमति है. 

The Accounts hub के Tax Consultant Jitendra Sharma कहते हैं, "डिडक्शन की रकम विकलांगता के प्रतिशत पर निर्भर करती है. क्लेम किए जाने वाले डिडक्शन की रकम फिक्स है. इसका असली खर्च से लेनादेना नहीं है. इसलिए अगर असली खर्च 75,000 रुपये या 1.25 लाख रुपये से कम भी है तो भी इतनी रकम क्लेम कर सकते हैं."

किन दस्तावेजों की है जरूरत?
सेक्शन 80डीडी या 80यू के तहत डिडक्शन क्लेम करने के लिए विकलांगता का प्रमाणपत्र देने की जरूरत पड़ती है. सोनी कहते हैं कि यह सर्टिफिकेट अधिकृत मेडिकल अथॉरिटी से प्राप्त किया जा सकता है. विकलांगता का सर्टिफिकेट जारी करने वाले को न्यूरोलॉजिस्ट होना चाहिए. उनके पास न्यूरोलॉजी में डाक्टर ऑफ मेडिसिन की डिग्री होनी आवश्यक है. वे सरकारी अस्पताल में सिविल सर्जन या चीफ मेडिकल ऑफिसर भी हो सकते हैं.


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